एशियन गेम्स तीरंदाजी: भारत को पुरुष रिकर्व टीम इवेंट में सिल्वर, फाइनल में कोरिया ने 5-1 से हराया
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाजी टीम ने 2 अक्टूबर 2026 को ओकाजाकी के चुओ सोगो पार्क मल्टीपर्पस स्क्वायर में एशियन गेम्स फाइनल में सिल्वर मेडल जीता। नौ बार की चैंपियन दक्षिण कोरिया ने भारतीय तिकड़ी को 5-1 से पराजित किया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
मुख्य घटनाक्रम
भारतीय टीम में नीरज चौहान, यशदीप भोगे और ओलंपियन धीरज बोम्मादेवरा शामिल थे। उनके सामने दक्षिण कोरिया की किम जे देओक, किम वूजिन और ली वूसोक की तिकड़ी थी। पहले सेट में दोनों टीमों ने 56-56 की बराबरी की — दोनों ने तीन-तीन बार 10 पॉइंट हासिल किए। भारत के पास पहला सेट जीतने का सुनहरा अवसर था, जब उन्हें अंतिम तीन तीरों से 28 पॉइंट चाहिए थे, लेकिन टीम ने 10, 8 और 9 का स्कोर कर केवल 27 पॉइंट बनाए और बराबरी पर रहे।
दूसरे सेट में कोरियाई खिलाड़ियों ने चार तीर 10 पर लगाए, जबकि भारत की ओर से एक भी तीर 10 पर नहीं लगा। धीरज लक्ष्य से चूके और आठ के दो शॉट लगाए, जिससे कोरिया ने यह सेट 57-50 से जीता। तीसरे सेट में भारत ने पहले तीन तीरों से 28 पॉइंट लिए — नीरज ने 10 और यशदीप व धीरज ने 9-9 पॉइंट बनाए। किंतु चौथे तीर पर नीरज केवल 7 पॉइंट ही बना सके, जो अंततः निर्णायक साबित हुआ। कोरिया ने अंतिम सेट 56-54 और मैच 5-1 से जीत लिया।
लगातार दूसरा सिल्वर
गौरतलब है कि यह एशियन गेम्स में भारत का लगातार दूसरा सिल्वर मेडल है इस इवेंट में। हांगझोऊ 2023 में भी भारतीय पुरुष रिकर्व टीम फाइनल में दक्षिण कोरिया से हार गई थी। ओलंपियन धीरज बोम्मादेवरा उस टीम का भी अभिन्न हिस्सा थे। यह एक उभरता हुआ पैटर्न है — भारत लगातार रजत तक पहुँच रहा है, लेकिन कोरिया की दीवार पार करना अभी भी शेष है।
कोरिया की अजेय बादशाहत
दक्षिण कोरिया इस इवेंट में नौ बार का चैंपियन है और उसका वर्चस्व निर्विवाद रहा है। तीसरे सेट में कोरियाई तीरंदाजों ने 9 से कम का कोई भी शॉट नहीं लगाया, जो उनकी तकनीकी श्रेष्ठता को रेखांकित करता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय तीरंदाजी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति मज़बूत की है, फिर भी कोरिया के विरुद्ध सेट जीतना टीम के लिए चुनौती बना हुआ है।
आगे का रास्ता
भारतीय तीरंदाजी में प्रतिभा का अभाव नहीं है — बोम्मादेवरा का ओलंपिक अनुभव और नीरज चौहान व यशदीप भोगे की युवा ऊर्जा इस टीम को भविष्य में और मज़बूत बनाती है। अगले ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप में कोरिया को चुनौती देने के लिए भारत को अपनी तकनीकी खामियाँ — खासकर निर्णायक क्षणों में सटीकता — दूर करनी होगी।