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डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन की पुण्यतिथि: हरित क्रांति के जनक को देशभर के नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

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डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन की पुण्यतिथि: हरित क्रांति के जनक को देशभर के नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

सारांश

भारत में हरित क्रांति के जनक और भारत रत्न डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन की पुण्यतिथि पर 28 सितंबर को दिल्ली CM रेखा गुप्ता, UP के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य, ब्रजेश पाठक, MP, बिहार और छत्तीसगढ़ के मंत्रियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके कृषि योगदान को अमर बताया।

मुख्य बातें

28 सितंबर 2026 को डॉ.
स्वामीनाथन की पुण्यतिथि पर देशभर के नेताओं ने श्रद्धांजलि दी।
दिल्ली मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और UP के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने सोशल मीडिया पर नमन किया।
स्वामीनाथन ने 1960 के दशक में हरित क्रांति के ज़रिए भारत को खाद्यान्न संकट से उबारा था।
उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न और पद्म विभूषण से नवाजा गया था।
नेताओं ने उनके कृषि अनुसंधान, नवाचार और अन्नदाता के कल्याण के प्रति समर्पण को अविस्मरणीय बताया।

भारत में हरित क्रांति के जनक एवं भारत रत्न से सम्मानित महान कृषि वैज्ञानिक डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन की पुण्यतिथि पर 28 सितंबर 2026 को देश के कोने-कोने से नेताओं ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से लेकर कई राज्यों के मंत्रियों तक, सभी ने उनके अतुलनीय योगदान को नमन किया।

दिल्ली और उत्तर प्रदेश के नेताओं की श्रद्धांजलि

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'भारत में हरित क्रांति के जनक एवं भारत रत्न डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन जी की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि।' उनकी यह भावना देश के उस महापुरुष के प्रति साझा सम्मान की अभिव्यक्ति थी जिन्होंने भारत को खाद्यान्न संकट से उबारने में निर्णायक भूमिका निभाई।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने एक्स पर लिखा कि डॉ. स्वामीनाथन ने अपने वैज्ञानिक दृष्टिकोण, दूरदर्शिता और कृषि के प्रति समर्पण से भारत को खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि डॉ. स्वामीनाथन का जीवन 'कृषि नवाचार, अन्नदाता के कल्याण और आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प के लिए आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने उन्हें 'हरित क्रांति के प्रणेता, भारतीय कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने वाले प्रथम कृषि वैज्ञानिक एवं पद्म विभूषण से सम्मानित' बताते हुए शत-शत नमन किया।

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के नेताओं ने भी किया नमन

मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने अपनी पोस्ट में कहा कि अन्नदाता किसान के हित में डॉ. स्वामीनाथन के दूरदर्शी प्रयासों के फलस्वरूप आज भारत ने कृषि के क्षेत्र में सशक्त पहचान स्थापित की है। उन्होंने जोर दिया कि कृषि हित में उनके शोध एवं नवाचार सदैव स्मरणीय रहेंगे।

मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री विश्वास सारंग ने भी सोशल मीडिया पर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि भारत में आधुनिक एवं प्रगतिशील कृषि की नींव रखने में डॉ. स्वामीनाथन की भूमिका अतुलनीय रही और देश की खाद्यान्न सुरक्षा को सुदृढ़ करने में उनका योगदान सदैव याद किया जाएगा।

बिहार और दिल्ली के मंत्रियों का आदरभाव

बिहार सरकार में मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने एक्स पर पोस्ट करते हुए डॉ. स्वामीनाथन को 'भारत रत्न, सुप्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक, अनुवांशिकी विशेषज्ञ एवं हरित क्रांति के जनक' बताते हुए कोटि-कोटि नमन किया।

दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि डॉ. स्वामीनाथन ने कृषि अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से भारत को खाद्य संकट से उबारने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि कृषि, किसान और राष्ट्र के प्रति उनका समर्पण सदैव प्रेरणादायी रहेगा।

डॉ. स्वामीनाथन की विरासत

गौरतलब है कि डॉ. मनकोम्बु संबासिवन स्वामीनाथन ने 1960 के दशक में उच्च उत्पादकता वाली गेहूँ और धान की किस्मों को भारतीय कृषि में प्रचलित कर देश को भूख के संकट से बाहर निकाला था। उनके प्रयासों को विश्वभर में हरित क्रांति के रूप में जाना जाता है। भारत सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा था। यह ऐसे समय में स्मरण किया जा रहा है जब भारत खाद्यान्न उत्पादन में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है और कृषि नवाचार की नई इबारत लिख रहा है।

उनकी पुण्यतिथि पर देशभर से उमड़ा यह आदरभाव इस बात का प्रमाण है कि उनकी विरासत आज भी भारतीय कृषि नीति और किसान कल्याण की सोच को दिशा देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठाता है — क्या आज की कृषि नीतियाँ उनकी दूरदर्शिता के अनुरूप हैं? स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट वर्षों से लंबित सिफारिशों के साथ धूल फाँकती रही, जबकि नेता हर वर्ष उनके नाम का स्मरण करते हैं। श्रद्धांजलि केवल तब सार्थक होती है जब उनके किसान-कल्याण सिद्धांतों को नीतिगत ज़मीन पर उतारा जाए। सुर्खियों की यह बाढ़ उस संकल्प की कसौटी है जिसे इन नेताओं ने स्वयं अपनी पोस्टों में दोहराया है।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन कौन थे और उनका क्या योगदान था?
डॉ. मनकोम्बु संबासिवन स्वामीनाथन भारत के महान कृषि वैज्ञानिक और हरित क्रांति के जनक थे। उन्होंने 1960 के दशक में उच्च उत्पादकता वाली गेहूँ और धान की किस्मों को भारत में प्रचलित कर देश को भूख और खाद्यान्न संकट से उबारा।
डॉ. स्वामीनाथन को कौन-कौन से सम्मान मिले थे?
डॉ. स्वामीनाथन को भारत सरकार ने सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न और पद्म विभूषण से सम्मानित किया था। उन्हें विश्वभर में कृषि विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी योगदान के लिए अनेक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हुए।
इस पुण्यतिथि पर किन-किन नेताओं ने श्रद्धांजलि दी?
28 सितंबर 2026 को दिल्ली मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, UP के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य एवं ब्रजेश पाठक, MP के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, मंत्री विश्वास सारंग, बिहार मंत्री विजय कुमार सिन्हा, छत्तीसगढ़ मंत्री केदार कश्यप और दिल्ली मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
हरित क्रांति क्या थी और भारत पर इसका क्या असर पड़ा?
हरित क्रांति 1960-70 के दशक की वह कृषि क्रांति थी जिसमें उन्नत बीज, सिंचाई और आधुनिक कृषि तकनीक के उपयोग से भारत का अनाज उत्पादन कई गुना बढ़ा। इससे भारत खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बना और करोड़ों लोगों को भुखमरी से राहत मिली।
डॉ. स्वामीनाथन की पुण्यतिथि क्यों महत्वपूर्ण है?
डॉ. स्वामीनाथन की पुण्यतिथि प्रत्येक वर्ष उनके कृषि योगदान और किसान-कल्याण की दृष्टि को स्मरण करने का अवसर है। यह दिन भारतीय कृषि नीति निर्माताओं के लिए उनकी सिफारिशों और आदर्शों को नीतिगत धरातल पर उतारने की प्रेरणा देता है।
राष्ट्र प्रेस
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