क्या भवानी देवी ने ओलंपिक में इतिहास रचा?

Click to start listening
क्या भवानी देवी ने ओलंपिक में इतिहास रचा?

सारांश

भवानी देवी की कहानी संघर्ष, समर्पण और सफलता की है। उनकी यात्रा ने न केवल भारत का नाम रोशन किया बल्कि ओलंपिक में महिलाओं की भागीदारी को भी बढ़ावा दिया। जानिए उनके अद्भुत सफर और उपलब्धियों के बारे में!

Key Takeaways

  • भवानी देवी ने ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
  • उन्होंने पहले गोल्ड और ब्रॉन्ज मेडल जीते।
  • उनकी मां का योगदान उनके करियर में महत्वपूर्ण रहा।
  • भवानी ने इटली में प्रशिक्षण लिया।
  • उनकी कहानी प्रेरणा का स्रोत है।

नई दिल्ली, 26 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। भारत की प्रसिद्ध तलवारबाज भवानी देवी ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली महिला फेंसर हैं। चेन्नई में जन्मी भवानी ने एशियन चैंपियनशिप और कई विश्व प्रतियोगिताओं में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए भारत का नाम रोशन किया है।

27 अगस्त 1993 को चेन्नई में जन्मीं भवानी देवी की सफलता के पीछे उनकी मां रमानी देवी का बड़ा योगदान रहा। जब भवानी ने अपने खेल को जारी रखने के लिए आर्थिक समस्याओं का सामना किया, तो मां ने अपने गहने बेच दिए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने संपत्ति बेचने और बैंक से कर्ज लेने का साहस दिखाया।

भवानी देवी की मदद करने वालों में तमिल फिल्म निर्देशक शशिकुमार शामिल थे, जिन्होंने उन्हें प्रशिक्षण दिलाने में सहायता की। इसके अलावा, तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता ने उनके लिए विदेश में प्रशिक्षण की व्यवस्था की।

करियर का पहला अंतरराष्ट्रीय इवेंट भवानी देवी के लिए निराशाजनक रहा। तुर्की में आयोजित इस इवेंट के दौरान, जिस होटल में भवानी ठहरी थीं, वह इवेंट स्थल से काफी दूर था, जिसके कारण उन्हें देरी हुई और उन्हें ब्लैक कार्ड देकर बाहर भेज दिया गया।

भवानी देवी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना पहला मेडल 2009 में जीता। मलेशिया में उन्होंने जूनियर कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप के टीम इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। अगले वर्ष एशियन जूनियर एंड कैडेट चैंपियनशिप में तीसरा स्थान हासिल किया।

साल 2012 में भवानी देवी ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यक्तिगत पदक जीता। उन्होंने जूनियर कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में देश को ब्रॉन्ज जिताया।

इसके बाद, 2014 में, भवानी देवी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहला गोल्ड जीतने में सफल रहीं। उन्होंने टस्कनी कप में तिरंगा लहराया, जो इटली में आयोजित हुआ था।

इसी साल, भवानी देवी ने अंडर-23 एशियन चैंपियनशिप में सिल्वर और अगले वर्ष उसी चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज जीते। ये दोनों पदक व्यक्तिगत स्पर्धाओं में आए।

भवानी देवी ने साई में लगभग 7 साल प्रशिक्षण लिया। इसके बाद, 2016 में इटली में प्रशिक्षण का निर्णय लिया। यहां उन्होंने निकोला जानोटी के साथ तलवारबाजी की ट्रेनिंग की, जिसने उन्हें इस खेल के तकनीकी पहलुओं को सीखने में मदद की।

2018 भवानी देवी के लिए विशेष वर्ष रहा। महिला विश्व कप में उन्होंने रजत पदक जीता। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में भी गोल्ड अपने नाम किया।

2020 टोक्यो ओलंपिक में, भवानी देवी ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। वह ओलंपिक के तलवारबाजी इवेंट में भाग लेने वाली पहली भारतीय बनीं। 2022 में, उन्होंने लंदन कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतकर एक बार फिर देश का मान बढ़ाया। तलवारबाजी में उनकी उत्कृष्टता को देखते हुए, उन्हें 2021 में अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

Point of View

बल्कि यह भारतीय महिलाओं की शक्ति और संघर्ष का प्रतीक है। एक राष्ट्रीय संपादक के रूप में, हमें गर्व है कि हमारे देश की महिलाएं इस तरह की उपलब्धियों को प्राप्त कर रही हैं। यह न केवल उन्हें बल्कि आगामी पीढ़ियों को भी प्रेरित करेगी।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

भवानी देवी कौन हैं?
भवानी देवी भारत की पहली महिला तलवारबाज हैं, जिन्होंने ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया।
भवानी देवी ने कब पहला अंतरराष्ट्रीय पदक जीता?
भवानी देवी ने 2009 में मलेशिया में जूनियर कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में पहला अंतरराष्ट्रीय पदक जीता।
भवानी देवी को कौन सा पुरस्कार मिला?
भवानी देवी को 2021 में अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।