13 अगस्त 2026
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वर्ल्ड एथलेटिक्स अंडर-20: आशीष यादव का सिल्वर, भारत ने जीते 3 मेडल — 'चोट के बावजूद देश के लिए पदक लाया'

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वर्ल्ड एथलेटिक्स अंडर-20: आशीष यादव का सिल्वर, भारत ने जीते 3 मेडल — 'चोट के बावजूद देश के लिए पदक लाया'

सारांश

चोट और पारिवारिक आशंकाओं को पीछे छोड़ते हुए आशीष यादव ने वर्ल्ड अंडर-20 जैवलिन थ्रो में सिल्वर जीता — और भारत ने 3 पदकों के साथ अपना अभियान समेटा। मधेपुरा के नहर किनारे से ग्लोबल पोडियम तक पहुँचे शहनवाज खान की कहानी भी उतनी ही प्रेरक है।

मुख्य बातें

आशीष यादव ने पुरुषों की जैवलिन थ्रो में सिल्वर मेडल जीता; उनका पर्सनल बेस्ट 74.49 मीटर है।
बसंत कुमार मेघवाल ने पुरुषों की हाई जंप में दूसरा सिल्वर दिलाया।
शहनवाज खान ने पुरुषों की लॉन्ग जंप में ब्रॉन्ज मेडल जीता; उनकी शुरुआत मधेपुरा गाँव से हुई थी।
भारत ने कुल 3 पदक (2 सिल्वर, 1 ब्रॉन्ज) जीते — 2021 और 2022 के पदक-योग के बराबर।
आशीष यादव के वर्तमान कोच अरविंद कुमार हैं; उनसे पहले आशीष सिंह राठौर और रुस्तम खान ने प्रशिक्षण दिया।

वर्ल्ड एथलेटिक्स अंडर-20 चैंपियनशिप में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 3 पदक2 सिल्वर और 1 ब्रॉन्ज — अपने नाम किए। 12 अगस्त 2026 को समाप्त हुए इस अभियान में भारतीय एथलीटों ने जैवलिन थ्रो, हाई जंप और लॉन्ग जंप तीनों स्पर्धाओं में पोडियम पर जगह बनाई। जैवलिन थ्रो में सिल्वर जीतने वाले आशीष यादव ने कहा कि चोट के बावजूद देश के लिए पदक लाना उनके लिए गर्व का क्षण है।

आशीष यादव का सिल्वर और चोट का संघर्ष

पुरुषों की जैवलिन थ्रो स्पर्धा में आशीष यादव ने सिल्वर मेडल जीतकर इस इवेंट में भारत को पहला पदक दिलाया। आशीष ने बताया, 'मुझे बहुत अच्छा लगा। हमने वर्ल्ड चैंपियनशिप में अपने देश के लिए मेडल जीता है। यह बहुत अच्छा अनुभव था। मेरा पर्सनल बेस्ट 74.49 मीटर था, और मैंने उससे थोड़ा कम ही थ्रो किया। मुझे थोड़ी चोट भी लगी थी, जिसकी वजह से मैं अपना बेस्ट प्रदर्शन नहीं दे पाया। आगे मैं और बेहतर करूंगा।'

आशीष ने यह भी बताया कि शुरुआत में उनके परिवार ने उन्हें जैवलिन थ्रो से दूर रहने की सलाह दी थी, क्योंकि इसमें चोट का जोखिम अधिक होता है। परिवार चाहता था कि वे अपने चाचा धर्मराज यादव — जो एक डिस्कस थ्रोअर हैं — की राह पर चलते हुए डिस्कस थ्रो अपनाएँ। लेकिन आशीष ने जैवलिन में ही अपना करियर बनाने का फैसला किया और आगे बढ़ते रहे।

कोचों की भूमिका और प्रशिक्षण का सफर

आशीष यादव के पहले कोच आशीष सिंह राठौर थे, जिन्होंने उन्हें खेल की बुनियादी बारीकियाँ सिखाईं। इसके बाद रुस्तम खान की कोचिंग में उनके खेल में और निखार आया। आशीष के अनुसार, वर्तमान कोच अरविंद कुमार की देखरेख में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन सामने आया है। यह तीन कोचों की निरंतरता भारतीय जूनियर एथलेटिक्स में व्यवस्थित प्रशिक्षण ढाँचे की झलक देती है।

शहनवाज खान का ब्रॉन्ज और गाँव से ग्लोबल मंच तक का सफर

पुरुषों की लॉन्ग जंप में शहनवाज खान ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत के खाते में तीसरा पदक जोड़ा। शहनवाज ने बताया कि उनके करियर की शुरुआत मधेपुरा गाँव से हुई, जहाँ उन्होंने नहर के किनारे ट्रेनिंग ली थी। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता के दौरान थोड़ा दबाव रहता है, लेकिन देश के लिए पदक जीतना उन्हें बेहद खुशी देता है। यह सफर ग्रामीण भारत की एथलेटिक प्रतिभा की ताकत को रेखांकित करता है।

भारत का समग्र प्रदर्शन और ऐतिहासिक संदर्भ

इस चैंपियनशिप में बसंत कुमार मेघवाल ने पुरुषों की हाई जंप में दूसरा सिल्वर दिलाया। कुल 3 पदक का यह आँकड़ा 2021 और 2022 में जीते गए कुल पदकों के बराबर है, जो दर्शाता है कि भारतीय जूनियर एथलेटिक्स एक स्थिर स्तर पर टिकी हुई है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय खेल संस्थाएँ जूनियर स्तर पर अधिक निवेश की बात कर रही हैं। आने वाले सीजन में इन एथलीटों का सीनियर सर्किट में प्रदर्शन यह तय करेगा कि जूनियर सफलता को दीर्घकालिक उत्कृष्टता में बदला जा सकता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठाता है कि जूनियर स्तर की यह प्रतिभा सीनियर सर्किट में क्यों नहीं उतनी ही नियमितता से चमकती। आशीष यादव चोटिल होने के बावजूद पोडियम पर पहुँचे — यह उनकी मानसिक दृढ़ता की मिसाल है, लेकिन यह भारतीय एथलेटिक्स की चिरपरिचित समस्या भी उजागर करता है कि बड़े आयोजनों में खिलाड़ी अक्सर अधूरी फिटनेस के साथ उतरते हैं। शहनवाज खान का नहर किनारे से वर्ल्ड चैंपियनशिप तक का सफर प्रेरणादायक है, पर यह भी याद दिलाता है कि ग्रामीण प्रतिभाओं को संस्थागत समर्थन मिले तो परिणाम और बेहतर हो सकते हैं।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वर्ल्ड एथलेटिक्स अंडर-20 चैंपियनशिप में भारत ने कितने पदक जीते?
भारत ने इस चैंपियनशिप में कुल 3 पदक जीते — 2 सिल्वर और 1 ब्रॉन्ज। यह 2021 और 2022 में जीते गए कुल पदकों के बराबर है।
आशीष यादव ने जैवलिन थ्रो में कितनी दूरी का थ्रो किया?
आशीष यादव का पर्सनल बेस्ट 74.49 मीटर है, लेकिन चोट के कारण वे इस चैंपियनशिप में उससे कम दूरी का थ्रो कर सके। इसके बावजूद उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया।
शहनवाज खान ने किस स्पर्धा में पदक जीता और उनकी पृष्ठभूमि क्या है?
शहनवाज खान ने पुरुषों की लॉन्ग जंप में ब्रॉन्ज मेडल जीता। उनके करियर की शुरुआत मधेपुरा गाँव से हुई, जहाँ उन्होंने नहर के किनारे ट्रेनिंग ली थी।
आशीष यादव के कोच कौन हैं?
आशीष यादव के पहले कोच आशीष सिंह राठौर थे, इसके बाद रुस्तम खान ने उन्हें प्रशिक्षित किया। वर्तमान में वे अरविंद कुमार की कोचिंग में हैं, जिनकी देखरेख में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन आया है।
बसंत कुमार मेघवाल ने किस स्पर्धा में सिल्वर जीता?
बसंत कुमार मेघवाल ने पुरुषों की हाई जंप स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर भारत को इस चैंपियनशिप में दूसरा पदक दिलाया।
राष्ट्र प्रेस
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