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क्या भारतीय बैंक वैश्विक अनिश्चितता, टैरिफ और कमजोर रुपए से निपटने के लिए बेहतर स्थिति में हैं?

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क्या भारतीय बैंक वैश्विक अनिश्चितता, टैरिफ और कमजोर रुपए से निपटने के लिए बेहतर स्थिति में हैं?

सारांश

क्या भारतीय बैंक वास्तव में वैश्विक अनिश्चितता और कमजोर रुपए के बीच मजबूती से खड़े हैं? एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स की नई रिपोर्ट ने इस सवाल का जवाब दिया है। जानें, क्या हैं वे प्रमुख कारक जो भारतीय बैंकों की मजबूती को दर्शाते हैं।

मुख्य बातें

भारतीय बैंक वैश्विक अनिश्चितता से निपटने के लिए मजबूत स्थिति में हैं।
कमजोर ऋण 3.0-3.5 प्रतिशत पर बने रहेंगे।
ऋण लागत 80-90 आधार अंक तक बढ़ जाएगी।
टैरिफ-हिट सेक्टर में बैंकों का निवेश कम है।
कॉर्पोरेट ऋण में नए एनपीएल का निर्माण अगले दो वर्षों में 1.1 प्रतिशत होगा।

नई दिल्ली, 8 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने बुधवार को एक रिपोर्ट में बताया कि भारतीय बैंक वैश्विक अनिश्चितता, टैरिफ, ब्याज दरों में कटौती और कमजोर होते रुपए से निपटने के लिए एक मजबूत स्थिति में हैं।

ग्लोबल रेटिंग फर्म ने यह भी कहा कि भारतीय कंपनियों की फाइनेंशियल मजबूती में सुधार देखने को मिल रहा है।

भारतीय बैंकों की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण कारकों में टैरिफ-हिट सेक्टर में कम निवेश, कंपनियों का कर्ज कम करना और सुरक्षित खुदरा ऋण पर ध्यान केंद्रित करना शामिल है।

रिपोर्ट में कहा गया है, "हालांकि, अगले दो वर्षों में एसेट क्वालिटी में नरमी आने की संभावना है, कमजोर ऋण 3.0-3.5 प्रतिशत पर बने रहेंगे और ऋण लागत 80-90 आधार अंक तक बढ़ सकती है।"

इस रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि तेज रिकवरी से मिलने वाली राहत कम होने और असुरक्षित खुदरा, 10 लाख रुपए से कम के एसएमई ऋण और माइक्रोफाइनेंस जैसे क्षेत्रों में तनाव के कारण ऋण लागत बढ़ेगी।

22 अगस्त तक, टैरिफ से प्रभावित कपड़ा और रत्न एवं आभूषण क्षेत्रों में भारतीय बैंकों का कुल ऋणों का केवल 2 प्रतिशत ही है।

ये क्षेत्र उच्च ऋणभार और कम मार्जिन के कारण सबसे अधिक असुरक्षित माने जाते हैं।

हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रत्येक कंपनी पर पड़े प्रभाव का निर्धारण प्रोडक्ट मिक्स, बिक्री स्थानों, प्रतिस्पर्धी लाभों और उनके अपने ऋणभार जैसे कारकों पर निर्भर करेगा।

रुपए के अवमूल्यन का बैंकों पर सीमित प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि बाह्य उधारी केवल 5 प्रतिशत है। इसके अलावा, अप्रत्यक्ष प्रभाव भी न्यूनतम रहेगा।

एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स की क्रेडिट विश्लेषक गीता चुघ ने कहा, "हमने 2,000 से अधिक भारतीय कंपनियों के क्रेडिट मॉडल स्कोर पर एशिया-प्रशांत कॉर्पोरेट डिफॉल्ट रेट्स को लागू किया है। हमारे परिदृश्य विश्लेषण से दर्शाता है कि भारतीय बैंक संभावित चूक को आसानी से सहन कर सकते हैं, जो उन्हें विकास के लिए तैयार बनाता है।"

चुग ने आगे कहा, "हमारे परिदृश्य विश्लेषण से यह भी पता चलता है कि कॉर्पोरेट ऋण में नए नॉन परफॉर्मिंग लोन (एनपीएल) का निर्माण अगले दो वर्षों में औसतन 1.1 प्रतिशत प्रति वर्ष होगा।"

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि छोटे और मध्यम आकार के उद्यमों (एसएमई) और खुदरा क्षेत्रों में अधिक गिरावट के कारण नए एनपीएल निर्माण की समग्र दर 1.7-1.8 प्रतिशत होगी।

ऋणों का 3.6-3.7 प्रतिशत पर प्री-प्रोविजन ऑपरेटिंग प्रोफिट का अर्थ है कि भारतीय बैंक उच्च ऋण लागत को आसानी से वहन कर सकते हैं और उनकी आय कई क्षेत्रीय समकक्षों के बराबर या उनसे बेहतर रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि भारतीय बैंक वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं। उनकी रणनीतियों और स्थिरता से यह साबित होता है कि वे न केवल वर्तमान संकटों का सामना कर सकते हैं, बल्कि भविष्य में भी विकास के लिए तैयार हैं।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय बैंकों की स्थिति कैसी है?
भारतीय बैंक वैश्विक अनिश्चितता, टैरिफ, और कमजोर रुपए के बीच एक मजबूत स्थिति में हैं।
एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स की रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
रिपोर्ट में भारतीय बैंकों की मजबूती और वित्तीय स्थिति में सुधार का उल्लेख किया गया है।
नए एनपीएल का निर्माण कब होगा?
अगले दो वर्षों में एनपीएल का निर्माण 1.1 प्रतिशत प्रति वर्ष होगा।
भारतीय बैंकों के लिए प्रमुख कारक क्या हैं?
कम निवेश, कर्ज कम करना और सुरक्षित खुदरा ऋण पर ध्यान केंद्रित करना प्रमुख कारक हैं।
क्या भारतीय बैंक उच्च ऋण लागत को सहन कर सकते हैं?
हां, भारतीय बैंक उच्च ऋण लागत को आसानी से सहन कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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