शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले चाइना साउदर्न की दिल्ली-ग्वांगझोउ सीधी उड़ान 21 सितंबर से बहाल
सारांश
मुख्य बातें
चाइना साउदर्न एयरलाइंस ने 21 सितंबर 2026 से नई दिल्ली और ग्वांगझोउ के बीच सीधी यात्री उड़ान सेवा फिर से शुरू करने की घोषणा की है। लगभग छह साल के अंतराल के बाद बहाल हो रही यह सेवा ऐसे समय आ रही है जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए 12-13 सितंबर को भारत दौरे पर हैं। गौरतलब है कि 2020 के गलवान संघर्ष के बाद यह शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा है।
उड़ान सेवा का विस्तार और व्यावसायिक महत्व
चाइना साउदर्न के अनुसार, दिल्ली-ग्वांगझोउ मार्ग की बहाली से दक्षिण एशिया में उसकी सेवाएँ 8 राउंड-ट्रिप मार्गों पर सप्ताह में 100 से अधिक उड़ानों तक पहुँच जाएँगी। ग्वांगझोउ दक्षिणी चीन का सबसे बड़ा औद्योगिक और कारोबारी केंद्र है, जिससे भारतीय व्यापारियों के लिए यह रूट विशेष रूप से अहम माना जाता है। कोरोना महामारी और उसके बाद भारत-चीन संबंधों में आए तनाव के कारण यह सेवा लंबे समय से बाधित थी।
अन्य एयरलाइंस ने भी बहाल कीं भारत-चीन उड़ानें
चाइना साउदर्न की यह घोषणा अकेली नहीं है। इससे पहले कई एयरलाइंस भारत-चीन हवाई संपर्क को बहाल करने की दिशा में कदम उठा चुकी हैं:
एयर इंडिया ने फरवरी 2026 में अपनी नई दिल्ली-चीन सेवा पुनः आरंभ की। चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस ने 18 अप्रैल को कुनमिंग-कोलकाता रूट दोबारा शुरू किया, जबकि एयर चाइना ने अप्रैल में ही बीजिंग-दिल्ली सेवा बहाल की। इंडिगो ने 30 मार्च को कोलकाता-शंघाई के बीच दैनिक नॉन-स्टॉप उड़ानें शुरू कीं। इसके अलावा, इंडिगो ने पिछले साल 10 नवंबर से नई दिल्ली-ग्वांगझोउ के बीच भी रोज़ाना सीधी उड़ान सेवा चालू की थी।
शी जिनपिंग का भारत दौरा और राजनयिक संदर्भ
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब भारत-चीन संबंध धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्तों में गंभीर तनाव पैदा हो गया था। इसका असर व्यापार, निवेश, वीज़ा प्रक्रिया और जन-संपर्क समेत कई क्षेत्रों पर पड़ा। हालाँकि, अक्टूबर 2024 में सीमा पर सैन्य गतिरोध कम करने को लेकर हुए समझौते के बाद सुधार की प्रक्रिया शुरू हुई।
भारत-चीन हवाई कनेक्टिविटी का बड़ा चित्र
पिछले एक साल में भारत-चीन के बीच हवाई मार्गों की तेज़ी से बहाली यह संकेत करती है कि दोनों देश व्यापारिक और लोगों के बीच आपसी संपर्क को प्राथमिकता दे रहे हैं। गौरतलब है कि कोरोना से पहले दोनों देशों के बीच सैकड़ों साप्ताहिक उड़ानें संचालित होती थीं, लेकिन महामारी और सीमा विवाद ने इस तंत्र को लगभग ठप कर दिया था। अब चाइना साउदर्न सहित कई वाहकों की वापसी से यह ढाँचा तेज़ी से पुनर्निर्मित हो रहा है।
आगे क्या
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित द्विपक्षीय बैठक पर सबकी निगाहें टिकी हैं। यदि शिखर सम्मेलन से सकारात्मक नतीजे आते हैं, तो आने वाले महीनों में और अधिक उड़ान मार्गों तथा वीज़ा सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद की जा सकती है।