मयंक यादव की धमाकेदार वापसी: कोच देवेंद्र शर्मा बोले — शॉर्ट बॉल छोड़ो, फुटवर्क पढ़ो
सारांश
मुख्य बातें
मयंक यादव ने जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी20 इंटरनेशनल में सिर्फ 18 रन देकर 2 विकेट लेते हुए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शानदार वापसी की। पीठ के स्ट्रेस फ्रैक्चर के कारण 21 महीने तक मैदान से बाहर रहने और जुलाई 2025 में न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में सर्जरी करवाने के बाद, हरारे स्पोर्ट्स क्लब में इस तेज गेंदबाज की वापसी ने 'प्लेयर ऑफ द मैच' का पुरस्कार भी दिलाया।
कोच की वह सलाह जो काम आई
दिल्ली के सॉनेट क्लब में मयंक के बचपन के कोच देवेंद्र शर्मा ने बताया कि 20 जुलाई को जिम्बाब्वे रवाना होने से पहले उन्होंने मयंक को एक अहम सलाह दी थी। शर्मा ने कहा, 'मैंने उनसे कहा था कि हर समय शॉर्ट बॉल डालने पर ही ध्यान न दो। बस बल्लेबाज के फुटवर्क को देखो और उसी हिसाब से गेंदबाजी करो।' उनके अनुसार यह सलाह बहुत काम आई।
शर्मा ने कहा, 'उन्होंने बहुत अच्छी गेंदबाजी की। उनके कोच के तौर पर मुझे बहुत खुशी हुई क्योंकि उनकी सारी मेहनत, जिसमें रिहैब का समय भी शामिल है, रंग लाई है।'
मैदान पर मयंक का प्रदर्शन
स्पंजी बाउंस वाली पिच पर मयंक ने एक तेज और उछाल भरी गेंद फेंकी जिसने ब्रायन बेनेट को चौंका दिया और गेंद बल्ले के हल्के किनारे से विकेटकीपर ईशान किशन के हाथों में चली गई। इसके बाद डियोन मायर्स भी मयंक की तेज रफ्तार का सामना नहीं कर पाए और उनका विकेट भी मयंक के खाते में गया।
मयंक की पहली 12 गेंदों में से 10 की गति 140 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक थी और उनकी सबसे तेज गेंद 149 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुँची। उनकी 24 गेंदों में से 21 या तो 'शॉर्ट-ऑफ-लेंथ' या 'गुड-लेंथ' एरिया में थीं, जिससे बल्लेबाज बार-बार मुश्किल में दिखे।
मानसिक चुनौतियाँ और रिहैब का सफर
शर्मा ने मयंक के उन कठिन दिनों का जिक्र किया जब आईपीएल 2025 में पीठ की चोट के बाद वे बेंगलुरु के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) में लगातार रिहैब करते रहे। उन्होंने कहा, 'जब कोई खिलाड़ी चोट से जूझता है, तो मन में कई तरह के उतार-चढ़ाव आते हैं — क्या मैं खेल पाऊंगा या नहीं, और अगर खेलूंगा भी तो क्या पहले जैसा खेल पाऊंगा? ऐसे समय में खिलाड़ी को बस मोटिवेशन की जरूरत होती है।'
शर्मा ने बताया कि मयंक ने रोजाना एक्सरसाइज की और फिर सीओई में नियमित रूप से 15-20 ओवर गेंदबाजी करने लगे। उन्होंने टी20 वर्ल्ड कप वार्म-अप मैचों के लिए इंडिया ए टीम में भी जगह बनाई और जून में न्यू चंडीगढ़ में अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच के दौरान नेट बॉलिंग भी की।
सीओई की भूमिका
कोच शर्मा ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के मेडिकल और ट्रेनिंग स्टाफ की अहम भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, 'सीओई में उनके ठीक होने के लिए जरूरी मशीनें और उपकरण मौजूद थे — ऐसी सुविधाएं दिल्ली में नहीं हैं। सीओई में रहने से उन्हें हर पहलू में बेहतर बनने में मदद मिली।'
उल्लेखनीय है कि मयंक की वही सर्जरी हुई थी जो जसप्रीत बुमराह की हुई थी, और इसीलिए उनकी रिकवरी और वर्कलोड प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया।
आगे की राह: वनडे और टेस्ट की तैयारी
शर्मा ने स्पष्ट किया कि फिलहाल टी20 मंच मयंक की वापसी का पहला पड़ाव है, लेकिन दीर्घकालिक योजना में उन्हें लंबे फॉर्मेट के लिए तैयार करना भी शामिल है। उन्होंने कहा, 'हमारा अगला कदम उनकी फिटनेस को बेहतर बनाना और उन्हें वनडे और टेस्ट मैच खेलने के लिए तैयार करना है। सीओई में 15-20 ओवर डालने के बाद, वे जल्द ही एक दिन में 25 ओवर डालने और टेस्ट मैच खेलने की कोशिश करेंगे।'
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी तेज गेंदबाजी की गहराई को लेकर गंभीरता से सोच रहा है, और मयंक की सफल वापसी टीम के लिए एक सकारात्मक संकेत है।