वर्ल्ड एथलेटिक्स अंडर-20: आशीष यादव का सिल्वर, भारत ने जीते 3 मेडल — 'चोट के बावजूद देश के लिए पदक लाया'
सारांश
मुख्य बातें
वर्ल्ड एथलेटिक्स अंडर-20 चैंपियनशिप में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 3 पदक — 2 सिल्वर और 1 ब्रॉन्ज — अपने नाम किए। 12 अगस्त 2026 को समाप्त हुए इस अभियान में भारतीय एथलीटों ने जैवलिन थ्रो, हाई जंप और लॉन्ग जंप तीनों स्पर्धाओं में पोडियम पर जगह बनाई। जैवलिन थ्रो में सिल्वर जीतने वाले आशीष यादव ने कहा कि चोट के बावजूद देश के लिए पदक लाना उनके लिए गर्व का क्षण है।
आशीष यादव का सिल्वर और चोट का संघर्ष
पुरुषों की जैवलिन थ्रो स्पर्धा में आशीष यादव ने सिल्वर मेडल जीतकर इस इवेंट में भारत को पहला पदक दिलाया। आशीष ने बताया, 'मुझे बहुत अच्छा लगा। हमने वर्ल्ड चैंपियनशिप में अपने देश के लिए मेडल जीता है। यह बहुत अच्छा अनुभव था। मेरा पर्सनल बेस्ट 74.49 मीटर था, और मैंने उससे थोड़ा कम ही थ्रो किया। मुझे थोड़ी चोट भी लगी थी, जिसकी वजह से मैं अपना बेस्ट प्रदर्शन नहीं दे पाया। आगे मैं और बेहतर करूंगा।'
आशीष ने यह भी बताया कि शुरुआत में उनके परिवार ने उन्हें जैवलिन थ्रो से दूर रहने की सलाह दी थी, क्योंकि इसमें चोट का जोखिम अधिक होता है। परिवार चाहता था कि वे अपने चाचा धर्मराज यादव — जो एक डिस्कस थ्रोअर हैं — की राह पर चलते हुए डिस्कस थ्रो अपनाएँ। लेकिन आशीष ने जैवलिन में ही अपना करियर बनाने का फैसला किया और आगे बढ़ते रहे।
कोचों की भूमिका और प्रशिक्षण का सफर
आशीष यादव के पहले कोच आशीष सिंह राठौर थे, जिन्होंने उन्हें खेल की बुनियादी बारीकियाँ सिखाईं। इसके बाद रुस्तम खान की कोचिंग में उनके खेल में और निखार आया। आशीष के अनुसार, वर्तमान कोच अरविंद कुमार की देखरेख में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन सामने आया है। यह तीन कोचों की निरंतरता भारतीय जूनियर एथलेटिक्स में व्यवस्थित प्रशिक्षण ढाँचे की झलक देती है।
शहनवाज खान का ब्रॉन्ज और गाँव से ग्लोबल मंच तक का सफर
पुरुषों की लॉन्ग जंप में शहनवाज खान ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत के खाते में तीसरा पदक जोड़ा। शहनवाज ने बताया कि उनके करियर की शुरुआत मधेपुरा गाँव से हुई, जहाँ उन्होंने नहर के किनारे ट्रेनिंग ली थी। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता के दौरान थोड़ा दबाव रहता है, लेकिन देश के लिए पदक जीतना उन्हें बेहद खुशी देता है। यह सफर ग्रामीण भारत की एथलेटिक प्रतिभा की ताकत को रेखांकित करता है।
भारत का समग्र प्रदर्शन और ऐतिहासिक संदर्भ
इस चैंपियनशिप में बसंत कुमार मेघवाल ने पुरुषों की हाई जंप में दूसरा सिल्वर दिलाया। कुल 3 पदक का यह आँकड़ा 2021 और 2022 में जीते गए कुल पदकों के बराबर है, जो दर्शाता है कि भारतीय जूनियर एथलेटिक्स एक स्थिर स्तर पर टिकी हुई है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय खेल संस्थाएँ जूनियर स्तर पर अधिक निवेश की बात कर रही हैं। आने वाले सीजन में इन एथलीटों का सीनियर सर्किट में प्रदर्शन यह तय करेगा कि जूनियर सफलता को दीर्घकालिक उत्कृष्टता में बदला जा सकता है या नहीं।