क्या वैज्ञानिकों ने नेचुरल प्रोटीन की खोज की है जो इलेक्ट्रॉनिक सामग्री के भविष्य को बदल सकता है?

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क्या वैज्ञानिकों ने नेचुरल प्रोटीन की खोज की है जो इलेक्ट्रॉनिक सामग्री के भविष्य को बदल सकता है?

सारांश

वैज्ञानिकों ने नेचुरल प्रोटीन की खोज की है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में एक नई क्रांति ला सकती है। इस खोज से भविष्य में सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का विकास संभव है। यह शोध बेहद महत्वपूर्ण है, जो हमें स्मार्ट और टिकाऊ तकनीक के करीब लाता है।

Key Takeaways

  • नेचुरल प्रोटीन की खोज से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का भविष्य बदल सकता है।
  • यह प्रोटीन पर्यावरण अनुकूल और सुरक्षित है।
  • इससे पहनने योग्य स्वास्थ्य मॉनिटर और इम्प्लांटेबल सेंसर का विकास संभव है।
  • यह खोज टिकाऊ तकनीक की ओर एक कदम बढ़ाती है।
  • इस रिसर्च ने एक नई विज्ञान की दिशा दिखाई है।

नई दिल्ली, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मोहालीइंस्टीट्यूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी (आईएनएसटी) के वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण खोज की है। यह संस्थान डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (डीएसटी) के अंतर्गत कार्य करता है। वैज्ञानिकों ने एक प्रसिद्ध सेल्फ-असेंबलिंग बैक्टीरियल शेल प्रोटीन की सेमीकंडक्टर प्रॉपर्टी की खोज की है। इस खोज से भविष्य में ऐसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाए जा सकते हैं, जो सुरक्षित, शरीर के अनुकूल और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं।

आज के समय में सिलिकॉन जैसे पारंपरिक अर्धचालक पदार्थ अत्यधिक उपयोगी हैं, लेकिन इनकी कुछ सीमाएं भी हैं। ये कठिन होते हैं, इनका निर्माण करने में अधिक ऊर्जा लगती है और ये इलेक्ट्रॉनिक कचरा भी बढ़ाते हैं। इस कारण अब ऐसे इलेक्ट्रॉनिक्स की आवश्यकता महसूस की जा रही है जो टिकाऊ, सॉफ्ट और शरीर के साथ आसानी से तालमेल बैठा सकें।

इस शोध में वैज्ञानिकों ने ऐसे बैक्टीरियल प्रोटीन पर प्रयोग किया, जो अपने आप जुड़कर पतली और समतल परतें बना लेते हैं। ये परतें स्वाभाविक रूप से इलेक्ट्रॉनों की खास बनावट रखती हैं। वैज्ञानिक यह जानना चाहते थे कि क्या ये प्रोटीन स्वाभाविक रूप से फोटो एक्टिव हो सकते हैं।

उन्होंने पाया कि जब प्रोटीन सपाट शीट जैसी फिल्में बनाते हैं, तो वे पराबैंगनी प्रकाश को अवशोषित करते हैं और बिना किसी अतिरिक्त डाई, धातु या बाहरी शक्ति के एक विद्युत प्रवाह उत्पन्न करते हैं। यानी ये बिल्कुल वैसे ही काम करते हैं जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले अर्धचालक

वैज्ञानिकों ने यह भी देखा कि जैसे ही इन प्रोटीन पर पराबैंगनी प्रकाश पड़ता है, तो इनकी सतह पर बहुत सूक्ष्म विद्युत आवेश चलने लगते हैं। डॉ. शर्मिष्ठा सिन्हा के नेतृत्व वाली टीम ने, छात्र शोधकर्ताओं सिल्की बेदी और एस. एम. रोज़ के साथ मिलकर कहा, "ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्रोटीन में टायरोसिन होता है, जो एक प्राकृतिक अमीनो एसिड है जो प्रकाश से उत्तेजित होने पर इलेक्ट्रॉन रिलीज कर सकता है।"

टीम ने कहा, "यह खोज वास्तविक दुनिया के लिए रोमांचक संभावनाएं खोलती है। क्योंकि यह मटेरियल लचीला और शरीर के अनुकूल है, इसलिए इसका उपयोग पहनने योग्य स्वास्थ्य मॉनिटर, त्वचा-सुरक्षित यूवी-डिटेक्शन पैच और इम्प्लांटेबल मेडिकल सेंसर बनाने के लिए किया जा सकता है जो मानव शरीर के अंदर सुरक्षित रूप से काम करते हैं।"

यह शोध रॉयल सोसाइटी ऑफ़ केमिस्ट्री के जर्नल केमिकल साइंस में प्रकाशित हुआ है। भविष्य में परिवारों, मरीजों और आम लोगों को ऐसे उपकरण मिल सकते हैं, जो सॉफ्ट, आरामदायक और पर्यावरण अनुकूल हों, साथ ही रोजमर्रा की जिंदगी में आसानी से इस्तेमाल किए जा सकें।

Point of View

बल्कि भविष्य में स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
NationPress
10/01/2026

Frequently Asked Questions

इस प्रोटीन की खोज से क्या लाभ होगा?
यह प्रोटीन सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के विकास में सहायक होगा।
यह शोध कब प्रकाशित हुआ था?
यह शोध रॉयल सोसाइटी ऑफ़ केमिस्ट्री के जर्नल केमिकल साइंस में प्रकाशित हुआ है।
क्या यह प्रोटीन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इस्तेमाल हो सकता है?
हाँ, यह प्रोटीन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में सुरक्षित और प्रभावी रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है।
क्या यह खोज नए तकनीकी उपकरणों को जन्म देगी?
बिल्कुल, यह खोज नए और टिकाऊ तकनीकी उपकरणों के विकास के लिए एक नई दिशा देगी।
इस प्रोटीन में कौन-कौन से तत्व शामिल हैं?
इस प्रोटीन में टायरोसिन जैसे प्राकृतिक अमीनो एसिड शामिल हैं।
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