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मयंक यादव की धमाकेदार वापसी: कोच देवेंद्र शर्मा बोले — शॉर्ट बॉल छोड़ो, फुटवर्क पढ़ो

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मयंक यादव की धमाकेदार वापसी: कोच देवेंद्र शर्मा बोले — शॉर्ट बॉल छोड़ो, फुटवर्क पढ़ो

सारांश

21 महीने की चोट और सर्जरी के बाद मयंक यादव की वापसी महज एक मैच नहीं थी — यह एक तेज गेंदबाज का पुनर्जन्म था। हरारे में 149 किमी/घंटे की रफ्तार और 'प्लेयर ऑफ द मैच' के साथ, कोच देवेंद्र शर्मा की एक सलाह ने पूरी तस्वीर बदल दी।

मुख्य बातें

मयंक यादव ने जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी20 इंटरनेशनल में 18 रन देकर 2 विकेट लिए और 'प्लेयर ऑफ द मैच' बने।
पीठ के स्ट्रेस फ्रैक्चर के कारण 21 महीने बाहर रहे; जुलाई 2025 में क्राइस्टचर्च में सर्जरी हुई।
कोच देवेंद्र शर्मा ने 20 जुलाई को जिम्बाब्वे रवाना होने से पहले सलाह दी — शॉर्ट बॉल पर निर्भर न रहें, बल्लेबाज का फुटवर्क पढ़ें।
मयंक की सबसे तेज गेंद 149 किलोमीटर प्रति घंटे ; 24 में से 21 गेंदें 'शॉर्ट-ऑफ-लेंथ' या 'गुड-लेंथ' एरिया में।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) में रोजाना एक्सरसाइज और 15-20 ओवर गेंदबाजी से रिकवरी संभव हुई।
अगला लक्ष्य: फिटनेस बढ़ाकर वनडे और टेस्ट के लिए तैयार होना; एक दिन में 25 ओवर डालने की क्षमता विकसित करना।

मयंक यादव ने जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी20 इंटरनेशनल में सिर्फ 18 रन देकर 2 विकेट लेते हुए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शानदार वापसी की। पीठ के स्ट्रेस फ्रैक्चर के कारण 21 महीने तक मैदान से बाहर रहने और जुलाई 2025 में न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में सर्जरी करवाने के बाद, हरारे स्पोर्ट्स क्लब में इस तेज गेंदबाज की वापसी ने 'प्लेयर ऑफ द मैच' का पुरस्कार भी दिलाया।

कोच की वह सलाह जो काम आई

दिल्ली के सॉनेट क्लब में मयंक के बचपन के कोच देवेंद्र शर्मा ने बताया कि 20 जुलाई को जिम्बाब्वे रवाना होने से पहले उन्होंने मयंक को एक अहम सलाह दी थी। शर्मा ने कहा, 'मैंने उनसे कहा था कि हर समय शॉर्ट बॉल डालने पर ही ध्यान न दो। बस बल्लेबाज के फुटवर्क को देखो और उसी हिसाब से गेंदबाजी करो।' उनके अनुसार यह सलाह बहुत काम आई।

शर्मा ने कहा, 'उन्होंने बहुत अच्छी गेंदबाजी की। उनके कोच के तौर पर मुझे बहुत खुशी हुई क्योंकि उनकी सारी मेहनत, जिसमें रिहैब का समय भी शामिल है, रंग लाई है।'

मैदान पर मयंक का प्रदर्शन

स्पंजी बाउंस वाली पिच पर मयंक ने एक तेज और उछाल भरी गेंद फेंकी जिसने ब्रायन बेनेट को चौंका दिया और गेंद बल्ले के हल्के किनारे से विकेटकीपर ईशान किशन के हाथों में चली गई। इसके बाद डियोन मायर्स भी मयंक की तेज रफ्तार का सामना नहीं कर पाए और उनका विकेट भी मयंक के खाते में गया।

मयंक की पहली 12 गेंदों में से 10 की गति 140 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक थी और उनकी सबसे तेज गेंद 149 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुँची। उनकी 24 गेंदों में से 21 या तो 'शॉर्ट-ऑफ-लेंथ' या 'गुड-लेंथ' एरिया में थीं, जिससे बल्लेबाज बार-बार मुश्किल में दिखे।

मानसिक चुनौतियाँ और रिहैब का सफर

शर्मा ने मयंक के उन कठिन दिनों का जिक्र किया जब आईपीएल 2025 में पीठ की चोट के बाद वे बेंगलुरु के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) में लगातार रिहैब करते रहे। उन्होंने कहा, 'जब कोई खिलाड़ी चोट से जूझता है, तो मन में कई तरह के उतार-चढ़ाव आते हैं — क्या मैं खेल पाऊंगा या नहीं, और अगर खेलूंगा भी तो क्या पहले जैसा खेल पाऊंगा? ऐसे समय में खिलाड़ी को बस मोटिवेशन की जरूरत होती है।'

शर्मा ने बताया कि मयंक ने रोजाना एक्सरसाइज की और फिर सीओई में नियमित रूप से 15-20 ओवर गेंदबाजी करने लगे। उन्होंने टी20 वर्ल्ड कप वार्म-अप मैचों के लिए इंडिया ए टीम में भी जगह बनाई और जून में न्यू चंडीगढ़ में अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच के दौरान नेट बॉलिंग भी की।

सीओई की भूमिका

कोच शर्मा ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के मेडिकल और ट्रेनिंग स्टाफ की अहम भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, 'सीओई में उनके ठीक होने के लिए जरूरी मशीनें और उपकरण मौजूद थे — ऐसी सुविधाएं दिल्ली में नहीं हैं। सीओई में रहने से उन्हें हर पहलू में बेहतर बनने में मदद मिली।'

उल्लेखनीय है कि मयंक की वही सर्जरी हुई थी जो जसप्रीत बुमराह की हुई थी, और इसीलिए उनकी रिकवरी और वर्कलोड प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया।

आगे की राह: वनडे और टेस्ट की तैयारी

शर्मा ने स्पष्ट किया कि फिलहाल टी20 मंच मयंक की वापसी का पहला पड़ाव है, लेकिन दीर्घकालिक योजना में उन्हें लंबे फॉर्मेट के लिए तैयार करना भी शामिल है। उन्होंने कहा, 'हमारा अगला कदम उनकी फिटनेस को बेहतर बनाना और उन्हें वनडे और टेस्ट मैच खेलने के लिए तैयार करना है। सीओई में 15-20 ओवर डालने के बाद, वे जल्द ही एक दिन में 25 ओवर डालने और टेस्ट मैच खेलने की कोशिश करेंगे।'

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी तेज गेंदबाजी की गहराई को लेकर गंभीरता से सोच रहा है, और मयंक की सफल वापसी टीम के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठता है कि आईपीएल के दबाव में युवा तेज गेंदबाजों पर वर्कलोड का बोझ क्यों बढ़ता जा रहा है। मयंक, बुमराह — दोनों की एक जैसी सर्जरी, यह महज संयोग नहीं है। असली परीक्षा अब है — क्या मयंक टी20 की सफलता को लंबे फॉर्मेट में भी दोहरा पाएंगे, या चोट का साया फिर मंडराएगा?
RashtraPress
8 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मयंक यादव ने जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी20 में कैसा प्रदर्शन किया?
मयंक यादव ने पहले टी20 इंटरनेशनल में सिर्फ 18 रन देकर 2 विकेट लिए और 'प्लेयर ऑफ द मैच' का पुरस्कार जीता। उनकी सबसे तेज गेंद 149 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से फेंकी गई।
मयंक यादव को किस चोट के कारण क्रिकेट से दूर रहना पड़ा था?
मयंक यादव पीठ के स्ट्रेस फ्रैक्चर के कारण 21 महीने तक मैदान से बाहर रहे। जुलाई 2025 में न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में उनकी सर्जरी हुई, जो वही सर्जरी थी जो जसप्रीत बुमराह की हुई थी।
कोच देवेंद्र शर्मा ने मयंक यादव को क्या सलाह दी थी?
कोच देवेंद्र शर्मा ने 20 जुलाई को जिम्बाब्वे रवाना होने से पहले मयंक को सलाह दी थी कि वे हर समय शॉर्ट बॉल डालने पर निर्भर न रहें, बल्कि बल्लेबाज के फुटवर्क को देखकर उसी हिसाब से गेंदबाजी करें। शर्मा के अनुसार यह सलाह मैच में बहुत काम आई।
मयंक यादव की रिकवरी में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) की क्या भूमिका रही?
बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में मयंक ने रोजाना एक्सरसाइज की और नियमित रूप से 15-20 ओवर गेंदबाजी की। कोच शर्मा के अनुसार सीओई में उपलब्ध विशेष मशीनें और उपकरण उनकी रिकवरी को तेज करने में बेहद सहायक रहे।
मयंक यादव का अगला लक्ष्य क्या है?
कोच देवेंद्र शर्मा के अनुसार अगला लक्ष्य मयंक की फिटनेस को बेहतर बनाना और उन्हें वनडे और टेस्ट मैच खेलने के लिए तैयार करना है। इसके तहत एक दिन में 25 ओवर डालने की क्षमता विकसित करना प्रमुख कदम होगा।
राष्ट्र प्रेस
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