प्रज्ञानंद ने नॉर्वे चेस जीतकर रचा इतिहास, अदाणी ग्रुप के सपोर्ट को बताया सफलता की कुंजी
सारांश
मुख्य बातें
ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानंद प्रतिष्ठित नॉर्वे चेस टूर्नामेंट जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद 20 वर्षीय इस ग्रैंडमास्टर ने कहा कि किसी भी खिलाड़ी की सफलता के पीछे एक मज़बूत कॉर्पोरेट सपोर्ट सिस्टम की भूमिका अहम होती है, और उन्होंने इस समर्थन के लिए अदाणी ग्रुप का विशेष आभार जताया।
टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन
अदाणी स्पोर्ट्सलाइन द्वारा समर्थित प्रज्ञानंद ने नॉर्वे में विश्व के शीर्षस्थ खिलाड़ियों को पछाड़ते हुए यह खिताब अपने नाम किया। उन्होंने वर्ल्ड नंबर 1 मैग्नस कार्लसन को टूर्नामेंट में दो बार हराया और मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन गुकेश डोम्माराजू के साथ-साथ अलीरेजा फिरोजा, वेस्ली सो और विंसेंट कीमर जैसे दिग्गजों को भी मात दी। यह जीत भारतीय शतरंज के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ती है।
अदाणी ग्रुप के सपोर्ट पर प्रज्ञानंद के विचार
प्रज्ञानंद ने बताया कि प्रोफेशनल शतरंज में लॉजिस्टिकल चुनौतियाँ किसी भी खिलाड़ी के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने कहा, "किसी भी क्षेत्र में सफल होने के लिए सपोर्ट सिस्टम जरूरी है। मैं आभारी हूं कि मुझे अदाणी ग्रुप से सपोर्ट मिला है। एक चेस खिलाड़ी के लिए, सभी लॉजिस्टिक्स और बाकी चीजों को मैनेज करना निश्चित रूप से एक चुनौती होती है, और यहीं पर अदाणी ग्रुप का सपोर्ट मेरी मदद कर रहा है।"
ग्रैंडमास्टर ने स्पष्ट किया कि यह सहयोग केवल वित्तीय प्रायोजन तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, "ऐसा लगता है कि जब से वे मुझे सपोर्ट कर रहे हैं, कोई भी समस्या आने पर वे हमेशा मेरी मदद और सपोर्ट के लिए मौजूद रहते हैं। मुझे खुशी है कि नई कॉर्पोरेट कंपनियां खेल में आ रही हैं और खिलाड़ियों को सपोर्ट कर रही हैं।"
गौतम अदाणी की बधाई
इससे पहले शनिवार को अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रज्ञानंद को बधाई देते हुए लिखा, "प्रज्ञानंद को नॉर्वे चेस टूर्नामेंट जीतने वाले पहले भारतीय बनने पर बधाई। यह शतरंज की दुनिया में धैर्य, बुद्धि और स्वभाव की सबसे बड़ी परीक्षा है। शतरंज के सबसे बड़े मंचों में से एक पर दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को हराना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसे और भी खास बनाता है वह जज्बा, जिसके साथ वह खेलते हैं। वह एक भारतीय की तरह निडर हैं और पूरी तरह लक्ष्य पर केंद्रित रहते हैं। आप उभरते हुए युवा भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक हैं। पूरे देश को आप पर गर्व है।"
भारतीय शतरंज के लिए क्या मायने रखती है यह जीत
यह ऐसे समय में आई है जब भारतीय शतरंज वैश्विक मंच पर नई ऊँचाइयाँ छू रहा है। गौरतलब है कि गुकेश डोम्माराजू पहले से ही वर्ल्ड चैंपियन हैं, और अब प्रज्ञानंद की यह जीत यह साबित करती है कि भारत के पास एक से अधिक विश्वस्तरीय शतरंज प्रतिभाएँ हैं। कॉर्पोरेट सपोर्ट की बढ़ती भागीदारी इस उभार को और गति दे सकती है।