प्रग्गनानंदा ने जीती नॉर्वे चेस चैंपियनशिप, खिताब पाने वाले पहले भारतीय; PM मोदी ने दी बधाई
सारांश
मुख्य बातें
आर. प्रग्गनानंदा ने 6 जून 2025 को नॉर्वे चेस चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम करके इतिहास रच दिया — वह यह प्रतिष्ठित ट्रॉफी जीतने वाले पहले भारतीय शतरंज खिलाड़ी बन गए। 20 वर्षीय ग्रैंडमास्टर की इस ऐतिहासिक जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए इसे 'वास्तव में शानदार उपलब्धि' करार दिया।
निर्णायक मुकाबला और शानदार वापसी
प्रग्गनानंदा ने क्लासिकल चेस इवेंट के 10वें और अंतिम राउंड में जर्मनी के विंसेंट कीमर को 45वीं चाल में मात देकर खिताब पर कब्जा किया। उन्होंने कीमर की गलतियों का माहिराना फायदा उठाते हुए बाजी अपने पक्ष में पलट दी।
गौरतलब है कि प्रग्गनानंदा छठे दौर के बाद अंक तालिका में सबसे निचले पायदान पर थे और उनकी जीत की संभावनाएं बेहद क्षीण नजर आ रही थीं। लेकिन इसके बाद उन्होंने लगातार चार क्लासिकल मुकाबले जीतकर अभूतपूर्व वापसी की — यह 2021 के बाद इस टूर्नामेंट में ऐसा करने वाले केवल दूसरे खिलाड़ी हैं। उनसे पहले यह कारनामा सिर्फ विश्व के नंबर एक खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन ने किया था।
अंक तालिका और टूर्नामेंट के आँकड़े
प्रग्गनानंदा ने टूर्नामेंट का समापन 5 जीत, 2 हार और 2 ड्रॉ के साथ कुल 18 अंकों पर किया। उनके दोनों ड्रॉ मुकाबलों का फैसला आर्मागेडन गेम में हुआ, जहाँ वह दोनों बार विजयी रहे।
उल्लेखनीय रहा कि प्रग्गनानंदा ने इस टूर्नामेंट में मैग्नस कार्लसन को दूसरी बार पराजित किया — मौजूदा चैंपियन और विश्व के शीर्ष खिलाड़ी को दो बार हराना अपने आप में असाधारण उपलब्धि है। इसके साथ ही उन्होंने अपने ही देश के खिलाड़ी डी. गुकेश को भी टूर्नामेंट में मात दी।
PM मोदी की बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रग्गनानंदा की प्रशंसा करते हुए लिखा, 'प्रग्गनानंदा को इस शानदार कामयाबी के लिए बधाई। यह वास्तव में एक शानदार उपलब्धि है, जो उनकी लगातार बेहतरीन उत्कृष्टता को दिखाती है। मैं उन्हें भविष्य के लिए ढेरों शुभकामनाएं देता हूं।'
माँ को समर्पित की जीत
प्रग्गनानंदा ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय अपनी माँ को दिया। उन्होंने बताया कि उनकी माँ ने भविष्यवाणी की थी कि वह नए महीने में शानदार प्रदर्शन करेंगे — और ठीक वैसा ही हुआ। माँ के उन शब्दों ने उन्हें लगातार चार जीत दर्ज करने की प्रेरणा दी।
आगे की राह
यह जीत प्रग्गनानंदा के करियर में एक नया अध्याय जोड़ती है। नॉर्वे चेस जैसे शीर्ष टूर्नामेंट में कार्लसन को दो बार हराना और खिताब जीतना भारतीय शतरंज की बढ़ती ताकत का प्रमाण है। यह देखना दिलचस्प होगा कि 20 वर्षीय यह प्रतिभा आने वाले विश्व स्तरीय टूर्नामेंटों में किस ऊँचाई तक पहुँचती है।