क्या केंद्र ओशियन इकोसिस्टम अकाउंट को इंटीग्रेट कर भारत के आर्थिक संकेतकों में सुधार करेगा?

Click to start listening
क्या केंद्र ओशियन इकोसिस्टम अकाउंट को इंटीग्रेट कर भारत के आर्थिक संकेतकों में सुधार करेगा?

सारांश

केंद्र सरकार ने ओशियन इकोसिस्टम अकाउंट को पारंपरिक उपायों के साथ जोड़कर भारत के आर्थिक संकेतकों में सुधार लाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह पहल पारदर्शिता, नीति निर्माण और सस्टेनेबल डेवलपमेंट को बढ़ावा देगी, जिससे समुद्री संसाधनों का संरक्षण और बेहतर प्रबंधन संभव हो सकेगा।

Key Takeaways

  • ओशियन इकोसिस्टम अकाउंट को राष्ट्रीय लेखांकन में शामिल किया जाएगा।
  • जलवायु जोखिमों के खिलाफ नीति निर्माण को मजबूत किया जाएगा।
  • तटीय राज्यों को अपने ओशियन अकाउंट्स बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
  • जीडीपी अनुमानों में पारदर्शिता बढ़ेगी।
  • सस्टेनेबल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा।

नई दिल्ली, ३० अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। केंद्र सरकार ने पारंपरिक उपायों के साथ ओशियन इकोसिस्टम अकाउंट को जोड़कर भारत के आर्थिक संकेतकों को सुधारने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः व्यक्त किया है।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) और केरल के अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय (डीईएस) ने कोच्चि में 'महासागर खातों के विकास पर तटीय राज्यों की क्षमता निर्माण' पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया।

एमओएसपीआई के महानिदेशक (केंद्रीय सांख्यिकी) एन.के. संतोषी ने बताया कि ओशियन अकाउंट्स किस तरह से हमारे समुद्री संसाधनों की गतिशीलता को उजागर कर तटीय इकोसिस्टम की सीमा, स्थिति, सेवाओं और परिसंपत्तियों पर नज़र रखते हुए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) को पूरक बनाते हैं।

एमओएसपीआई के सचिव सौरभ गर्ग ने यूएन सिस्टम ऑफ नेशनल अकाउंट्स (एसएनए-२०२५) के अनुरूप ओशियन इकोसिस्टम के आंकड़ों को राष्ट्रीय लेखांकन में शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जो महासागरों, जल और वनों जैसी प्राकृतिक संपत्तियों के लिए ज़िम्मेदारी पर ध्यान केंद्रित करता है।

प्रेस रिलीज में कहा गया है कि इस कदम का उद्देश्य जीडीपी अनुमानों में पारदर्शिता बढ़ाना, जलवायु जोखिमों के खिलाफ नीति निर्माण को मजबूत करना और सस्टेनेबल डेवलपमेंट को बढ़ावा देना है।

सेंट्रल मरीन फिशरीज रिसर्च इंस्टिट्यूट, इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशन इंफॉर्मेशन सर्विसेज, नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर और नेशनल सेंटर फॉर कोस्टल रिसर्च के विशेषज्ञों ने मत्स्य पालन डेटा, सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग और ओशियन अकाउंटिंग पर जलवायु प्रभावों पर चर्चा की।

इस वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य तटीय राज्यों को अपने स्वयं के ओशियन अकाउंट्स बनाने के लिए प्रेरित करना है, जिससे एसईईए फ्रेमवर्क के अनुसार अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय स्तर के ओशियन अकाउंट्स का विकास संभव हो सके।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने इससे पहले २२ जनवरी, २०२५ को 'ओशियन इकोसिस्टम अकाउंट्स इन इंडिया: ए फ्रेमवर्क रिपोर्ट' भी जारी की।

यह रिपोर्ट ओशियन इकोसिस्टम पर इकोलॉजिकल और इकोनॉमिक डेटा को एकीकृत करती है, जो भारत में विकास और सस्टेनेबल ओशियन मैनेजमेंट के बीच संतुलन बनाने में सहायक होती है।

ओशियन अकाउंटिंग का तात्पर्य महासागर द्वारा समर्थित पर्यावरणीय संपत्तियों, आर्थिक गतिविधियों और तटीय आजीविका के बारे में जानकारी को व्यवस्थित रूप से ट्रैक और व्यवस्थित करने की एक विधि से है। इससे सरकारों और समुदायों को समुद्री संसाधनों के संरक्षण और स्थायी उपयोग के लिए बेहतर निर्णय लेने में सहायता मिलेगी।

Point of View

केंद्र सरकार ने ओशियन इकोसिस्टम के आंकड़ों को राष्ट्रीय लेखांकन में शामिल करने का निर्णय लिया है, जो कि तटीय राज्यों के लिए अनिवार्य है। यह कदम न केवल आर्थिक डेटा को सुधारने में मदद करेगा, बल्कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने के लिए नीति बनाने में भी सहायक होगा।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

ओशियन इकोसिस्टम अकाउंट क्या है?
ओशियन इकोसिस्टम अकाउंट समुद्री संसाधनों और तटीय इकोसिस्टम की आर्थिक और पारिस्थितिकी से संबंधित जानकारी को संगठित करने की विधि है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य जीडीपी अनुमानों में पारदर्शिता बढ़ाना और जलवायु जोखिमों के खिलाफ नीति निर्माण को मजबूत करना है।
क्या इससे तटीय राज्यों को लाभ होगा?
हां, यह तटीय राज्यों को अपने स्वयं के ओशियन अकाउंट्स बनाने के लिए प्रेरित करेगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
क्या ओशियन अकाउंटिंग से विकास में मदद मिलेगी?
जी हां, यह सस्टेनेबल ओशियन मैनेजमेंट और विकास के बीच संतुलन बनाने में सहायक होगी।
कौन-कौन से संगठनों ने इस कार्यशाला में भाग लिया?
सेंट्रल मरीन फिशरीज रिसर्च इंस्टिट्यूट, इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशन इंफॉर्मेशन सर्विसेज, और अन्य विशेषज्ञों ने इस कार्यशाला में भाग लिया।