डॉ. जितेंद्र सिंह का बयान: मेडिकल शिक्षा में क्लिनिकल आधार और एआई का महत्व

Click to start listening
डॉ. जितेंद्र सिंह का बयान: मेडिकल शिक्षा में क्लिनिकल आधार और एआई का महत्व

सारांश

डॉ. जितेंद्र सिंह ने मेडिकल शिक्षा में एआई के बढ़ते उपयोग पर जोर दिया, लेकिन क्लिनिकल आधार की अनिवार्यता को भी रेखांकित किया। यह पुस्तक चिकित्सकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारियों का संग्रह है।

Key Takeaways

  • क्लिनिकल आधार की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है।
  • एआई का उपयोग सहायक के रूप में किया जा सकता है।
  • मेडिकल शिक्षा में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग का महत्व।
  • नई तकनीकों के साथ ज्ञान का निरंतर अद्यतन आवश्यक है।
  • युवाओं को बेसिक्स मजबूत करने की सलाह दी गई।

नई दिल्ली, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को 'बाल चिकित्सा गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी और पोषण' की पोस्टग्रेजुएट पाठ्यपुस्तक के दूसरे संस्करण का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि जब एक मजबूत क्लिनिकल आधार तैयार हो जाता है, तब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एक महत्वपूर्ण सहायक और समर्थ बनाने वाला साधन साबित हो सकता है।

मंत्री ने मेडिकल शिक्षा में मजबूत क्लिनिकल फाउंडेशन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि एआई का बढ़ता उपयोग अपनी जगह पर है, लेकिन बुनियादी चिकित्सा ज्ञान और प्रशिक्षण को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

इस पुस्तक का संपादन प्रो. अनुपम सिबल और डॉ. सरथ गोपालन ने किया है, जबकि प्रस्तावना कैथलीन बी श्वार्ट्ज ने लिखी है। कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने कहा कि तकनीक को चिकित्सा शिक्षा में सहायक के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए, न कि इसके स्थान पर।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि छात्र बिना मूलभूत चिकित्सा सिद्धांतों को समझे एआई पर अधिक निर्भर हो जाते हैं, तो इससे उनकी सीखने की प्रक्रिया कमजोर हो सकती है और वे सक्षम डॉक्टर नहीं बन पाएंगे।

डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि मेडिकल क्षेत्र में अनुसंधान और प्रकाशनों की गति तेजी से बढ़ रही है, इसलिए आवश्यक है कि शिक्षा प्रणाली में कॉन्सेप्ट की स्पष्टता और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर ध्यान दिया जाए।

उन्होंने कहा कि तकनीक ने जानकारी तक पहुंच आसान बना दी है, लेकिन सीखने की प्रक्रिया हमेशा बुनियादी सिद्धांतों और व्यावहारिक अनुभव पर आधारित रहनी चाहिए।

मंत्री ने मेडिकल शिक्षा प्रणाली को निरंतर अपडेट करने की आवश्यकता भी बताई, ताकि नई चुनौतियों जैसे तकनीकी परिवर्तन और बीमारियों की बढ़ती जटिलता का सामना किया जा सके।

उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे पहले अपने बेसिक्स मजबूत करें और फिर किसी विशेष क्षेत्र (स्पेशलाइजेशन) की ओर बढ़ें।

इस किताब के दूसरे संस्करण में हाल के मेडिकल विकास को शामिल किया गया है, जिसमें कुल 45 अध्याय जोड़े गए हैं। इसमें इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज, न्यूरो-गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, सीलिएक डिजीज और गाय के दूध से होने वाली एलर्जी जैसे विषय शामिल हैं।

इसके अलावा, इसमें गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और लिवर से जुड़ी बीमारियों में जेनेटिक्स, एंडोस्कोपी और लिवर ट्रांसप्लांट जैसे नए विषय भी जोड़े गए हैं।

यह किताब मुख्य रूप से बाल रोग (पीडियाट्रिक्स) के छात्रों, विशेषज्ञ डॉक्टरों और प्रैक्टिस कर रहे बाल रोग विशेषज्ञों के लिए तैयार की गई है।

Point of View

NationPress
22/04/2026

Frequently Asked Questions

डॉ. जितेंद्र सिंह ने किस विषय पर पुस्तक का विमोचन किया?
उन्होंने 'बाल चिकित्सा गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी और पोषण' विषय पर पुस्तक का विमोचन किया।
क्या एआई को मेडिकल शिक्षा में इस्तेमाल किया जा सकता है?
जी हां, डॉ. सिंह के अनुसार, एआई एक सहायक के रूप में कार्य कर सकता है, लेकिन इसके लिए मजबूत क्लिनिकल आधार की आवश्यकता है।
इस पुस्तक में कितने अध्याय शामिल हैं?
इस पुस्तक के दूसरे संस्करण में कुल 45 अध्याय जोड़े गए हैं।
कौन-कौन से विषय इस पुस्तक में शामिल हैं?
इस पुस्तक में इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज, न्यूरो-गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बीमारियाँ शामिल हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने छात्रों को क्या सलाह दी?
उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे पहले अपने बेसिक्स मजबूत करें और फिर विशेष क्षेत्र की ओर बढ़ें।
Nation Press