क्या शोधकर्ताओं ने नया एआई टूल बनाया है, जो बर्ड फ्लू और एच5एन1 के मरीजों की पहचान में तेजी लाएगा?

सारांश
Key Takeaways
- नया एआई टूल बर्ड फ्लू के मरीजों की पहचान में तेजी लाता है।
- यह अस्पतालों के ईएमआर में डॉक्टरों के नोट्स को स्कैन करता है।
- सिर्फ 26 मिनट में मरीजों का डेटा प्रोसेस करता है।
- प्रति मरीज की पहचान की लागत मात्र 3 सेंट है।
- यह संक्रमण फैलने से पहले चेतावनी देने में मदद कर सकता है।
नई दिल्ली, 28 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल विकसित किया है, जो बर्ड फ्लू (एच5एन1 वायरस) से संभावित रूप से संक्रमित मरीजों की पहचान करने में अत्यधिक तेज है। यह टूल अस्पतालों के इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड (ईएमआर) में दर्ज डॉक्टरों के नोट्स को स्कैन करके यह पता लगाता है कि कौन मरीज बर्ड फ्लू के खतरे में है।
यह एआई मॉडल मरीज के लक्षणों (जैसे खांसी, बुखार, नाक बंद होना, आंखों में लालपन) की पहचान करता है। इसके बाद, यह यह जांचता है कि क्या मरीज हाल ही में ऐसे स्थानों पर गया है जहां बर्ड फ्लू का खतरा अधिक है, जैसे पोल्ट्री फार्म, मुर्गियों के बीच काम करना, या पशुधन वाले खेत।
यदि मरीज को खतरे में पाया जाता है, तो इसे ‘हाई-रिस्क’ केस के रूप में चिह्नित किया जाता है। 2024 में अमेरिका के अस्पतालों में 13,494 मरीजों का डेटा इस एआई से जांचा गया। इन सभी मरीजों में तेज बुखार, खांसी या आंखों में सूजन जैसे लक्षण थे।
इस शोध को क्लिनिकल इनफेक्शियस डिजीज पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। मैरीलैंड स्कूल ऑफ मेडिसिन विश्वविद्यालय में महामारी विज्ञान और जन स्वास्थ्य की सहायक प्रोफेसर कैथरीन ई. गुडमैन ने कहा, "यह अध्ययन दिखाता है कि कैसे जनरेटिव एआई हमारे सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे में एक महत्वपूर्ण कमी को पूरा कर सकता है, उच्च जोखिम वाले उन रोगियों का पता लगाकर जो नजरअंदाज कर दिए जाते हैं।"
उन्होंने यह भी कहा, "एच5एन1 के जानवरों में लगातार प्रसार के साथ, हमारा सबसे बड़ा खतरा यह है कि हमें नहीं पता कि हमें क्या नहीं पता। चूंकि हम यह ट्रैक नहीं कर रहे हैं कि कितने लक्षण वाले मरीज बर्ड फ्लू के संभावित संपर्क में हैं, इसीलिए संक्रमण का पता नहीं चल पा रहा है। स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों के लिए संभावित मानव संपर्क की निगरानी और उस पर त्वरित कार्रवाई करना आवश्यक है।"
एआई ने 76 मरीजों को चिन्हित किया जिनका बर्ड फ्लू से संपर्क हो सकता था। बाद में जांच में पाया गया कि 14 मरीज हाल ही में मुर्गियों, जंगली पक्षियों या गाय-भैंस के करीब रहे थे। इस एआई को काम पूरा करने में केवल 26 मिनट लगे। प्रति मरीज लागत सिर्फ 3 सेंट (लगभग 2.5 रुपए) आई। इससे स्पष्ट हुआ कि एआई हजारों मरीजों में से भी कुछ खास मामलों को तेजी से पकड़ सकता है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि हम अभी तक यह नहीं जान पाते कि कितने लोग बर्ड फ्लू के संपर्क में आए हैं, और कितनों का परीक्षण होना चाहिए। इसी कारण संक्रमण अक्सर अनदेखा किया जाता है। यह एआई टूल उन मामलों को उजागर कर महामारी फैलने से पहले चेतावनी देने में मदद कर सकता है। भविष्य में इसे लागू कर पूरे देश में एक नेटवर्क बनाया जा सकता है, जो नई संक्रामक बीमारियों पर नज़र रखेगा और समय पर लोगों को बचाने में सहायक होगा।