क्या भारतीय पुरुष नेत्रहीन टीम ने लगातार दूसरी बार विश्व कप जीता?
सारांश
Key Takeaways
- 20 जनवरी 2018 को भारतीय नेत्रहीन टीम ने विश्व कप जीता।
- भारतीय टीम ने पाकिस्तान को फाइनल में हराया।
- कप्तान अजय कुमार रेड्डी की रणनीति महत्वपूर्ण थी।
- यह जीत दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
- भारतीय टीम ने अनुशासन और एकता का परिचय दिया।
नई दिल्ली, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। क्रिकेट की दुनिया में भारत की हर श्रेणी की टीम ने अपनी उत्कृष्टता साबित की है। पुरुषों और महिलाओं की क्रिकेट टीमों के साथ-साथ पुरुष नेत्रहीन टीम ने भी कई बार विश्व कप का खिताब जीता है। 20 जनवरी 2018 एक ऐसा ऐतिहासिक दिन था, जब भारतीय नेत्रहीन टीम ने लगातार दूसरी बार विश्व कप का खिताब अपने नाम किया।
यूएई में आयोजित फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने पाकिस्तान को एक बड़ी हार दी।
फाइनल में पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया और 308 रन बनाए।
लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम ने आत्मविश्वास और संयम का अद्भुत प्रदर्शन किया। सलामी बल्लेबाजों ने सुरक्षित शुरुआत की और मध्य ओवरों में रन गति को बनाए रखा। भारतीय बल्लेबाजों ने मैदान के हर क्षेत्र का बेहतरीन उपयोग किया और पाकिस्तान के गेंदबाजों को वापसी का मौका नहीं दिया। अंततः भारत ने 308 रनों का लक्ष्य आठ विकेट से सफलतापूर्वक हासिल किया।
भारतीय टीम की जीत का श्रेय कप्तान अजय कुमार रेड्डी को जाता है, जिन्होंने न केवल टीम का रणनीतिक नेतृत्व किया, बल्कि बल्ले से भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अलावा, टीम के अन्य खिलाड़ियों ने भी जिम्मेदारी से खेलते हुए जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय गेंदबाजों और फील्डरों ने भी पूरे टूर्नामेंट में अनुशासन और एकता का परिचय दिया।
लगातार दूसरी बार नेत्रहीन विश्व कप जीतना भारत के लिए गर्व का क्षण था। इससे पहले, भारत ने 2014 में भी यह खिताब जीता था, और 2018 की जीत ने उसकी बादशाहत को और मजबूत किया। यह उपलब्धि केवल एक खेल जीत नहीं थी, बल्कि उन लाखों दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा थी, जो सीमित संसाधनों और चुनौतियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का हौसला रखते हैं।