आर्टेमिस-II के एस्ट्रोनॉट ने 20 करोड़ साल पुराने 'मैनिकौगन क्रेटर' की अद्भुत झलक दिखाई
सारांश
Key Takeaways
- आर्टेमिस मून मिशन चाँद और पृथ्वी के बारे में नई जानकारी प्रदान कर रहा है।
- क्रिस विलियम्स ने मैनिकौगन क्रेटर की झलक दी है।
- चाँद के गड्ढे सौर मंडल के इतिहास को दर्शाते हैं।
- पृथ्वी पर पुराने गड्ढे मिट गए हैं।
- इस मिशन से पृथ्वी के अतीत को समझने में मदद मिलती है।
नई दिल्ली, 6 अप्रैल (राष्ट्रीय प्रेस)। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का आर्टेमिस मून मिशन क्रू जैसे-जैसे चांद के निकट पहुँच रहा है, वह चाँद और पृथ्वी की नई और रोचक झलकियाँ भी प्रस्तुत कर रहा है। इस प्रक्रिया में, एस्ट्रोनॉट क्रिस विलियम्स ने सोशल मीडिया पर पृथ्वी के 20 करोड़ साल पुराने टकराव के निशान, जिसे 'मैनिकौगन क्रेटर' कहा जाता है, की एक झलक साझा की।
क्रिस विलियम्स ने अपने एक्स अकाउंट पर एक दिलचस्प पोस्ट में चाँद और पृथ्वी के गड्ढों (क्रेटर्स) के बारे में चर्चा की है। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे आर्टेमिस II का क्रू चाँद के पास पहुंचेगा, उन्हें चाँद की सतह का अद्भुत दृश्य देखने को मिलेगा। सबसे खास बात यह होगी कि चाँद के फार साइड पर कई गड्ढे स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे। ये गड्ढे सौर मंडल के इतिहास में हुए क्षुद्रग्रहों और उल्कापिंडों के टकरावों के परिणाम हैं, जो हमारे सौर मंडल के अतीत का विवरण प्रदान करते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि पृथ्वी पर भी कई महत्वपूर्ण टकराव हुए हैं, जिनका गहरा असर पड़ा। उदाहरण के लिए, डायनासोर युग के अंत में एक बड़ा टकराव इन जीवों के विलुप्त होने में सहायक था। लेकिन पृथ्वी पर प्लेट टेक्टोनिक्स, मौसम और ज्वालामुखी गतिविधियों के कारण अधिकांश पुराने गड्ढे मिट गए हैं, जिससे पृथ्वी के टकराव का इतिहास छिपा हुआ है। चाँद हमें इस पूरी प्रक्रिया को समझने में मदद करता है और हमारे पृथ्वी के अतीत की अनोखी कहानी सुनाता है।
विलियम्स ने कहा कि पृथ्वी पर अभी भी कई गड्ढे मौजूद हैं, लेकिन वे चाँद के गड्ढों की तरह आसानी से दिखाई नहीं देते। कुछ गड्ढे, जैसे कि कनाडा के क्यूबेक में स्थित मैनिकौगन क्रेटर, अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से देखे जा सकते हैं। यह गड्ढा लगभग 20 करोड़ साल पहले बना था, जब करीब 5 किलोमीटर चौड़े एक क्षुद्रग्रह ने पृथ्वी से टकराया था। आज यह गड्ढा 70 किलोमीटर से भी ज्यादा चौड़ा है।
क्रिस ने अपनी पोस्ट में लिखा कि जब वे व्यायाम कर रहे थे, तब उन्होंने आईएसएस के कूपोला खिड़की से इस गड्ढे का शानदार दृश्य देखा। दृश्य इतना अद्भुत था कि उन्होंने अपनी कसरत रोककर इसकी तस्वीर ले ली।