क्या गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक के सेवन से शिशुओं में ग्रुप बी स्ट्रेप्टोकोकस रोग का खतरा बढ़ता है?
सारांश
Key Takeaways
- गर्भावस्था में एंटीबायोटिक का सेवन जीबीएस रोग का खतरा बढ़ा सकता है।
- बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक का सेवन न करें।
- गर्भवती महिलाओं को तीसरी तिमाही में विशेष ध्यान रखना चाहिए।
नई दिल्ली, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक उपयोग को लेकर सरकार ने पहले ही चेतावनी जारी की है कि बिना डॉक्टर की सलाह के इनका सेवन न करें।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपनी मन की बात में एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक प्रयोग पर चिंता व्यक्त की थी। ताजा शोध में यह बात सामने आई है कि गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक के उपयोग से शिशुओं में ग्रुप बी स्ट्रेप्टोकोकस रोग (जीबीएस) का जोखिम बढ़ सकता है।
ग्रुप बी स्ट्रेप्टोकोकस एक प्रकार का बैक्टीरिया है, जो आमतौर पर आंत या जननांगों में पाया जाता है। यह सामान्यतः हानिकारक नहीं होता, लेकिन गर्भवती महिलाओं में एंटीबायोटिक का सेवन जीबीएस बैक्टीरिया के बढ़ने की संभावना को बढ़ा सकता है। इससे नवजात शिशु की रोग प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो सकती है और वह निमोनिया या बुखार जैसी बीमारियों का शिकार हो सकता है।
स्वीडन के कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट और बेल्जियम के एंटवर्प विश्वविद्यालय के एक अंतरराष्ट्रीय शोध दल ने पाया कि गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक्स का सेवन करने से डिलीवरी के चार हफ्ते पहले जीबीएस रोग का खतरा बढ़ जाता है। यदि गर्भवती महिला तीसरी तिमाही में एंटीबायोटिक का सेवन करती है, तो डिलीवरी के समय यह खतरा और बढ़ जाता है। यह प्रसव पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है।
जर्नल ऑफ इंफेक्शन में प्रकाशित इस अध्ययन में कहा गया है, “गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक दवाओं के संपर्क में आने से प्रसवोत्तर चार सप्ताह के भीतर जीबीएस का खतरा बढ़ सकता है। गर्भावस्था की तीसरी तिमाही का प्रारंभिक चरण संक्रमण का एक महत्वपूर्ण समय होता है, जिससे शिशु के संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है।”
शोधकर्ताओं ने 2006 से 2016 तक स्वीडन में हुए सभी एकल जन्मों का अध्ययन किया। इस अध्ययन में 1,095,644 जीवित जन्मों में से 24.5 प्रतिशत शिशु एंटीबायोटिक दवाओं के संपर्क में आए थे। इनमें से लगभग 24.5 प्रतिशत शिशु जन्म से पहले एंटीबायोटिक का प्रभाव झेल चुके थे।
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अध्ययन नवजात शिशुओं में जीबीएस रोग के जोखिम से संबंधित एंटीबायोटिक दवाओं के प्रसवपूर्व संपर्क की जांच करने वाला पहला अध्ययन है।