एशियन टेबल टेनिस चैंपियनशिप: हरमीत-यशस्वीनी ने सेमीफाइनल में जगह बनाई, 72 साल बाद मिक्स्ड डबल्स में मेडल पक्का
सारांश
मुख्य बातें
हरमीत देसाई और यशस्वीनी घोरपड़े की भारतीय जोड़ी ने 23 अक्टूबर 2026 को ताशकंद में जारी एशियन टेबल टेनिस चैंपियनशिप के मिक्स्ड डबल्स इवेंट में सेमीफाइनल में प्रवेश कर 72 साल के सूखे को समाप्त करते हुए भारत के लिए पदक सुनिश्चित कर दिया। इससे पहले भारत ने इस स्पर्धा में आखिरी बार 1954 में मिक्स्ड डबल्स में पदक जीता था।
क्वार्टरफाइनल में जीत का सफर
हरमीत और यशस्वीनी ने क्वार्टरफाइनल में दक्षिण कोरिया के पार्क गैंगह्योन और ली डेउन को रोमांचक मुकाबले में 3-2 से पराजित कर सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की की। यह जीत भारतीय टेबल टेनिस के लिए एक ऐतिहासिक पल के रूप में दर्ज हो गई है, क्योंकि कम से कम ब्रॉन्ज मेडल अब तय हो चुका है।
सेमीफाइनल में कड़ी चुनौती
अब सेमीफाइनल में इस जोड़ी का सामना जापान के सोरा मात्सुशिमा और मिवा हारिमोटो से होगा। जो भी जोड़ी यह मुकाबला जीतेगी, वह फाइनल में प्रवेश करेगी और गोल्ड मेडल के लिए दावेदारी पेश करेगी। मात्सुशिमा और हारिमोटो जापान के टॉप-रैंक खिलाड़ी हैं, इसलिए यह मुकाबला बेहद कड़ा रहने की उम्मीद है।
दूसरी भारतीय जोड़ी बाहर
एक अन्य भारतीय मिक्स्ड जोड़ी पायस जैन और सिंड्रेला दास सेमीफाइनल में जगह बनाने से चूक गई। क्वार्टरफाइनल में उन्हें चीन के यी चेन और हुआंग युझेंग ने 3-0 से हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया।
हरमीत और यशस्वीनी का हालिया प्रदर्शन
गौरतलब है कि हरमीत हाल ही में सम्पन्न एशियन गेम्स का भी हिस्सा रहे थे, जहाँ उन्होंने मेंस टीम, मिक्स्ड डबल्स और मेंस डबल्स — तीनों इवेंट में हिस्सा लिया, लेकिन किसी में भी पदक हासिल नहीं कर सके। मेंस टीम इवेंट में भारत राउंड ऑफ 16 तक पहुँचा, लेकिन दक्षिण कोरिया से हार गया। मिक्स्ड डबल्स में यशस्वीनी के साथ वे क्वार्टरफाइनल तक पहुँचे, जहाँ चीन के लिन शिदोंग और कुआई मैन ने उन्हें बाहर किया। मेंस डबल्स में सत्यन ज्ञानसेकरन के साथ खेलते हुए वे तीसरे राउंड में जापान के सोरा मात्सुशिमा और शुनसुके तोगामी से हार गए।
यशस्वीनी भी एशियन गेम्स से खाली हाथ लौटी थीं — विमेंस सिंगल्स के तीसरे राउंड में जापान की मिवा हारिमोटो ने उन्हें हराया था, और विमेंस डबल्स में दिया चितले के साथ क्वार्टरफाइनल में चीन की फैन शुहान और चेन यी ने 3-0 से बाहर कर दिया था। इस पृष्ठभूमि में ताशकंद की यह उपलब्धि दोनों खिलाड़ियों के लिए व्यक्तिगत रूप से भी बेहद अहम है।
आगे क्या होगा
सेमीफाइनल में जीत मिली तो हरमीत और यशस्वीनी गोल्ड मेडल के दावेदार होंगे — जो भारतीय टेबल टेनिस के इतिहास में एशियन चैंपियनशिप स्तर पर एक अभूतपूर्व उपलब्धि होगी। हार की स्थिति में भी ब्रॉन्ज मेडल तय है, जो स्वयं में 72 वर्षों की प्रतीक्षा का अंत है।