बड़ा फैसला: योगी सरकार ने बारिश से खराब गेहूं खरीद के मानक शिथिल किए, किसानों को मिलेगी राहत

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बड़ा फैसला: योगी सरकार ने बारिश से खराब गेहूं खरीद के मानक शिथिल किए, किसानों को मिलेगी राहत

सारांश

योगी सरकार ने असमय बारिश से खराब हुए गेहूं की खरीद के लिए मानक शिथिल किए। लस्टर लॉस सीमा 70%25 और सिकुड़े दाने 20%25 तक स्वीकार्य होंगे। इससे प्रदेश के लाखों किसानों को MSP पर फसल बेचने का मौका मिलेगा।

Key Takeaways

  • योगी सरकार ने रबी विपणन सत्र 2025-26 के लिए गेहूं खरीद के मानक शिथिल किए।
  • लस्टर लॉस की स्वीकार्य सीमा बढ़ाकर 70 प्रतिशत की गई।
  • सिकुड़े और टूटे दानों की सीमा 6%25 से बढ़ाकर 20%25 की गई।
  • शिथिल मानकों पर खरीदा गेहूं सामान्य स्टॉक से अलग रखा जाएगा और केवल उत्तर प्रदेश में उपयोग होगा।
  • भंडारण में गुणवत्ता गिरावट की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
  • इस फैसले से प्रदेश के लाखों किसानों को MSP पर फसल बेचने का अवसर मिलेगा।

लखनऊ, 23 अप्रैल 2025उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने असमय हुई बारिश से क्षतिग्रस्त गेहूं की फसल को लेकर किसानों के पक्ष में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। रबी विपणन सत्र 2025-26 के अंतर्गत अब प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद शिथिल गुणवत्ता मानकों के आधार पर की जाएगी, ताकि किसानों को मंडी में औने-पौने दाम पर फसल बेचने की विवशता न झेलनी पड़े।

क्या बदला — नए शिथिल मानक

सरकार के ताज़ा आदेश के अनुसार, लस्टर लॉस (गेहूं की चमक में कमी) की स्वीकार्य सीमा को बढ़ाकर 70 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे पहले यह सीमा काफी कम थी, जिसके चलते बारिश में भीगा या रंग बदला गेहूं खरीद केंद्रों पर अस्वीकार कर दिया जाता था।

इसके साथ ही, सिकुड़े और टूटे दानों की अनुमत सीमा को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है। यह बदलाव उन किसानों के लिए विशेष रूप से राहतकारी है जिनके खेतों में कटाई के समय या उसके बाद बारिश हुई और दाने अंकुरित होने या सिकुड़ने लगे।

अलग भंडारण और प्रबंधन की व्यवस्था

सरकार ने स्पष्ट किया है कि शिथिल मानकों के तहत खरीदे गए गेहूं को सामान्य गुणवत्ता के गेहूं से पूरी तरह अलग रखा जाएगा। इसका पृथक लेखा-जोखा तैयार किया जाएगा और इस स्टॉक का उपयोग केवल उत्तर प्रदेश के भीतर ही किया जाएगा।

भंडारण के दौरान यदि इस गेहूं की गुणवत्ता में और गिरावट आती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार पर होगी। साथ ही, ऐसे स्टॉक को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाएगा ताकि नुकसान न्यूनतम रहे।

किसानों पर सीधा प्रभाव

उत्तर प्रदेश में इस रबी सीजन में लाखों किसान बेमौसम बारिश की मार झेल चुके हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल तक कई जिलों में अप्रैल की शुरुआत में हुई बारिश और ओलावृष्टि ने खड़ी फसल को नुकसान पहुंचाया। ऐसे में किसानों के पास दो ही विकल्प थे — या तो खराब गेहूं को बिचौलियों को कम दाम पर बेचें या सरकारी केंद्रों पर अस्वीकृति का सामना करें।

इस फैसले से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं बेचने का अधिकार अब उन किसानों तक भी पहुंचेगा जिनकी फसल प्राकृतिक आपदा की वजह से प्रभावित हुई है।

नीतिगत संदर्भ और व्यापक विश्लेषण

गौरतलब है कि केंद्र सरकार की भारतीय खाद्य निगम (FCI) आमतौर पर कड़े गुणवत्ता मानकों पर जोर देती है। लेकिन प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राज्य सरकारें केंद्र की अनुमति से या स्वयं के संसाधनों से शिथिल मानकों पर खरीद कर सकती हैं। उत्तर प्रदेश ने इस बार यह जिम्मेदारी स्वयं उठाई है, जो किसान-समर्थक नीति का संकेत देती है।

आलोचक यह भी पूछ सकते हैं कि फसल बीमा योजनाओं का लाभ इन किसानों को मिला या नहीं — क्योंकि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत दावे अक्सर लंबित रहते हैं। शिथिल मानकों पर खरीद एक तात्कालिक राहत है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए बीमा दावों का त्वरित निपटान भी उतना ही जरूरी है।

यह कदम 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले किसानों के बीच सरकार की साख मजबूत करने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले हफ्तों में सरकारी खरीद केंद्रों पर इस नई नीति के क्रियान्वयन की निगरानी की जाएगी।

Point of View

लेकिन असली सवाल यह है कि बेमौसम बारिश की मार हर साल क्यों पड़ती है और फसल बीमा के दावे समय पर क्यों नहीं निपटते। शिथिल मानकों पर खरीद एक बैंडेड समाधान है — स्थायी इलाज नहीं। यह भी ध्यान देने योग्य है कि खराब गेहूं का भंडारण और निस्तारण सरकारी खजाने पर बोझ डालेगा, जिसकी जिम्मेदारी राज्य ने खुद ली है। 2027 के चुनावों से पहले किसान-हितैषी छवि बनाने की यह कोशिश राजनीतिक दृष्टि से समझ में आती है, लेकिन कृषि संकट का दीर्घकालिक समाधान नीति नहीं, ढांचागत सुधार मांगता है।
NationPress
23/04/2026

Frequently Asked Questions

योगी सरकार ने गेहूं खरीद के मानक क्यों शिथिल किए?
असमय हुई बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित हुई, जिससे किसानों का गेहूं सरकारी केंद्रों पर अस्वीकार हो रहा था। सरकार ने मानक शिथिल कर किसानों को MSP पर फसल बेचने का अवसर दिया है।
शिथिल मानकों के तहत गेहूं में लस्टर लॉस की नई सीमा क्या है?
नए आदेश के अनुसार लस्टर लॉस (चमक में कमी) की स्वीकार्य सीमा बढ़ाकर 70 प्रतिशत कर दी गई है। सिकुड़े और टूटे दानों की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत की गई है।
शिथिल मानकों पर खरीदे गए गेहूं का उपयोग कहां होगा?
इस गेहूं का उपयोग केवल उत्तर प्रदेश के भीतर ही किया जाएगा। इसे सामान्य गेहूं से अलग रखा जाएगा और प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाएगा।
खराब गेहूं के भंडारण की जिम्मेदारी किसकी होगी?
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि भंडारण के दौरान गुणवत्ता में और गिरावट आने पर पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। केंद्र सरकार या FCI इस नुकसान के लिए उत्तरदायी नहीं होगी।
इस फैसले से उत्तर प्रदेश के कितने किसानों को फायदा होगा?
प्रदेश के लाखों किसान इस निर्णय से लाभान्वित होने की उम्मीद है, विशेष रूप से वे जिनकी फसल अप्रैल की बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित हुई है। यह राहत पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पूर्वांचल तक के किसानों को मिलेगी।
Nation Press