प्रग्गनानंदा ने नॉर्वे चेस 2026 जीता, कार्लसन को दो बार हराकर रचा इतिहास; CM विजय ने दी बधाई
सारांश
मुख्य बातें
आर. प्रग्गनानंदा ने 6 जून 2026 को ओस्लो में आयोजित नॉर्वे चेस चैंपियनशिप 2026 का खिताब अपने नाम करके इतिहास रच दिया — वे यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए। 20 वर्षीय इस ग्रैंडमास्टर ने 5 जीत, 2 हार और 2 ड्रॉ के साथ कुल 18 अंक अर्जित कर शीर्ष स्थान हासिल किया। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी।
अविश्वसनीय वापसी का सफर
प्रग्गनानंदा की यह जीत उतनी ही चौंकाने वाली रही जितनी शानदार। छठे दौर के बाद वे अंक तालिका में सबसे निचले पायदान पर थे। लेकिन इसके बाद उन्होंने जो वापसी की, वह शतरंज इतिहास में दर्ज हो गई — लगातार चार क्लासिकल मुकाबले जीतकर उन्होंने खिताब पर कब्जा जमाया। अंतिम राउंड में उन्होंने विंसेंट कीमर को 45वीं चाल में मात दी, प्रतिद्वंद्वी की गलतियों का पूरा फायदा उठाते हुए।
कार्लसन को दो बार हराना बड़ी उपलब्धि
टूर्नामेंट की सबसे बड़ी उपलब्धि रही मौजूदा विश्व चैंपियन मैग्नस कार्लसन को एक ही टूर्नामेंट में दो बार शिकस्त देना। इसके अलावा प्रग्गनानंदा ने विश्व चैंपियन डी. गुकेश के खिलाफ भी जीत दर्ज की। गौरतलब है कि 2021 के बाद नॉर्वे चेस में लगातार चार क्लासिकल मुकाबले जीतने वाले वे कार्लसन के बाद केवल दूसरे खिलाड़ी हैं। दो ड्रॉ मुकाबलों का फैसला आर्मागेडन गेम से हुआ, जिसमें भी प्रग्गनानंदा ने जीत हासिल की।
CM विजय की बधाई और शुभकामनाएं
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर प्रग्गनानंदा की प्रशंसा करते हुए लिखा, "ग्रैंडमास्टर आर. प्रग्गनानंदा को ओस्लो में हुए मशहूर नॉर्वे चेस 2026 टूर्नामेंट में शतरंज के अपने शानदार और समझदारी भरे प्रदर्शन से जीत हासिल करके इतिहास रचने के लिए दिल से बधाई। उन्होंने एक ही टूर्नामेंट में मौजूदा चैंपियन मैग्नस कार्लसन को दो बार हराने और लगातार चार जीत हासिल करके खास उपलब्धि हासिल की। ग्रैंडमास्टर प्रग्गनानंदा को और भी कई रिकॉर्ड बनाने और तमिलनाडु और भारत का नाम और रोशन करने के लिए मेरी शुभकामनाएं।"
माँ की भविष्यवाणी और जीत का श्रेय
प्रग्गनानंदा ने इस ऐतिहासिक जीत का श्रेय अपनी माँ को दिया। उनके अनुसार, माँ ने कहा था कि यह नया महीना है और वे अच्छा प्रदर्शन करेंगे — और ठीक ऐसा ही हुआ। माँ की उस प्रेरणा के बाद उन्होंने अगले चारों मैच जीते और कार्लसन के खिलाफ भी दमदार खेल दिखाया। यह जीत न केवल तमिलनाडु, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का क्षण है — और प्रग्गनानंदा के शतरंज करियर को नई ऊँचाइयों पर ले जाने वाली साबित हो सकती है।