BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026: एंडर्स एंटोनसेन का गोल्ड का सपना, 'पुरुष सिंगल्स में कई दावेदार'
सारांश
मुख्य बातें
विश्व के नंबर 4 बैडमिंटन खिलाड़ी एंडर्स एंटोनसेन ने 16 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप के अपने अभियान की शुरुआत से पहले स्पष्ट किया कि उनका एकमात्र लक्ष्य गोल्ड मेडल है — वह पदक जो अभी तक उनके संग्रह में नहीं है। थाईलैंड ओपन खिताब से मिले आत्मविश्वास के दम पर डेनमार्क के इस 28 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा कि इस बार पुरुष एकल वर्ग में कोई एक स्पष्ट पसंदीदा नहीं है, और यही बात इस टूर्नामेंट को असाधारण रूप से रोमांचक बनाती है।
मेडल संग्रह और गोल्ड की तलाश
एंटोनसेन BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप में पहले ही तीन ब्रॉन्ज मेडल और एक सिल्वर मेडल अपने नाम कर चुके हैं, लेकिन स्वर्ण पदक अभी भी उनसे दूर है। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'हाँ, आप सही हैं। मैंने तीन बार ब्रॉन्ज और एक बार सिल्वर जीता है। कलेक्शन में जो चीज़ मुझसे छूट गई है, वह गोल्ड है। अगर मैं उसे जीत पाता तो यह कमाल का और सपना सच होने जैसा होता।' उन्होंने माना कि यह उपलब्धि उनके करियर की सबसे बड़ी कामयाबी होगी।
थाईलैंड ओपन से मिला हौसला
एंटोनसेन के लिए थाईलैंड ओपन का खिताब इस सत्र का सबसे खास पल रहा। उन्होंने कहा, 'थाईलैंड ओपन पक्का मेरे इस साल का अब तक का सबसे खास पल रहा है और मुझे यह टाइटल जीतकर बहुत-बहुत गर्व महसूस हुआ — एक ऐसा टाइटल जो मैंने पहले कभी नहीं जीता था।' उन्होंने स्वीकार किया कि हाल के 4 टूर्नामेंट में कोई अन्य खिताब नहीं आया, लेकिन थाईलैंड की जीत यह संकेत देती है कि उनका स्तर प्रतिस्पर्धी बना हुआ है।
पुरुष एकल: खुला मैदान, कई दावेदार
एंटोनसेन के अनुसार पुरुष एकल वर्ग में अब कोई एक या दो स्पष्ट पसंदीदा नहीं रहे। उन्होंने कहा, 'पहले के ज़माने में शायद एक या दो साफ़ फेवरेट होते थे। अब ऐसा नहीं है। अलग-अलग देशों से बहुत सारे प्रतियोगी हैं।' यह ऐसे समय में आया है जब विक्टर एक्सेलसेन के अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन से हटने के बाद इस वर्ग में शक्ति-संतुलन बदल चुका है। एंटोनसेन ने इस अप्रत्याशितता को 'बहुत उत्साहजनक और मज़ेदार' बताया।
दबाव और आत्म-अपेक्षाएँ
एक्सेलसेन के जाने के बाद डेनमार्क के शीर्ष खिलाड़ी के रूप में बाहरी अपेक्षाओं पर एंटोनसेन ने स्पष्ट कहा, 'नहीं, मुझे कोई अतिरिक्त दबाव महसूस नहीं होता। मुझे जो दबाव महसूस होता है, वह सिर्फ अंदर से आने वाला दबाव है।' उन्होंने जोड़ा कि मीडिया या बाहरी उम्मीदें उनके लिए मायने नहीं रखतीं — वे केवल अपने ऊँचे मानकों को पूरा करना चाहते हैं।
पहले राउंड से ही पूरी तैयारी ज़रूरी
एंटोनसेन ने यह भी रेखांकित किया कि आधुनिक बैडमिंटन में शुरुआती दौर को 'वार्म-अप' मानने की सोच अब काम नहीं आती। उनके अनुसार, 'अगर आप 100 प्रतिशत फिट नहीं हैं, तो आप पहले राउंड में ही बाहर हो जाएंगे।' यह टिप्पणी इस बात की ओर इशारा करती है कि इस बार BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप में प्रत्येक मैच से पहले पूरी मानसिक और शारीरिक तैयारी अनिवार्य है। गोल्ड की दौड़ में एंटोनसेन का यह सफर नई दिल्ली के कोर्ट पर शुरू हो चुका है।