नॉर्वे चेस चैंपियन प्रग्गनानंदा बोले: मां की भविष्यवाणी ने बदल दिया खेल, कीमर को हराकर रचा इतिहास
सारांश
मुख्य बातें
शतरंज ग्रैंडमास्टर आर. प्रग्गनानंदा ने 6 जून 2025 को स्टावेंजर, नॉर्वे में आयोजित नॉर्वे चेस चैंपियनशिप जीतकर इतिहास रच दिया — वे यह खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बन गए। चेन्नई के इस 19 वर्षीय ग्रैंडमास्टर ने क्लासिकल प्रतियोगिता के 10वें और अंतिम राउंड में जर्मनी के विंसेंट कीमर को पराजित कर खिताब अपने नाम किया। खिताब जीतने के बाद प्रग्गनानंदा ने बताया कि टूर्नामेंट के दूसरे चरण से ठीक पहले उनकी मां नागलक्ष्मी की एक भविष्यवाणी ने उनका पूरा खेल बदल दिया।
मां की भविष्यवाणी और करिश्माई वापसी
प्रग्गनानंदा ने खिताब जीतने के बाद खुलासा किया कि सातवें राउंड से पहले उनकी मां ने फोन पर कहा था, 'यह नया महीना है, तुम अच्छा खेलोगे।' उन्होंने बताया, 'मैंने जवाब दिया, ठीक है, यह उन बातों में से एक है जो मां अक्सर कहती हैं। इसके बाद मैंने लगातार चार गेम जीत लिए। मुझे लगता है कि मां को कुछ पता था।' यह फोन कॉल अलीरेजा फिरोजा के खिलाफ मुकाबले से ठीक पहले आई थी।
पहले चरण का संघर्ष और पलटवार
छह खिलाड़ियों के इस टूर्नामेंट के पहले चरण में प्रग्गनानंदा का प्रदर्शन असमान रहा। तीसरे राउंड में उन्होंने दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को हराया, लेकिन छह राउंड के बाद केवल छह अंक के साथ वे अंक तालिका में सबसे नीचे थे। गौरतलब है कि उस स्थिति में खिताब की दावेदारी लगभग असंभव नजर आ रही थी।
हालांकि सातवें राउंड से उनका खेल पूरी तरह बदल गया। प्रग्गनानंदा ने लगातार चार क्लासिकल मुकाबले जीते, जिनमें कार्लसन पर दूसरी जीत भी शामिल रही। यह ऐसे समय में आया जब टूर्नामेंट में उनकी उपस्थिति महज औपचारिकता मानी जा रही थी।
खेल पर नियंत्रण और रणनीति
शानदार वापसी की वजह पूछे जाने पर प्रग्गनानंदा ने कहा, 'सब कुछ मेरे पक्ष में गया। मुझे यह भी लगता है कि मैं खेल के दौरान ज्यादा नियंत्रण में था, जो हमेशा अच्छा होता है। मैंने तय किया कि मैं पहले से थोड़ा तेज खेलूंगा। हर गेम में मेरे पास टाइम का फायदा था और मैं अच्छी क्वालिटी के मूव्स कर पाया।'
कीमर के खिलाफ निर्णायक मुकाबले के अंतिम क्षणों के बारे में उन्होंने स्वीकार किया, 'अंतिम कुछ चालों से पहले ही मुझे पता था कि मैं जीतने वाला हूं। हालांकि, मैं यह सुनिश्चित करना चाहता था कि नाइट ई6 खेलने के बाद मैं ज्यादा कुछ न सोचूं। मैं बस अपने हाथ से चालें चला रहा था — फिर भी मैं काफी परेशान था। उनके जाने के बाद ही मैंने राहत महसूस की।'
ऐतिहासिक जीत का महत्व
यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि टूर्नामेंट में मैग्नस कार्लसन जैसे विश्व के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी शामिल थे। प्रग्गनानंदा ने कहा, 'जब भी आप कोई टूर्नामेंट जीतते हैं तो खुशी होती है। और जब मैग्नस खेल रहे हों तो यह टूर्नामेंट जीतना वाकई खास बन जाता है। फिर जिस तरह से यह जीत मिली, वह इसे और भी विशेष बना देती है। मैं बेहद खुश हूं।'
यह जीत चेन्नई के इस युवा ग्रैंडमास्टर के करियर में एक नया अध्याय है — निराशा के कगार से लौटकर ऐतिहासिक खिताब जीतने की यह कहानी भारतीय शतरंज में प्रेरणा का नया अध्याय बन गई है। अब नजरें उनके आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन पर होंगी।