BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026: एंटोनसेन बोले — 'कलेक्शन में सिर्फ गोल्ड की कमी, इस बार का मौका खास'
सारांश
मुख्य बातें
विश्व के नंबर 4 बैडमिंटन खिलाड़ी एंडर्स एंटोनसेन सोमवार, 18 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप के अपने अभियान की शुरुआत करेंगे। डेनमार्क के इस स्टार खिलाड़ी के पास पहले से तीन ब्रॉन्ज और एक सिल्वर मेडल हैं, लेकिन गोल्ड अब भी उनके संग्रह से नदारद है — और इस बार वह उसी कमी को पूरा करने के इरादे से उतरेंगे।
मेडल कलेक्शन और गोल्ड की तलाश
28 वर्षीय एंटोनसेन वर्ल्ड चैंपियनशिप में अब तक तीन ब्रॉन्ज और एक सिल्वर जीत चुके हैं। नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने साफ कहा, 'हां, आप सही हैं। मैंने तीन बार ब्रॉन्ज और एक बार सिल्वर जीता है। कलेक्शन में जो चीज मुझसे छूट गई है वह गोल्ड है। अगर मैं उसे जीत पाता तो यह कमाल का और सपना सच होने जैसा होता।' उन्होंने यह भी माना कि यही सोच उन्हें कभी-कभी आखिरी कदम उठाने से रोकती रही है।
थाईलैंड ओपन से मिला आत्मविश्वास
एंटोनसेन की उम्मीदें हाल ही में जीते थाईलैंड ओपन खिताब से और मजबूत हुई हैं — एक ऐसा टाइटल जो उन्होंने इससे पहले कभी नहीं जीता था। उन्होंने कहा, 'थाईलैंड ओपन पक्का मेरे इस साल का अब तक का सबसे खास पल रहा है और मुझे यह टाइटल जीतकर बहुत-बहुत गर्व महसूस हुआ।' उन्होंने जोड़ा कि भले ही हाल के कुछ टूर्नामेंट में खिताब नहीं मिला, लेकिन सीजन में अब तक केवल चार टूर्नामेंट ही हुए हैं और उनका स्तर सही दिशा में है।
पुरुष सिंगल्स — कोई स्पष्ट पसंदीदा नहीं
एंटोनसेन का मानना है कि पुरुष सिंगल्स का मैदान अब पहले से कहीं अधिक खुला और प्रतिस्पर्धी हो गया है। उन्होंने कहा, 'पहले के जमाने में शायद एक या दो साफ फेवरेट होते थे। अब ऐसा नहीं है। अलग-अलग देशों से बहुत सारे प्रतियोगी हैं।' उनके अनुसार यह अप्रत्याशितता इस कैटेगरी को और रोमांचक बनाती है। गौरतलब है कि विक्टर एक्सेलसेन के अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन से हटने के बाद शीर्ष क्रम में यह खालीपन और स्पष्ट हो गया है।
एक्सेलसेन की गैरमौजूदगी और दबाव का सवाल
जब उनसे पूछा गया कि एक्सेलसेन के जाने के बाद डेनमार्क की उम्मीदों का बोझ बढ़ा है या नहीं, तो एंटोनसेन ने स्पष्ट जवाब दिया, 'नहीं, मुझे कोई अतिरिक्त दबाव महसूस नहीं होता। मुझे जो दबाव महसूस होता है, वह सिर्फ अंदर से आने वाला दबाव है।' उन्होंने कहा कि वह खुद से ऊंचे मानक रखते हैं और बाहरी अपेक्षाएं उन्हें प्रभावित नहीं करतीं।
पहले राउंड से ही 100% देना होगा
एंटोनसेन ने यह भी रेखांकित किया कि आधुनिक बैडमिंटन में शुरुआती दौर को 'वार्म-अप' समझना अब खतरनाक हो गया है। उनके शब्दों में, 'अगर आप 100 प्रतिशत फिट नहीं हैं, तो आप पहले राउंड में ही बाहर हो जाएंगे।' यह ऐसे समय में आया है जब वर्ल्ड चैंपियनशिप के ड्रॉ में कई शीर्ष खिलाड़ी शुरुआती राउंड से ही एक-दूसरे के सामने आ सकते हैं। नई दिल्ली में होने वाली इस चैंपियनशिप में एंटोनसेन का प्रदर्शन तय करेगा कि क्या वह अपने करियर की सबसे बड़ी कमी — वर्ल्ड चैंपियनशिप का गोल्ड — आखिरकार पूरी कर पाते हैं।