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रोजमर्रा की गलत आदतें पेट की बीमारियों को बढ़ा रहीं, डॉक्टर बताते हैं सुधार का तरीका

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रोजमर्रा की गलत आदतें पेट की बीमारियों को बढ़ा रहीं, डॉक्टर बताते हैं सुधार का तरीका

सारांश

आपकी रोजमर्रा की आदतें — खान-पान से लेकर बाथरूम तक — आपके पाचन तंत्र को गंभीरता से प्रभावित कर रही हैं। विशेषज्ञ अब स्पष्ट कह रहे हैं कि संतुलित फाइबर युक्त आहार और सही बाथरूम की आदतें कब्ज, बवासीर जैसी समस्याओं को रोकने की कुंजी हैं।

मुख्य बातें

अमेरिकन गैस्ट्रोएंटरोलॉजिकल एसोसिएशन की गाइडलाइंस के अनुसार, खान-पान और बाथरूम की आदतें पाचन को सीधे प्रभावित करती हैं।
उच्च प्रोटीन आहार में फाइबर की कमी से कब्ज और बवासीर का खतरा बढ़ता है।
दालें, साबुत अनाज, ताजे फल और हरी सब्जियाँ पाचन को बेहतर बनाते हैं।
लंबे समय तक टॉयलेट पर बैठना निचली नसों पर दबाव डालता है, जिससे बवासीर का खतरा बढ़ता है।
मल के साथ खून आना या लंबे समय तक बवासीर रहना गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है।

नई दिल्ली, 3 मई (राष्ट्र प्रेस)। पाचन संबंधी समस्याओं को अक्सर सामान्य माना जाता है, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञ अब स्पष्ट कह रहे हैं कि आज की जीवनशैली इन समस्याओं को तेजी से बढ़ा रही है। अमेरिकन गैस्ट्रोएंटरोलॉजिकल एसोसिएशन की हाल की गाइडलाइंस में कहा गया है कि हमारी खान-पान और बाथरूम की आदतें सीधे पाचन तंत्र को प्रभावित करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पेट नियमित रूप से सही तरीके से साफ हो, तो कई पाचन संबंधी समस्याओं से बचा जा सकता है।

फाइबर की कमी से बढ़ रहीं समस्याएँ

पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में फाइबर की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह मल को नरम बनाता है और उसे आसानी से बाहर निकालने में मदद करता है। हालांकि, आजकल अधिकांश लोग अपनी दैनिक आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त फाइबर का सेवन नहीं कर पाते हैं। वजन घटाने और फिटनेस के चलन में लोग उच्च प्रोटीन आहार की ओर बढ़ गए हैं, खासकर मांस का सेवन बढ़ाया है, जिसमें फाइबर बिल्कुल नहीं होता। समस्या यह नहीं कि प्रोटीन हानिकारक है, बल्कि यह है कि इस दौड़ में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ हमारी थाली से गायब होते जा रहे हैं।

जब उच्च प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ मुख्य आहार बन जाते हैं, तो पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है, जिससे कब्ज और आगे चलकर बवासीर का खतरा बढ़ता है। गौरतलब है कि यह समस्या विशेष रूप से उन लोगों में देखी जा रही है जो तेजी से अपनी जीवनशैली बदल रहे हैं।

संतुलित आहार ही समाधान

चिकित्सकों के अनुसार, समाधान जटिल नहीं है। अपनी थाली में संतुलन लाना होगा — दालें और बीन्स, साबुत अनाज (दलिया, ओट्स), ताजे फल, हरी सब्जियाँ, बीज और मेवे। ये सभी फाइबर से भरपूर होते हैं और पाचन को सुचारु रखते हैं। यदि ये रोज के खाने में शामिल हों, तो कब्ज की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि यह बदलाव धीरे-धीरे किया जाए, ताकि पाचन तंत्र को अनुकूल होने का समय मिले।

बाथरूम की आदतें भी महत्वपूर्ण

केवल खान-पान ही नहीं, बाथरूम से संबंधित आदतें भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। आजकल एक आम आदत बन गई है — टॉयलेट में फोन लेकर बैठना और सोशल मीडिया देखते हुए लंबे समय तक बैठे रहना। डॉक्टरों के अनुसार, यह आदत नुकसानदेह हो सकती है। लंबे समय तक टॉयलेट सीट पर बैठे रहने से निचले हिस्से की नसों पर दबाव बढ़ता है, जिससे सूजन और बवासीर का खतरा बढ़ जाता है। बवासीर मूलतः शरीर के निचले हिस्से की नसों में सूजन होती है, जो अक्सर तब होती है जब मल त्याग के दौरान अत्यधिक जोर लगाया जाता है।

बवासीर को हल्के में न लें

बवासीर आमतौर पर कब्ज से संबंधित होता है, लेकिन यदि यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे या मल के साथ खून आए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार लोग इसे केवल सामान्य बवासीर मानकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन यह किसी गंभीर स्थिति का संकेत भी हो सकता है, जैसे कोलन कैंसर। ऐसी परिस्थितियों में तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है।

छोटी आदतें, बड़ा प्रभाव

निष्कर्ष यह है कि हमारी छोटी-छोटी रोजमर्रा की आदतें ही हमारी समग्र स्वास्थ्य को निर्धारित करती हैं। यह कोई जटिल चिकित्सा उपचार नहीं, बल्कि जागरूकता और नियमितता का विषय है। सौभाग्य से, ये सभी बदलाव हर व्यक्ति अपनी दिनचर्या में आसानी से शामिल कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अधिकांश लोग इसे सामान्य मानते हैं। अमेरिकी दिशानिर्देशों को भारतीय संदर्भ में देखें तो स्पष्ट है कि हमारी परंपरागत आहार संरचना (दालें, अनाज, सब्जियाँ) अपने आप में फाइबर से भरपूर थी, लेकिन आधुनिकीकरण और पश्चिमी खान-पान की नकल ने इसे बर्बाद किया है। महत्वपूर्ण है कि लोग समझें कि बवासीर जैसी 'छोटी' समस्याएँ कभी-कभी गंभीर बीमारियों का प्रवेशद्वार हो सकती हैं। जब तक लोग इसे सामाजिक शर्मिंदगी की वजह से छुपाते रहेंगे, तब तक निदान में देरी होगी और जटिलताएँ बढ़ेंगी।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाचन समस्याएँ बढ़ने का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारण आहार में फाइबर की कमी है। आजकल लोग उच्च प्रोटीन आहार (विशेषकर मांस) की ओर झुक गए हैं, जिसमें फाइबर नहीं होता, जबकि दालें, साबुत अनाज और सब्जियाँ फाइबर से भरपूर होती हैं।
कब्ज और बवासीर से बचने के लिए क्या खाना चाहिए?
दालें, बीन्स, साबुत अनाज (दलिया, ओट्स), ताजे फल, हरी सब्जियाँ, बीज और मेवे खाने चाहिए। ये सभी फाइबर से भरपूर होते हैं और पाचन को सुचारु रखते हैं।
टॉयलेट पर लंबे समय तक बैठना क्यों हानिकारक है?
लंबे समय तक टॉयलेट सीट पर बैठे रहने से निचले हिस्से की नसों पर दबाव बढ़ता है, जिससे सूजन और बवासीर का खतरा बढ़ जाता है।
मल के साथ खून आना कब चिंता का विषय है?
यदि मल के साथ खून आए या बवासीर की समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए, क्योंकि यह कोलन कैंसर जैसी गंभीर स्थिति का संकेत भी हो सकता है।
क्या प्रोटीन आहार पूरी तरह बंद कर देना चाहिए?
नहीं, प्रोटीन आहार बंद करने की जरूरत नहीं है। समस्या यह है कि प्रोटीन को मुख्य आहार बना दिया गया है और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ हटा दिए गए हैं। दोनों को संतुलित तरीके से लेना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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