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भारत-ईयू एफटीए से जर्मनी को निर्यात 2030 तक $50 अरब पार करेगा: एसोचैम रिपोर्ट

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भारत-ईयू एफटीए से जर्मनी को निर्यात 2030 तक $50 अरब पार करेगा: एसोचैम रिपोर्ट

सारांश

भारत-ईयू एफटीए महज़ एक व्यापार समझौता नहीं — यह भारत के निर्यात नक्शे को फिर से खींचने का मौका है। एसोचैम का अनुमान है कि जर्मनी को निर्यात 2030 तक 60 अरब डॉलर तक पहुँच सकता है, बशर्ते शून्य-शुल्क पहुँच और द्विपक्षीय सहयोग की वार्ता समय पर परिणाम दे।

मुख्य बातें

एसोचैम की रिपोर्ट के अनुसार भारत का जर्मनी को निर्यात 2030 तक 50 अरब डॉलर की सीमा पार कर सकता है।
मुख्य अर्थशास्त्री एस.पी.
शर्मा ने अधिकतम अनुमान 60 अरब डॉलर (लगभग 54 अरब यूरो ) तक रखा।
रिपोर्ट बर्लिन में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अपनी जर्मनी यात्रा के दौरान जारी की।
लाभान्वित होने वाले प्रमुख क्षेत्र: टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, रत्न-आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग सामान ।
नए सहयोग के संभावित क्षेत्र: सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और क्रिटिकल मिनरल्स ।
एमएसएमई क्षेत्र के लिए विशेष अवसरों की संभावना रेखांकित।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की जर्मनी यात्रा के दौरान बर्लिन में जारी उद्योग संगठन एसोचैम की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के प्रभावी क्रियान्वयन से जर्मनी को भारतीय वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात 2030 तक 50 अरब डॉलर की सीमा पार कर सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गहरे आर्थिक सहयोग और ईयू की शून्य-शुल्क पहुँच इस लक्ष्य को हासिल करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

एसोचैम की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत-ईयू एफटीए के तहत यूरोपीय संघ द्वारा भारतीय निर्यात के एक बड़े हिस्से को शून्य शुल्क (जीरो ड्यूटी) पहुँच दिए जाने की संभावना है। इससे टेक्सटाइल, परिधान, चमड़ा एवं फुटवियर, रत्न एवं आभूषण, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई है।

एसोचैम के मुख्य अर्थशास्त्री एस.पी. शर्मा ने अनुमान व्यक्त किया कि एफटीए का व्यापक उपयोग होने पर भारत का जर्मनी को निर्यात 2030 तक 60 अरब डॉलर (लगभग 54 अरब यूरो) तक भी पहुँच सकता है, जो 50 अरब डॉलर के आधार लक्ष्य से भी अधिक होगा।

उद्योग जगत की प्रतिक्रिया

एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा कि भारत और जर्मनी अपनी-अपनी विनिर्माण क्षमता, तकनीकी विशेषज्ञता और नवाचार की ताकत का लाभ उठाकर आर्थिक सहयोग को और गहरा कर सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से एमएसएमई क्षेत्र के लिए नए अवसरों की संभावना रेखांकित की और कहा कि उद्योगों के बीच बढ़ती भागीदारी दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाएगी।

एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने कहा कि जर्मनी की ग्रीन एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट पार्टनरशिप और नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तथा बैटरी स्टोरेज जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग निवेश, तकनीकी हस्तांतरण और टिकाऊ औद्योगिक विकास को नई गति दे सकता है। उन्होंने बिजनेस-टू-बिजनेस संपर्क और खरीदार-विक्रेता बैठकों को इस साझेदारी को व्यावसायिक परिणामों में बदलने का कारगर ज़रिया बताया।

नए सहयोग के क्षेत्र

रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि जर्मनी का मजबूत औद्योगिक आधार और भारत का तेज़ी से बढ़ता विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्र एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, डिजिटल प्रौद्योगिकी, क्रिटिकल मिनरल्स और रक्षा क्षेत्र में नए सहयोग के दरवाज़े खोलते हैं। गौरतलब है कि यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब भारत-ईयू एफटीए वार्ता कई वर्षों के अंतराल के बाद पुनः सक्रिय हुई है और दोनों पक्ष 2025-26 तक समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश में हैं।

आगे की राह

एसोचैम ने संकल्प व्यक्त किया कि वह भारतीय उद्योगों को जर्मनी में उपलब्ध अवसरों से जोड़ने और भारत-जर्मनी रणनीतिक आर्थिक साझेदारी को सुदृढ़ करने के लिए उद्योग सहयोग और ज्ञान-साझाकरण को बढ़ावा देता रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग में बढ़ोतरी दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को दीर्घकालिक मज़बूती देगी। आने वाले महीनों में एफटीए वार्ता की प्रगति यह तय करेगी कि ये अनुमान कितनी तेज़ी से ज़मीन पर उतरते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनकी असली परीक्षा वार्ता-मेज़ पर होगी — न कि रिपोर्ट के पन्नों पर। भारत-ईयू एफटीए की बातचीत 2007 में शुरू होकर 2013 में ठप हो गई थी और 2022 में फिर शुरू हुई; बौद्धिक संपदा अधिकार, डेटा संरक्षण और सरकारी खरीद जैसे मुद्दों पर गाँठें अभी भी बाकी हैं। दूसरी बात यह है कि जर्मनी खुद मंदी के दौर से गुज़र रहा है और उसकी औद्योगिक माँग सिकुड़ी है — ऐसे में निर्यात वृद्धि के लिए सिर्फ शुल्क-कटौती पर्याप्त नहीं, भारतीय आपूर्तिकर्ताओं की गुणवत्ता अनुपालन और लॉजिस्टिक्स क्षमता भी समान रूप से अहम होगी। बिना ठोस क्रियान्वयन रोडमैप के, यह रिपोर्ट व्यापारिक उत्साह का दस्तावेज़ तो है — नीतिगत प्रतिबद्धता का नहीं।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-ईयू एफटीए से जर्मनी को निर्यात कितना बढ़ सकता है?
एसोचैम की रिपोर्ट के अनुसार भारत का जर्मनी को वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात 2030 तक 50 अरब डॉलर की सीमा पार कर सकता है। संगठन के मुख्य अर्थशास्त्री एस.पी. शर्मा ने अनुकूल परिस्थितियों में यह आँकड़ा 60 अरब डॉलर (लगभग 54 अरब यूरो) तक पहुँचने का अनुमान भी लगाया है।
भारत-ईयू एफटीए में किन क्षेत्रों को सबसे अधिक फायदा मिलेगा?
रिपोर्ट के अनुसार टेक्सटाइल, परिधान, चमड़ा एवं फुटवियर, रत्न एवं आभूषण, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों को शून्य शुल्क पहुँच से विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे उभरते क्षेत्रों में भी नए सहयोग की संभावना बताई गई है।
यह रिपोर्ट किसने और कहाँ जारी की?
यह रिपोर्ट उद्योग संगठन एसोचैम ने तैयार की और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अपनी जर्मनी यात्रा के दौरान बर्लिन में जारी की। रिपोर्ट का उद्देश्य भारत-जर्मनी रणनीतिक आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देना है।
एमएसएमई क्षेत्र के लिए भारत-जर्मनी साझेदारी में क्या अवसर हैं?
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा के अनुसार उद्योगों के बीच बढ़ती भागीदारी विशेष रूप से एमएसएमई क्षेत्र के लिए नए कारोबारी अवसर पैदा करेगी। बिजनेस-टू-बिजनेस संपर्क और खरीदार-विक्रेता बैठकों को इस साझेदारी को व्यावसायिक परिणामों में बदलने का प्रमुख माध्यम बताया गया है।
भारत-ईयू एफटीए वार्ता की वर्तमान स्थिति क्या है?
भारत-ईयू एफटीए वार्ता 2007 में शुरू होकर 2013 में रुक गई थी और 2022 में पुनः सक्रिय हुई। दोनों पक्ष समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देने की कोशिश में हैं, हालाँकि बौद्धिक संपदा, डेटा संरक्षण और सरकारी खरीद जैसे कुछ संवेदनशील मुद्दों पर वार्ता अभी जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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