क्या अल्पाइन स्कीइंग वास्तव में बर्फीले पहाड़ों का खेल है, जिसमें महिलाओं ने पुरुषों को चुनौती दी?
सारांश
Key Takeaways
- अल्पाइन स्कीइंग एक साहसिक खेल है जो विंटर ओलंपिक में होता है।
- महिलाओं की भागीदारी इस खेल में बढ़ रही है।
- भारत के खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान बनाई है।
- अल्पाइन स्कीइंग में कई इवेंट्स हैं, जैसे डाउनहिल, स्लैलम, जाइंट स्लैलम।
- ओलंपिक पदक की संभावना को बढ़ाने के लिए निवेश और प्रशिक्षण की आवश्यकता है।
नई दिल्ली, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। ‘अल्पाइन स्कीइंग’ एक प्रसिद्ध खेल है जो विंटर ओलंपिक में आयोजित होता है, जिसमें स्कीयर बर्फीले पहाड़ों पर तेज गति से ढलानों से फिसलते हैं। इस खेल में गति, संतुलन और तकनीक का विशेष ध्यान रखा जाता है और इसमें डाउनहिल, स्लैलम, जाइंट स्लैलम और सुपर-जी जैसे इवेंट शामिल होते हैं।
‘अल्पाइन’ शब्द का अर्थ ऊंचे पहाड़ों से जुड़ा हुआ है। लगभग 1800 के दशक में, फ्रांसीसी आल्प्स जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में लोग ढलानों पर चढ़ते और उतरते थे, जिससे इस खेल का विकास हुआ। बाद में, नॉर्वे की सेना ने इसे एक सैन्य कौशल के रूप में विकसित किया, जिससे आधुनिक स्कीइंग का आरंभ हुआ।
19वीं सदी के अंत में, आल्प्स में स्कीइंग को एक साहसिक गतिविधि के रूप में विकसित किया गया। 20वीं सदी की शुरुआत में, महिलाओं ने भी इसमें भाग लेना शुरू कर दिया। 1924 में, स्विट्जरलैंड में पहली महिला अल्पाइन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
1936 में गार्मिश-पार्टेनकिर्चन शीतकालीन ओलंपिक में, अल्पाइन स्कीइंग को पहली बार कंबाइंड इवेंट के रूप में शामिल किया गया, जिसमें डाउनहिल और स्लैलम शामिल थे। इस प्रतियोगिता में महिलाओं ने भी अपने पुरुष समकक्षों के साथ भाग लिया। 1952 में, हेलसिंकी ओलंपिक में जाइंट स्लैलम और 1988 में कैलगरी ओलंपिक में सुपर-जी को शामिल किया गया।
डाउनहिल इवेंट लंबे ट्रैक पर होता है, जिसे पूरा करने में आमतौर पर डेढ़ मिनट से अधिक समय लगता है। इसे अल्पाइन स्कीइंग में सबसे तेज गति का इवेंट माना जाता है।
सुपर जाइंट स्लैलम (सुपर-जी) इस खेल का दूसरा सबसे तेज इवेंट है, जिसकी शुरुआत 1982 में हुई थी। यह गेट्स के सेट पर आधारित होता है और यदि स्कीयर एक गेट को भी छोड़ देता है, तो उसे अयोग्य घोषित किया जाता है। इस इवेंट में मोड़ डाउनहिल से अधिक चौड़े होते हैं।
जैसे डाउनहिल की रेस एक राउंड में होती है, वैसे ही सुपर जी रेस का भी यही नियम है। सबसे कम समय में रेस पूरी करने वाला स्कीयर विजेता होता है।
स्पेशल स्लैलम सबसे छोटी रेस होती है, जिसमें 50-60 सेकंड का समय लगता है और इसके मोड़ काफी चौड़े होते हैं। स्कीयर को गेट्स के बीच में से होकर नीचे उतरना होता है। इस इवेंट में स्कीयर को विशेष सुरक्षा उपकरण पहनने की आवश्यकता होती है।
जाइंट स्लैलम इवेंट में मोड़ के बीच 20-30 मीटर की दूरी निर्धारित होती है, जिसे पूरा करने में 1 से डेढ़ मिनट का समय लग सकता है। इसे भी दो रन में आयोजित किया जाता है।
अल्पाइन कंबाइंड इवेंट में एक तेज रेस और एक तकनीकी रेस होती है। दोनों रेस के समय को जोड़कर विजेता का निर्धारण किया जाता है।
जेरेमी बुजाकोव्स्की 1964 और 1968 शीतकालीन ओलंपिक में अल्पाइन स्कीइंग में भाग लेने वाले पहले भारतीय थे। उनके बाद किशोर रहतना राय (1988), शैलजा कुमार (1988), हिमांशु ठाकुर (2014) और आरिफ खान (2022) ने भी इस खेल में देश का प्रतिनिधित्व किया।
हालांकि भारत अभी तक इस खेल में ओलंपिक पदक प्राप्त नहीं कर सका है, लेकिन धैर्य, निवेश और तकनीकी तैयारी के साथ ओलंपिक पदक को 'संभव' बनाया जा सकता है।