देवगन मरांडी ने 70 सेकंड में नेपाली फाइटर को हराया, झारखंड के MMA स्टार बोले- 'सपोर्ट करें, आगे जाऊंगा'
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के गोड्डा जिले के ललमटिया स्थित नीमकाला गांव के युवा फाइटर देवगन मरांडी ने 27 जून को कोलकाता में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) मुकाबले में नेपाल के प्रतिद्वंद्वी को पहले ही राउंड के महज 70 सेकंड में पराजित कर भारत का परचम लहराया। इस जीत ने उन्हें झारखंड के आदिवासी समाज में एक उभरते हुए अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी के रूप में पहचान दिलाई है।
मुकाबले का घटनाक्रम
भारत बनाम नेपाल के इस अंतरराष्ट्रीय MMA मुकाबले में देवगन मरांडी ने पहले ही राउंड में नेपाली फाइटर पर इतना दबाव बनाया कि मुकाबला शुरू होने के 70 सेकंड के भीतर ही समाप्त हो गया। यह जीत उनके करियर की पहली अंतरराष्ट्रीय विजय है। देवगन ने कहा, 'इसका श्रेय मेरे देश, मेरे परिवार, झारखंड और आदिवासी समाज को जाता है।'
राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन
अंतरराष्ट्रीय मंच पर कदम रखने से पहले देवगन राष्ट्रीय स्तर पर 14 MMA फाइट्स में भाग ले चुके हैं। इनमें उत्तराखंड, दिल्ली, गोवा और छत्तीसगढ़ में खेले गए मुकाबले शामिल हैं। 14 में से केवल 3 मुकाबलों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा है — यानी उनका राष्ट्रीय जीत प्रतिशत उल्लेखनीय रूप से ऊँचा है।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
देवगन ने महागामा के बेथल मिशन स्कूल से नर्सरी से दसवीं तक और सत्यम वेब भागलपुर स्कूल से इंटरमीडिएट की पढ़ाई की। 2023 में उन्होंने नई दिल्ली में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) की तैयारी शुरू की, लेकिन करीब एक साल की मेहनत के बाद वे परीक्षा में सफल नहीं हो सके। इसी दौरान, उनके रूममेट — केरल के अनुराग — की अल्टीमेट फाइटिंग चैंपियनशिप (UFC) देखने की आदत ने देवगन को MMA की ओर प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने नई दिल्ली की 'हाउस ऑफ ग्लैडिएटर्स' एकेडमी में साढ़े तीन साल तक गहन प्रशिक्षण लिया। उनके पसंदीदा फाइटर जॉन जोंस हैं।
परिवार और आर्थिक पृष्ठभूमि
देवगन के पिता सांझला मरांडी ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) ललमटिया से सेवानिवृत्त हैं और उन्हें ₹30,000 प्रतिमाह पेंशन मिलती है। परिवार में 7 भाई और 1 बड़ी बहन गुलाबी मरांडी हैं। गुलाबी शिक्षिका बनने की तैयारी कर रही हैं, जबकि एक भाई बोकारो में निजी नौकरी करता है। देवगन परिवार में चौथे नंबर पर हैं।
सरकार और उद्योग से सहायता की अपील
देवगन मरांडी ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आर्थिक सहायता प्रदान करने की माँग की है। साथ ही उन्होंने अपने क्षेत्र में कार्यरत ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) से स्पॉन्सरशिप दिलाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा, 'मैं विनती करता हूं कि लोग मुझे सपोर्ट करें। मैं काफी आगे तक जाऊंगा।' स्थानीय लोगों का मानना है कि देवगन की यह उपलब्धि आदिवासी समाज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में सहायक होगी।