एशियन गेम्स 2026: सुमित नागल क्वार्टर फाइनल में हारे, 1986 के बाद पहली बार भारत बिना टेनिस पदक के लौटा
सारांश
मुख्य बातें
नागोया के हिगाशियामा पार्क टेनिस सेंटर में 1 अक्टूबर 2026 को भारत के शीर्ष टेनिस खिलाड़ी सुमित नागल पुरुष एकल क्वार्टर फाइनल में चीन के वू यिबिंग से 4-6, 4-6 से सीधे सेटों में हार गए। इस हार के साथ ही एशियन गेम्स में भारत का संपूर्ण टेनिस अभियान समाप्त हो गया — और सबसे बड़ी पीड़ा यह है कि 1986 के बाद यह पहली बार है जब भारतीय टेनिस दल एशियाई खेलों से खाली हाथ लौट रहा है।
नागल का प्रदर्शन: कहाँ चूके
नागल की सर्विस पूरे मैच में दबाव में रही। उन्होंने अपनी पहली सर्विस पर केवल 62 प्रतिशत और दूसरी सर्विस पर 59 प्रतिशत अंक जीते। मैच के दौरान उनकी सर्विस तीन बार ब्रेक हुई, जो उनकी हार का सबसे बड़ा कारण बनी। चीनी खिलाड़ी वू यिबिंग ने लगातार दबाव बनाए रखा और भारतीय खिलाड़ी को कोई मौका नहीं दिया।
अन्य भारतीय खिलाड़ियों का निराशाजनक प्रदर्शन
नागल से पहले ही, सुरेश दक्षिणेश्वर पुरुष एकल के राउंड ऑफ 16 में चीनी ताइपे के त्सेंग चुन-हसिन से 6-3, 6-4 से हारकर बाहर हो चुके थे।
पुरुष डबल्स में भी भारत को दोहरी निराशा मिली। युकी भांबरी और दक्षिणेश्वर सुरेश की जोड़ी क्वार्टर फाइनल में चीनी ताइपे के रे हो और सू यू-ह्सियू से हार गई। वहीं एन श्रीराम बालाजी और अनिरुद्ध चंद्रशेखर की जोड़ी एक रोमांचक टाई-ब्रेक मुकाबले में चीन के जियांग फुमिन और झांग तियानहुई से पराजित हुई। गौरतलब है कि पुरुष डबल्स में भारत को 1998 के बाद पहली बार कोई पदक नहीं मिला।
महिला डबल्स में अंकिता रैना और रुतुजा भोसले की जोड़ी पहले ही राउंड में कजाकिस्तान की अन्ना डैनिलिना और यूलिया पुतिनत्सेवा से हार गई। मिक्स्ड डबल्स में युकी भांबरी और रुतुजा भोसले राउंड ऑफ 16 में चीनी ताइपे के ह्सिएह सु-वेई और त्सेंग चुन-ह्सिन से बाहर हो गए। इसके अलावा, एन श्रीराम बालाजी और अंकिता रैना की मिक्स्ड जोड़ी राउंड ऑफ 32 में हांगकांग, चीन के यूडिस चोंग और कैरन थॉम्पसन से हारकर स्पर्धा से बाहर हो गई।
पिछली बार से तुलना: 2023 की चमक, 2026 का अंधेरा
यह ऐसे समय में आया है जब भारत ने हांगझोऊ एशियन गेम्स 2023 में टेनिस में दो पदक जीते थे। उस संस्करण में रोहन बोपन्ना और रुतुजा भोसले ने मिक्स्ड डबल्स में स्वर्ण पदक जीता था, जबकि रामकुमार रामनाथन और साकेत मायनेनी ने पुरुष डबल्स में रजत पदक हासिल किया था। तीन साल में यह गिरावट भारतीय टेनिस प्रशासन और खिलाड़ियों की तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
क्या होगा आगे
भारतीय दल अब बिना किसी पदक के स्वदेश लौटेगा, जो 40 वर्षों में पहली बार होगा। इस प्रदर्शन के बाद अखिल भारतीय टेनिस संघ पर युवा प्रतिभाओं के विकास और अनुभवी खिलाड़ियों की तैयारी को लेकर दबाव और बढ़ेगा। एशियाई स्तर पर चीन और चीनी ताइपे के बढ़ते दबदबे के सामने भारत को अपनी रणनीति पर नए सिरे से विचार करना होगा।