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क्या 28 अगस्त का दिन भाग्यश्री साठे के लिए शतरंज में बड़ा मोड़ था?

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क्या 28 अगस्त का दिन भाग्यश्री साठे के लिए शतरंज में बड़ा मोड़ था?

सारांश

क्या 28 अगस्त का दिन भाग्यश्री साठे के लिए शतरंज में एक ऐतिहासिक मोड़ था? जानें उनके अद्वितीय सफर और उपलब्धियों के बारे में।

मुख्य बातें

भाग्यश्री साठे का ग्रैंडमास्टर बनना भारतीय शतरंज के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
उन्होंने कई बार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप जीती हैं।
भाग्यश्री ने युवा खिलाड़ियों को प्रेरित किया है।
पद्म श्री और अर्जुन पुरस्कार जैसे राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त किए हैं।

नई दिल्ली, 27 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। भाग्यश्री साठे, एक प्रतिभाशाली भारतीय शतरंज खिलाड़ी हैं, जिन्होंने अपने अद्वितीय खेल कौशल से एक खास पहचान बनाई है। महाराष्ट्र की निवासी ग्रैंडमास्टर भाग्यश्री ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक उपलब्धियों का खजाना अपने नाम किया है। भाग्यश्री भारत की महिला शतरंज खिलाड़ियों में अग्रणी मानी जाती हैं, जिन्होंने इस खेल में शामिल होने के लिए कई युवा खिलाड़ियों को प्रेरित किया है।

4 अगस्त 1961 को मुंबई में जन्मी भाग्यश्री बचपन से ही अत्यंत बुद्धिमान थीं। उन्होंने जल्दी ही शतरंज से परिचय प्राप्त किया, जब उनके पिता ने उन्हें इस खेल से मिलवाया। धीरे-धीरे, उनका इस खेल में रुचि बढ़ने लगी।

भाग्यश्री अपने भाई-बहनों और पिता के साथ शतरंज खेला करती थीं। कुछ समय बाद, उन्होंने अपने पिता को भी इस खेल में मात देना शुरू कर दिया।

भाग्यश्री शतरंज में इतनी मग्न हो जातीं कि उन्हें अपने चारों ओर क्या हो रहा है, इसका ध्यान नहीं रहता। लेकिन जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ी, पढ़ाई पर ध्यान देना जरूरी हो गया, फिर भी उन्होंने शतरंज को अपने शौक के रूप में बनाए रखा।

12वीं कक्षा के बाद, भाग्यश्री ने शतरंज में करियर बनाने का निर्णय लिया। उन्होंने 1979 में मद्रास विमेंस चेस चैंपियनशिप में आठवां स्थान प्राप्त किया। 1985 में, उन्होंने मद्रास नेशनल विमेंस चेस चैंपियनशिप जीत ली। 28 अगस्त 1986 को भाग्यश्री साठे ने ग्रैंडमास्टर की उपाधि अपने नाम की, जब उन्होंने 28वीं वाईएमसीए नेशनल बी महिला शतरंज चैंपियनशिप में महत्वपूर्ण जीत हासिल की।

भाग्यश्री ने पांच बार (1985, 1986, 1988, 1991 और 1994) इंडियन विमेंस चैंपियनशिप जीती। 1991 में, उन्होंने एशियन विमेंस चैंपियनशिप भी अपने नाम की।

नौ बार शतरंज ओलंपियाड में भाग लेने वाली भाग्यश्री को 1986 में 'पद्म श्री' पुरस्कार प्राप्त हुआ और इसके बाद 1987 में उन्हें 'अर्जुन पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।

भाग्यश्री साठे ने शतरंज में कई खिताब हासिल किए हैं और आज भी वे अन्य लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हुई हैं। वर्तमान में, भाग्यश्री को शतरंज में एक आदर्श के रूप में देखा जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उन्होंने अनेक युवा खिलाड़ियों को भी इस खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है। यह एक ऐसा उदाहरण है जो हमें यह सिखाता है कि मेहनत और लगन से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाग्यश्री साठे ने कब ग्रैंडमास्टर का खिताब जीता?
भाग्यश्री साठे ने 28 अगस्त 1986 को ग्रैंडमास्टर का खिताब जीता।
भाग्यश्री ने कितनी बार इंडियन विमेंस चैंपियनशिप जीती है?
भाग्यश्री साठे ने पांच बार इंडियन विमेंस चैंपियनशिप जीती है।
भाग्यश्री को कौन-कौन से पुरस्कार मिले हैं?
भाग्यश्री को 1986 में 'पद्म श्री' और 1987 में 'अर्जुन पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।
भाग्यश्री का जन्मदिन कब है?
भाग्यश्री साठे का जन्म 4 अगस्त 1961 को हुआ था।
राष्ट्र प्रेस
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