ऑस्ट्रेलियाई चौकड़ी ने रचा इतिहास: कमिंस, स्टार्क, हेजलवुड, लियोन ने साथ मिलकर लिए 600 टेस्ट विकेट
सारांश
मुख्य बातें
पैट कमिंस, मिशेल स्टार्क, जोश हेजलवुड और नाथन लियोन की ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी चौकड़ी ने 11 अक्टूबर 2026 को डरबन के किंग्समीड मैदान पर टेस्ट क्रिकेट इतिहास में एक अभूतपूर्व मील का पत्थर पार किया। साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट मैच की पहली पारी के दौरान इन चारों ने मिलकर एक साथ खेले गए 38 टेस्ट मैचों में 600 विकेट का आंकड़ा पार कर लिया — ऐसा करने वाली यह क्रिकेट इतिहास की पहली चौकड़ी बन गई।
ऐतिहासिक उपलब्धि का विवरण
डरबन टेस्ट के दूसरे दिन तक इन चारों गेंदबाजों के नाम साझा रूप से 599 विकेट थे। मैच के दौरान साउथ अफ्रीका की पहली पारी में विकेट लेते ही यह ऐतिहासिक आंकड़ा पूरा हो गया। इन चारों ने मिलकर प्रोटियाज की पहली पारी के शुरुआती आठ विकेट आपस में बाँटे, जो इस उपलब्धि की भव्यता को और उजागर करता है।
इस चौकड़ी में कमिंस सर्वाधिक 160 विकेट के साथ सबसे आगे हैं। स्टार्क ने 74 पारियों में 155 विकेट लेकर दूसरा स्थान हासिल किया है। हेजलवुड 72 पारियों में 152 विकेट के साथ तीसरे और लियोन 70 पारियों में 140 विकेट लेकर चौथे स्थान पर हैं।
पिछले रिकॉर्ड से तुलना
इससे पहले इंग्लैंड की चौकड़ी — जेम्स एंडरसन, स्टुअर्ट ब्रॉड, बेन स्टोक्स और मोईन अली — ने एक साथ खेले गए 34 टेस्ट मैचों में 433 विकेट लिए थे। ऑस्ट्रेलियाई चौकड़ी ने यह आंकड़ा 167 विकेट के बड़े अंतर से पीछे छोड़ दिया है। गौरतलब है कि यह महज एक संख्यात्मक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि एक साथ खेलने की निरंतरता और सामूहिक प्रभाव का प्रमाण भी है।
मैच की स्थिति
डरबन टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 390 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया, जिसमें मैट रेनशॉ ने शानदार शतक जमाया। जवाब में साउथ अफ्रीका की टीम 197/8 पर संघर्ष करती नजर आई, जब हेजलवुड ने मार्को जानसन को आउट कर प्रोटियाज की मुश्किलें और बढ़ा दीं। मैच के तीसरे दिन कमिंस ने तीन विकेट लिए, जबकि हेजलवुड और लियोन ने दो-दो और स्टार्क ने एक विकेट अपने नाम किया।
क्यों है यह उपलब्धि खास
टेस्ट क्रिकेट में किसी एक गेंदबाजी इकाई का लंबे समय तक साथ बने रहना और सामूहिक रूप से इतने विकेट हासिल करना अत्यंत दुर्लभ होता है। यह ऐसे समय में आया है जब ऑस्ट्रेलिया की तेज गेंदबाजी को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ इकाइयों में से एक माना जाता है। 38 टेस्ट मैचों में इस एकजुटता को बनाए रखना अपने आप में एक असाधारण उपलब्धि है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।
आगे देखें तो यह चौकड़ी इस सीरीज में और विकेट जोड़ते हुए अपने रिकॉर्ड को और मजबूत करने की स्थिति में है।