प्रग्गनानंदा ने नॉर्वे चेस 2026 जीता, खिताब पाने वाले पहले भारतीय बने; कार्लसन को दो बार हराया
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय ग्रैंडमास्टर आर. प्रग्गनानंदा ने 6 जून 2026 को स्टावेंजर, नॉर्वे में आयोजित नॉर्वे चेस चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम कर इतिहास रच दिया — वह यह प्रतिष्ठित सुपर टूर्नामेंट जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। क्लासिकल इवेंट के 10वें और अंतिम राउंड में उन्होंने जर्मनी के विंसेंट कीमर को हराकर 18 अंकों के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया। यह वापसी उतनी ही चौंकाने वाली थी जितनी शानदार — छठे राउंड के बाद वह अंक तालिका में अंतिम यानी छठे स्थान पर थे।
ऐतिहासिक वापसी का सफर
छठे राउंड के बाद तालिका में सबसे नीचे खिसकने के बावजूद प्रग्गनानंदा ने हार नहीं मानी। उन्होंने अगले चार मुकाबले लगातार जीते — एक ऐसा कारनामा जो 2021 के बाद पहली बार किसी खिलाड़ी ने इस टूर्नामेंट में किया। इस दौरान उन्होंने विश्व नंबर 1 मैग्नस कार्लसन को दूसरी बार पराजित किया और अपने हमवतन, मौजूदा क्लासिकल वर्ल्ड चैंपियन डी. गुकेश को भी अंतिम से पहले के राउंड में शिकस्त दी।
सफेद मोहरों से खेलते हुए प्रग्गनानंदा ने अंतिम राउंड में कीमर की मध्यखेल की कुछ गलतियों का फायदा उठाया और 45वीं चाल पर जीत दर्ज की। टूर्नामेंट में उनका कुल प्रदर्शन रहा — 5 जीत, 2 हार और 2 ड्रॉ। दोनों ड्रॉ मुकाबलों का फैसला आर्मागेडन गेम में हुआ, जिसमें भी उन्होंने जीत हासिल की।
अंक प्रणाली और अंतिम स्टैंडिंग
इस टूर्नामेंट में विशेष अंक प्रणाली लागू थी — जीत पर 3 अंक, ड्रॉ पर 1-1 अंक, और आर्मागेडन मुकाबला जीतने पर 1 बोनस अंक। अंतिम तालिका इस प्रकार रही:
वेस्ली सो (पूर्व विश्व नंबर 4) रातभर की बढ़त के बावजूद 17 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। उन्होंने अंतिम राउंड में अलीरेजा फिरोजा के साथ ड्रॉ खेला। उनके खाते में 2 जीत और 8 ड्रॉ रहे, जिनमें से 6 आर्मागेडन मुकाबलों में जीत शामिल है।
ईरानी मूल के फ्रांसीसी ग्रैंडमास्टर अलीरेजा फिरोजा 15.5 अंकों के साथ तीसरे, जबकि मैग्नस कार्लसन — जो इस टूर्नामेंट में प्रग्गनानंदा से दो बार हारे — 13 अंकों के साथ चौथे स्थान पर रहे। कार्लसन ने 3 मैच जीते, 4 हारे और 3 ड्रॉ खेले। विंसेंट कीमर 11 अंकों के साथ पाँचवें और गुकेश डोमाराजू 8 अंकों के साथ छठे व अंतिम स्थान पर रहे। गुकेश के खाते में 1 जीत, 5 हार और 4 ड्रॉ रहे।
रैंकिंग गिरावट के बाद उठान
1 जून 2026 को जारी ताज़ा विश्व रैंकिंग में प्रग्गनानंदा 16वें स्थान पर खिसक गए थे। यह टूर्नामेंट उनके लिए एक कठिन परीक्षा थी, जिसे उन्होंने न केवल पास किया बल्कि सर्वोच्च अंक के साथ उत्तीर्ण किया। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय शतरंज विश्व मंच पर लगातार नई ऊँचाइयाँ छू रहा है — गुकेश पहले से ही क्लासिकल वर्ल्ड चैंपियन हैं।
भारतीय शतरंज के लिए मायने
गौरतलब है कि नॉर्वे चेस दुनिया के सर्वश्रेष्ठ सुपर टूर्नामेंटों में से एक है और इसे जीतना किसी भी ग्रैंडमास्टर के करियर की बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। प्रग्गनानंदा की यह जीत भारतीय शतरंज की बढ़ती वैश्विक ताकत का प्रमाण है। आने वाले महीनों में उनकी विश्व रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार की संभावना है।