अजय कुमार शर्मा: जम्मू-कश्मीर को रणजी चैंपियन बनाने वाले कोच, 36 वर्ष की आयु में मिले बैन
सारांश
Key Takeaways
- अजय कुमार शर्मा की कहानी प्रेरणादायक है।
- उन्होंने जम्मू-कश्मीर को रणजी ट्रॉफी का चैंपियन बनाया।
- 36 वर्ष की आयु में उन्हें फिक्सिंग के लिए बैन किया गया।
- घरेलू क्रिकेट में उनका प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा है।
- जीवन में कठिनाइयों के बावजूद सफलता संभव है।
नई दिल्ली, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। जीवन में हमेशा वैसा नहीं होता जैसा हम चाहते हैं। कभी हमें इच्छाओं से अधिक मिलता है, तो कभी प्रतिभा और क्षमता के अनुसार अवसर नहीं मिलते। अजय कुमार शर्मा की कहानी इसी का एक उदाहरण है।
अजय कुमार शर्मा का जन्म 3 अप्रैल, 1964 को दिल्ली में हुआ। बचपन से ही उनका क्रिकेट के प्रति जुनून था। बल्लेबाजी और गेंदबाजी, दोनों में उनकी प्रतिभा के कारण उन्हें जूनियर स्तर पर मौके मिलने लगे।
दाएं हाथ के मध्यक्रम के बल्लेबाज और बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज अजय को 1984-85 सत्र में दिल्ली के लिए डेब्यू का मौका मिला। उन्होंने गेंद और बल्ले दोनों से अपनी छाप छोड़ी, लेकिन भारतीय टीम में शामिल होने के लिए उन्हें चार साल का इंतजार करना पड़ा।
अजय शर्मा ने जनवरी 1988 में भारतीय क्रिकेट टीम के लिए टेस्ट और वनडे में पदार्पण किया। उन्होंने नवंबर 1993 में अपना अंतिम अंतरराष्ट्रीय मैच खेला। इस दौरान उन्होंने 1 टेस्ट और 31 वनडे में भाग लिया। टेस्ट में, उन्होंने 2 पारियों में 53 रन बनाए, जबकि 27 वनडे पारियों में 3 अर्धशतक के साथ 424 रन बनाते हुए 15 विकेट भी लिए। प्रदर्शन में कमी के कारण उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। 1993 में टीम से बाहर होने के बाद उन्हें राष्ट्रीय टीम में लौटने का अवसर नहीं मिला।
अजय शर्मा का घरेलू करियर बहुत सफल रहा है। उन्होंने दिल्ली और हिमाचल प्रदेश के लिए 129 प्रथम श्रेणी मैचों में 166 पारियों में 38 शतक और 36 अर्धशतक के साथ 10,120 रन बनाए। उनका सर्वोच्च स्कोर नाबाद 259 रन था। इसके अलावा, उनके नाम 87 विकेट भी थे।
113 लिस्ट ए मैचों में 97 पारियों में 2 शतक और 20 अर्धशतक के साथ उन्होंने 2,814 रन बनाए, जिसमें उनका सर्वोच्च स्कोर नाबाद 135 था। लिस्ट ए में उनके नाम 108 विकेट भी दर्ज हैं। 1999-2000 में, वे रणजी ट्रॉफी में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बने और उनका 31वां शतक एक रिकॉर्ड बना। 1996-97 में, वे एक सीजन में 1000 रन बनाने वाले सिर्फ तीसरे बल्लेबाज बने।
हालांकि, 2000 में, शर्मा को फिक्सर्स के साथ संपर्क रखने के लिए दोषी पाया गया और उन पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया गया। इस प्रतिबंध ने 36 वर्ष की आयु में उनके करियर का अंत कर दिया।
2014 में, बीसीसीआई ने अजय शर्मा पर लगे फिक्सिंग के आरोप हटा दिए और इसके बाद उन्होंने कोचिंग में कदम रखा। उन्होंने कोचिंग में भी अद्भुत सफलता हासिल की है और पहली बार जम्मू-कश्मीर को रणजी ट्रॉफी का चैंपियन बनाया। शर्मा की यह कहानी हमें सिखाती है कि जीवन की दिशा कभी भी बदल सकती है, इसके लिए स्पष्ट लक्ष्य और निरंतर मेहनत जरूरी है।