एलेक्सिया पुटेलस ने तीसरी बार जीता महिला बैलन डी'ओर 2026, बोनमाटी के रिकॉर्ड की बराबरी
सारांश
मुख्य बातें
स्पेन की दिग्गज मिडफील्डर एलेक्सिया पुटेलस ने 2026 का महिला बैलन डी'ओर जीतकर फुटबॉल जगत में एक नया अध्याय लिख दिया है। यह उनका तीसरा बैलन डी'ओर खिताब है और इसी के साथ वे अपनी हमवतन ऐताना बोनमाटी के रिकॉर्ड की बराबरी पर आ गई हैं। उल्लेखनीय है कि यह लगातार छठा वर्ष है जब किसी स्पेनिश महिला फुटबॉलर ने यह प्रतिष्ठित सम्मान हासिल किया है।
रिकॉर्ड और उपलब्धि
पुटेलस इससे पहले 2021 और 2022 में भी यह पुरस्कार जीत चुकी हैं। बोनमाटी ने 2023, 2024 और 2025 में लगातार तीन बार यह खिताब अपने नाम किया था, और अब पुटेलस ने भी तीन बार जीतकर उसी मुकाम को छू लिया है। स्पेनिश फुटबॉल का यह दबदबा पिछले छह वर्षों से अटूट बना हुआ है — एक ऐसी उपलब्धि जो विश्व फुटबॉल में किसी एक देश की महिला टीम की सर्वोच्चता को रेखांकित करती है।
मतदान प्रक्रिया और प्रतिस्पर्धा
पुटेलस को फीफा की टॉप-50 रैंकिंग वाले देशों के पत्रकारों के एक अंतरराष्ट्रीय पैनल द्वारा सर्वाधिक वोट दिए गए। खिताब की दौड़ में बार्सिलोना की स्ट्राइकर इवा पाजोर दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि मैनचेस्टर सिटी की फॉरवर्ड खदीजा शॉ तीसरे स्थान पर रहीं। इस त्रिकोणीय प्रतिस्पर्धा ने यह भी दर्शाया कि महिला फुटबॉल में प्रतिभा का स्तर तेजी से ऊँचा हो रहा है।
चोट से वापसी की प्रेरणादायक कहानी
पुटेलस की यह जीत केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि एक असाधारण संघर्ष की कहानी भी है। 2022 में उन्हें गंभीर एंटीरियर क्रूशिएट लिगामेंट (ACL) की चोट का सामना करना पड़ा था, जो एक फुटबॉलर के करियर के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती है। उस चोट से उबरकर शीर्ष स्तर पर वापसी और फिर तीसरी बार बैलन डी'ओर जीतना उनकी मानसिक दृढ़ता और खेल के प्रति समर्पण का प्रमाण है।
मैदान पर शानदार प्रदर्शन
बीते सीजन में 32 वर्षीया पुटेलस ने सभी प्रतियोगिताओं में मिलाकर 21 गोल और 13 असिस्ट दर्ज किए। इनमें से 7 गोल विमेंस चैंपियंस लीग में आए, जब बार्सिलोना ने छह सीजन में चौथी बार कॉन्टिनेंटल खिताब अपने नाम किया। गौरतलब है कि जुलाई में पुटेलस विमेंस सुपर लीग की टीम लंदन सिटी लायनेसेस में शामिल हो गई हैं, लेकिन इससे पहले उन्होंने बार्सिलोना को चार बार चैंपियंस लीग चैंपियन बनाया।
पुटेलस का संदेश: हार मत मानो
पुरस्कार मिलने के बाद पुटेलस ने दुनिया भर के युवाओं को संबोधित करते हुए कहा, 'दुनिया भर के सभी लड़के और लड़कियाँ — अगर आपको फुटबॉल पसंद है और अगर आप फुटबॉल खेलना चाहते हैं, तो फुटबॉल खेलें। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप लड़के हैं या लड़की। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कहाँ से आते हैं। अगर कोई आपसे कहे कि आप यह नहीं कर सकते, तो उसकी बात मत सुनो। खुद पर भरोसा रखो।' उनका यह संदेश महिला खेलों के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बनकर उभरा है।