ट्रंप का $6 बिलियन का साइंस टेक दांव: AI, क्वांटम और स्पेस में NVIDIA, OpenAI समेत दर्जनों कंपनियाँ जुड़ीं
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने 9 अक्टूबर 2026 को वॉशिंगटन में आयोजित 'साइंस: ए न्यू गोल्डन एज समिट' में 6 अरब डॉलर से अधिक की विज्ञान एवं तकनीकी योजनाओं की घोषणा की। इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, न्यूक्लियर पावर्ड स्पेस एक्सप्लोरेशन और बायोमेडिकल साइंस में अनुसंधान को गति देने के लिए सरकारी एजेंसियों, टेक्नोलॉजी कंपनियों, यूनिवर्सिटीज और परोपकारी संस्थाओं को एकजुट किया गया है। व्हाइट हाउस ने इसे सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच अभूतपूर्व साझेदारी बताया है।
जेनेसिस मिशन: सुपरइंटेलिजेंस से वैज्ञानिक खोज
व्हाइट हाउस की एक आधिकारिक फैक्ट शीट के अनुसार, इस कार्यक्रम की धुरी 'जेनेसिस मिशन' है, जिसके लिए 11 उद्योग भागीदारों से 2.4 अरब डॉलर के कंप्यूटिंग संसाधन और तकनीकी सहयोग जुटाया गया है। इस मिशन का मूल उद्देश्य वैज्ञानिक खोजों को तेज़ करने के लिए सुपरइंटेलिजेंस का उपयोग करना है।
प्रमुख तकनीकी कंपनियों ने बड़ी प्रतिबद्धताएँ जाहिर की हैं: NVIDIA ने 1 अरब डॉलर, AMD ने 50 करोड़ डॉलर और OpenAI ने 20 करोड़ डॉलर देने का वादा किया। इसके अलावा Anthropic और Google ने प्रत्येक 15 करोड़ डॉलर की घोषणा की, जबकि Amazon Web Services, Micron और कई टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियाँ भी इस मिशन में सहभागी हैं।
यूनिवर्सिटी और रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा निवेश
प्रशासन ने वैज्ञानिक कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और वर्कफोर्स प्रशिक्षण के विस्तार के लिए यूनिवर्सिटीज, उद्योग जगत और जॉर्जिया राज्य को शामिल करते हुए 1 अरब डॉलर के निवेश की अलग से घोषणा की।
10 राज्यों की 14 से अधिक यूनिवर्सिटी एक रीजनल कंप्यूटिंग कंसोर्टियम में भाग लेंगी। नॉर्थ और साउथ कैरोलिना की पाँच यूनिवर्सिटी मिलकर एक अलग रिसर्च कंप्यूटिंग हब स्थापित करेंगी। नेशनल साइंस फाउंडेशन और डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी ने एडवांस्ड वैज्ञानिक उपकरणों और स्वायत्त प्रयोगशालाओं के लिए 10 करोड़ डॉलर से अधिक की अलग घोषणा की।
क्वांटम कंप्यूटिंग, स्पेस और बायोमेडिकल पर फोकस
एनर्जी डिपार्टमेंट ने 21.5 करोड़ डॉलर की एक प्रतियोगिता शुरू की, जिसका लक्ष्य ऐसे फॉल्ट टॉलरेंट क्वांटम कंप्यूटर विकसित करना है जो वैज्ञानिक रूप से जटिल समस्याओं को हल कर सकें। NASA और एनर्जी डिपार्टमेंट ने न्यूक्लियर पावर्ड अंतरिक्षयान और चंद्र ऊर्जा प्रणालियों के विकास की भी घोषणा की।
इन परियोजनाओं में 'स्पेस रिएक्टर 1' शामिल है — एक न्यूक्लियर पावर्ड अंतरिक्षयान जो 2028 में मंगल मिशन के लिए प्रस्तावित है — और 'लूनर रिएक्टर 1', जो चंद्रमा पर प्रस्तावित न्यूक्लियर फिशन रिएक्टर है।
बायोमेडिकल क्षेत्र में नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH), एनर्जी डिपार्टमेंट और बायोहब ने मिलकर कोशिकाओं और जैविक प्रणालियों के वर्चुअल मॉडल तैयार करने के लिए 1.8 अरब डॉलर का एक संयुक्त कार्यक्रम आरंभ किया है, जिससे बीमारियों की उत्पत्ति को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।
फेलोशिप और नई पीढ़ी के वैज्ञानिक
प्रशासन ने 'जेनेसिस मिशन फेलोशिप' के तहत 10 करोड़ डॉलर देने की घोषणा की, जो उन त्वरित डॉक्टोरल कार्यक्रमों को सहयोग देगी जिनमें AI को विज्ञान और इंजीनियरिंग विषयों के साथ एकीकृत किया गया है। होनहार स्कूली छात्रों, शुरुआती करियर वाले शोधकर्ताओं और पारंपरिक संस्थानों से बाहर कार्यरत वैज्ञानिकों के लिए भी अलग अवसर प्रस्तावित हैं।
एक नए 'एक्स लैब्स कंसोर्टियम' को उद्योग और परोपकारी संस्थाओं से 31 करोड़ डॉलर से अधिक की सहायता मिलेगी, जो बहु विषयक शोध टीमों को बढ़ावा देगा।
व्हाइट हाउस का दृष्टिकोण और आगे की राह
व्हाइट हाउस के साइंस एडवाइजर माइकल क्रैट्सियोस ने कहा, "आज का दिन अमेरिकी वैज्ञानिक जगत के लिए उतना ही क्रांतिकारी है, जितना कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद फेडरल रिसर्च इकोसिस्टम को फिर से तैयार करने के समय था।" उन्होंने यह भी कहा कि ये प्रयास साइंस इकोसिस्टम में अरबों डॉलर का निवेश सुनिश्चित करेंगे ताकि मौजूदा वैज्ञानिक अवसरों को साकार किया जा सके।
व्हाइट हाउस के अनुसार, ये घोषणाएँ पहले के फेडरल निवेशों पर आधारित हैं — जिनमें 'जेनेसिस मिशन' को समर्थन देने के लिए 5 अरब डॉलर की पूर्व प्रतिबद्धता और स्वतंत्र अनुसंधान प्रयोगशालाओं के लिए नेशनल साइंस फाउंडेशन की 1.5 अरब डॉलर की पहल शामिल हैं। यह ऐसे समय में आया है जब चीन और यूरोपीय संघ भी उभरती तकनीकों में भारी निवेश कर रहे हैं और अमेरिकी तकनीकी वर्चस्व को चुनौती दे रहे हैं।