मयंक यादव की 150 kmph रफ्तार वापस, आकाश चोपड़ा बोले — यही उनकी असली ताकत
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज आकाश चोपड़ा ने तेज गेंदबाज मयंक यादव की जमकर प्रशंसा करते हुए कहा है कि चोट के बाद इंटरनेशनल क्रिकेट में वापसी करने वाले इस युवा पेसर ने अपनी पुरानी विस्फोटक रफ्तार फिर से हासिल कर ली है। रांची में वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे टी20 मैच में 3 विकेट लेने के बाद मयंक की वापसी को लेकर क्रिकेट जगत में उत्साह देखा जा रहा है।
रांची में शानदार वापसी
लंबे समय तक चोट के कारण मैदान से दूर रहने के बाद मयंक यादव ने रांची में खेले गए दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। दाएं हाथ के इस तेज गेंदबाज ने कामिल पूरन और शिमरोन हेटमायर सहित कुल 3 विकेट चटकाए और भारत को पावरप्ले के दौरान महत्वपूर्ण सफलताएँ दिलाईं।
यह मैच हाई-स्कोरिंग रहा, जिसमें भारत ने 249/5 का विशाल स्कोर खड़ा किया, लेकिन मेज़बान टीम मेहमानों को रोकने में सफल नहीं हो सकी। इसके बावजूद मयंक का व्यक्तिगत प्रदर्शन खासा सराहनीय रहा।
आकाश चोपड़ा का विश्लेषण
आकाश चोपड़ा ने 'जियोस्टार' से बात करते हुए कहा, 'पिछले मैच में उन्होंने कुछ रन दिए थे। इसके साथ ही वापसी करते समय आप ज़ाहिर तौर पर नर्वस होते हैं। यह टॉप लेवल क्रिकेट है और आप समझते हैं कि आप भारत में अच्छी बैटिंग वाली पिच पर खेल रहे हैं और चोट के बाद वापसी कर रहे हैं।'
चोपड़ा ने आगे कहा, 'शुरुआत में मयंक यादव ने एक चौका ज़रूर खाया, लेकिन इसके बाद कामिल पूरन का विकेट लेना उनके लिए शानदार शुरुआत रही। फिर उन्होंने शिमरोन हेटमायर को आउट किया, जो और भी बेहतरीन विकेट था। मयंक की तेज रफ्तार ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उनकी स्पीड बल्लेबाजों को परेशानी में डाल देती है और उन्हें गलतियाँ करने पर मजबूर कर सकती है।'
150 kmph की रफ्तार — मानसिक जीत भी
चोपड़ा के अनुसार, रिहैब के बाद मयंक का 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुँचना महज़ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता का प्रमाण भी है। उन्होंने कहा, 'आखिरी गेंद भी लगभग 150 की रफ्तार से थी। यह पावरप्ले का आखिरी ओवर था, जिसमें आमतौर पर खूब रन बनते हैं, इसलिए एक और विकेट लेना उनके लिए बहुत बड़ी बात थी — क्योंकि रिहैब के बाद मन में हमेशा यह बात रहती है कि क्या मैं फिर से चोटिल हो जाऊंगा? दर्द की वह याद तब तक बनी रहती है, जब तक वह चली न जाए।'
गौरतलब है कि एक तेज गेंदबाज के लिए रफ्तार ही उसकी पूंजी होती है। चोट के बाद वापस उसी गति पर लौटना सबसे बड़ी चुनौती मानी जाती है, और इस लिहाज से मयंक का प्रदर्शन उल्लेखनीय है।
अकेलेपन से मैदान तक का सफर
पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज ने रिहैबिलिटेशन के दौरान के मानसिक दबाव को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा, 'आप छह से आठ महीने अकेले रहते हैं तो ऐसा लगता है जैसे आप किसी गुफा में रह रहे हों। बाकी सब खेल रहे होते हैं और आप बस देखते रहते हैं और अपनी बारी का इंतज़ार करते हैं। इसी कारण इस मैच में उन्होंने जो किया, वह विकेट लेने से कहीं ज़्यादा इस बात का सबूत था कि वह फिर से उतनी तेज गति से गेंदबाजी कर सकते हैं।'
यह बयान इस बात को रेखांकित करता है कि मयंक की यह वापसी केवल आँकड़ों से नहीं, बल्कि खिलाड़ी के संघर्ष और जज़्बे की नज़रिए से भी मापी जानी चाहिए। आने वाले मैचों में उनके प्रदर्शन पर सभी की नज़र रहेगी।