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ब्राजील के 1970 विश्व कप विजेता डिफेंडर ब्रिटो का 86 वर्ष की आयु में निधन

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ब्राजील के 1970 विश्व कप विजेता डिफेंडर ब्रिटो का 86 वर्ष की आयु में निधन

सारांश

1970 फीफा विश्व कप में मेक्सिको की धरती पर ब्राजील की अजेय रक्षा-पंक्ति का आधार रहे 'हरक्यूलिस' ब्रिटो अब नहीं रहे। 86 वर्ष की आयु में निमोनिया से उनका निधन हुआ — पेले की उस महान टीम का एक और सितारा अस्त हो गया।

मुख्य बातें

ब्रिटो का 86 वर्ष की आयु में निधन; CBF ने निमोनिया को कारण बताया।
वह 1970 फीफा विश्व कप विजेता ब्राजील टीम के सदस्य थे और टूर्नामेंट में हर मैच पूरे समय खेले।
राष्ट्रीय करियर 1964 से 1972 तक — 61 अंतरराष्ट्रीय मैच , 45 जीत , 11 ड्रॉ , केवल 5 हार ।
शारीरिक ताकत के कारण 'हरक्यूलिस' उपनाम; विल्सन पियाजा के साथ ऐतिहासिक रक्षात्मक जोड़ी।
क्लब करियर में वास्को द गामा , फ्लैमेंगो , क्रूजेरो सहित कई बड़े ब्राजीलियाई क्लब शामिल।
CBF अध्यक्ष समीर जौद ने उन्हें ब्राजील फुटबॉल के महानतम डिफेंडरों में से एक बताया।

ब्राजील फुटबॉल के महान डिफेंडर ब्रिटो का 86 वर्ष की आयु में निधन हो गया। ब्राजीलियन फुटबॉल कन्फेडरेशन (CBF) ने पुष्टि की कि वह निमोनिया से पीड़ित थे और अंतिम एक सप्ताह से अस्पताल में भर्ती थे। ब्रिटो उस ऐतिहासिक ब्राजील टीम के अभिन्न अंग थे जिसने 1970 फीफा विश्व कप का खिताब जीता था।

मुख्य घटनाक्रम

ब्रिटो का जन्म 9 अगस्त 1939 को रियो डी जेनेरियो में हुआ था। उन्होंने 1964 में ब्राजील की राष्ट्रीय टीम के लिए पदार्पण किया और 1972 तक देश का प्रतिनिधित्व किया। इस अवधि में उन्होंने कुल 61 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले, जिनमें ब्राजील ने 45 जीत, 11 ड्रॉ और केवल 5 हार दर्ज की।

अपने क्लब करियर की शुरुआत उन्होंने वास्को द गामा से की। इसके बाद फ्लैमेंगो, क्रूजेरो, इंटरनेशनल, कोरिंथियंस, बोटाफोगो और एथलेटिको परानाएंस जैसे प्रतिष्ठित ब्राजीलियाई क्लबों का भी हिस्सा रहे।

1970 विश्व कप में ब्रिटो की भूमिका

मेक्सिको में आयोजित 1970 फीफा विश्व कप में ब्रिटो ने टूर्नामेंट का एक भी मिनट मैदान से बाहर नहीं गुजारा — उन्होंने हर मैच पूरी तरह खेला। उनकी मजबूत रक्षात्मक उपस्थिति ने ब्राजील के डिफेंस को अभेद्य बनाए रखा। महान पेले भी इसी टीम का हिस्सा थे, और यह टीम फुटबॉल इतिहास की सर्वश्रेष्ठ टीमों में गिनी जाती है।

डिफेंस में विल्सन पियाजा के साथ उनकी जोड़ी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही — पियाजा जहाँ तकनीकी कुशलता के लिए जाने जाते थे, वहीं ब्रिटो अपनी अदम्य शारीरिक ताकत और आक्रामक रक्षात्मक शैली के लिए। इसी कारण उन्हें 'हरक्यूलिस' का उपनाम दिया गया था।

उपलब्धियाँ और विरासत

विश्व कप के अतिरिक्त ब्रिटो ने कोपा रोका और टाका इंडिपेंडेंसिया जैसे महत्वपूर्ण खिताब भी जीते। लगभग आठ वर्षों के राष्ट्रीय करियर में उन्होंने ब्राजीलियाई फुटबॉल को एक नई पहचान दी। गौरतलब है कि 1970 की ब्राजील टीम को आज भी विश्व फुटबॉल इतिहास की सबसे प्रतिभाशाली टीमों में शुमार किया जाता है।

CBF की श्रद्धांजलि

CBF के अध्यक्ष समीर जौद ने ब्रिटो के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ब्रिटो ब्राजील फुटबॉल इतिहास के सर्वश्रेष्ठ डिफेंडरों में से एक थे और 1970 विश्व कप में उनका योगदान सदा स्मरणीय रहेगा। जौद ने यह भी कहा कि ब्रिटो की संघर्षशील भावना आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

फुटबॉल जगत पर असर

ब्रिटो के निधन के साथ 1970 विश्व कप विजेता टीम का एक और स्तंभ दुनिया से विदा हो गया। यह ऐसे समय में आया है जब फुटबॉल जगत उस स्वर्णिम पीढ़ी की धरोहर को सँजोने में जुटा है। उनकी याद ब्राजीलियाई फुटबॉल की संस्कृति में हमेशा जीवित रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि फुटबॉल के उस स्वर्णिम युग की स्मृति का और धुंधला होना है जिसे 1970 की ब्राजील टीम ने रचा था। उस टीम में पेले जैसे आक्रामक प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की चमक में ब्रिटो जैसे डिफेंडरों की भूमिका अक्सर इतिहास में उचित स्थान नहीं पाती। यह याद दिलाना ज़रूरी है कि विश्व कप जीत केवल गोल करने वालों से नहीं, बल्कि उन्हें रोकने वालों से भी बनती है — और ब्रिटो उस कला के शिखर पर थे।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिटो कौन थे और उनकी मृत्यु कैसे हुई?
ब्रिटो ब्राजील के महान डिफेंडर थे जो 1970 फीफा विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा रहे। 86 वर्ष की आयु में निमोनिया के कारण उनका निधन हुआ; CBF के अनुसार वह अंतिम एक सप्ताह से अस्पताल में भर्ती थे।
1970 विश्व कप में ब्रिटो की क्या भूमिका थी?
मेक्सिको में आयोजित 1970 फीफा विश्व कप में ब्रिटो ने टूर्नामेंट का एक भी मिनट मैदान से बाहर नहीं गुजारा — वह हर मैच में पूरे समय खेले। विल्सन पियाजा के साथ उनकी रक्षात्मक जोड़ी ने ब्राजील के डिफेंस को अभेद्य बनाए रखा।
ब्रिटो को 'हरक्यूलिस' क्यों कहा जाता था?
ब्रिटो अपनी असाधारण शारीरिक ताकत और आक्रामक रक्षात्मक शैली के लिए जाने जाते थे, जिसके कारण उन्हें 'हरक्यूलिस' का उपनाम दिया गया था।
ब्रिटो ने राष्ट्रीय टीम के लिए कितने मैच खेले?
ब्रिटो ने 1964 से 1972 के बीच ब्राजील की राष्ट्रीय टीम के लिए 61 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले, जिनमें 45 जीत, 11 ड्रॉ और केवल 5 हार दर्ज हुईं।
ब्रिटो ने किन क्लबों के लिए खेला?
ब्रिटो ने वास्को द गामा से अपने क्लब करियर की शुरुआत की और बाद में फ्लैमेंगो, क्रूजेरो, इंटरनेशनल, कोरिंथियंस, बोटाफोगो और एथलेटिको परानाएंस जैसे बड़े ब्राजीलियाई क्लबों के लिए भी खेले।
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