एशियन गेम्स 2026: यशस्विनी घोरपड़े तीसरे राउंड में मिवा हरिमोटो से हारकर महिला एकल से बाहर
सारांश
मुख्य बातें
भारत की टेबल टेनिस खिलाड़ी यशस्विनी घोरपड़े का एशियन गेम्स 2026 में महिला एकल अभियान शनिवार, 26 सितंबर को टोयोटा में तीसरे राउंड में समाप्त हो गया। विश्व रैंकिंग में तीसरे स्थान पर काबिज जापान की दिग्गज खिलाड़ी मिवा हरिमोटो ने घोरपड़े को 9-11, 5-11, 11-4, 4-11, 5-11 के स्कोर से पाँच गेमों में मात दी।
मुकाबले का क्रमवार घटनाक्रम
हरिमोटो ने मैच की शुरुआत से ही अपना दबदबा कायम कर लिया और पहला गेम जीत लिया। दूसरे गेम में उन्होंने और आसानी से बढ़त बनाई। तीसरे गेम में घोरपड़े ने शानदार वापसी करते हुए 11-4 से गेम अपने नाम किया और मुकाबले में जान डाल दी।
हालाँकि, जापानी खिलाड़ी ने चौथे गेम में अपनी लय और आत्मविश्वास वापस पा लिया। 11-4 के विजयी तीसरे गेम के बावजूद घोरपड़े चौथे और पाँचवें गेम में वापसी नहीं कर पाईं और अंततः हरिमोटो ने पाँचवाँ गेम जीतकर अगले दौर में प्रवेश किया।
घोरपड़े का एशियन गेम्स सफर
इससे पहले घोरपड़े ने सीरिया की हेंड जाजा को 4-1 से हराकर तीसरे राउंड में जगह पक्की की थी। महिला एकल से बाहर होने के साथ उनका व्यक्तिगत अभियान समाप्त हो गया। गौरतलब है कि उन्होंने एशियन गेम्स में महिला डबल्स और मिक्स्ड डबल्स प्रतियोगिता में भी हिस्सा लिया था।
घोरपड़े और दिया चिताले की जोड़ी शुक्रवार को महिला डबल्स क्वार्टर-फाइनल तक पहुँची, लेकिन चीन की फैन शुहान और चेन यी से 0-3 से हारकर बाहर हो गईं। वहीं श्रीजा अकुला और सिंड्रेला दास की जोड़ी भी तीसरे राउंड में चीन की कुआई मान और वांग मन्यु से 0-3 से हारकर डबल्स से बाहर हो गई।
भारत को मिक्स्ड डबल्स में ब्रॉन्ज मेडल
हालाँकि भारतीय टेबल टेनिस टीम ने नागोया में एक पदक अवश्य सुनिश्चित किया। मानुष शाह और दिया चिताले की जोड़ी ने मिक्स्ड डबल्स सेमीफाइनल में जगह बनाई और ब्रॉन्ज मेडल जीता। सेमीफाइनल में उन्हें मौजूदा चैंपियन चीन के वांग चुकिन और सुन यिंगशा से 0-4 से हार झेलनी पड़ी।
यह जोड़ी क्वार्टर-फाइनल में बड़ा उलटफेर करते हुए हाँगकाँग की विश्व रैंकिंग में चौथे स्थान की जोड़ी वोंग चुन टिंग और डू होई केम को 3-1 से हरा चुकी थी।
आगे क्या होगा
एशियन गेम्स 2026 के टेबल टेनिस मुकाबले टोयोटा और नागोया में जारी हैं। भारत के लिए मिक्स्ड डबल्स का ब्रॉन्ज मेडल इस संस्करण की बड़ी उपलब्धि है, जबकि एकल और महिला डबल्स में पदक का सपना अधूरा रह गया। आने वाले मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ी टीम स्पर्धाओं में अपनी छाप छोड़ने की कोशिश करेंगे।