प्रग्गनानंदा को ₹50 लाख का सम्मान: नॉर्वे चेस जीतने वाले पहले भारतीय को CM विजय ने किया पुरस्कृत
सारांश
मुख्य बातें
आर. प्रग्गनानंदा को नॉर्वे चेस चैंपियनशिप जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बनने पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सोमवार, 8 जून को ₹50 लाख के चेक से सम्मानित किया। यह पुरस्कार तमिलनाडु खेल विकास प्राधिकरण (SDAT) की ओर से चेन्नई स्थित सचिवालय में आयोजित एक विशेष समारोह में प्रदान किया गया।
ऐतिहासिक जीत का सफर
प्रग्गनानंदा ने शुक्रवार को नॉर्वे चेस चैंपियनशिप के क्लासिकल इवेंट के 10वें राउंड में विंसेंट कीमर को हराकर यह खिताब अपने नाम किया। उल्लेखनीय यह है कि छठे राउंड के बाद वे अंक तालिका में सबसे निचले पायदान पर थे, लेकिन उन्होंने अदम्य साहस दिखाते हुए अगले चारों मैच जीते। इस प्रदर्शन के साथ वे 2021 के बाद लगातार चार मैच जीतने वाले मैग्नस कार्लसन के बाद केवल दूसरे खिलाड़ी बने।
समारोह का विवरण
सचिवालय में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रग्गनानंदा ने जीती हुई ट्रॉफी मुख्यमंत्री को दिखाई। CM विजय ने उनकी उपलब्धि की सराहना करते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर खेल मंत्री आधव अर्जुन, SDAT के मेंबर सेक्रेटरी जे. मेघनाथ रेड्डी (IAS), प्रग्गनानंदा के माता-पिता और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
SDAT की एलीट स्कीम और खिलाड़ियों को समर्थन
गौरतलब है कि प्रग्गनानंदा पहले से ही SDAT की एलीट स्कीम के तहत सालाना ₹30 लाख की सहायता प्राप्त कर रहे हैं। यह स्कीम विशेष रूप से उन खिलाड़ियों के लिए बनाई गई है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करते हैं। राज्य सरकार खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी और पदक विजेताओं को आर्थिक प्रोत्साहन भी देती है।
तमिलनाडु का स्पोर्ट्स हब विजन
राज्य सरकार तमिलनाडु को भारत का प्रमुख स्पोर्ट्स हब बनाने की दिशा में कई कदम उठा रही है। इसी कड़ी में चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 'होम ऑफ चेस' अकादमी की शुरुआत की गई है, जहाँ खिलाड़ियों को आधुनिक प्रशिक्षण, मेंटल कंडीशनिंग, रणनीतिक तैयारी और तकनीक व सिमुलेशन सॉफ्टवेयर की मदद से अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव दिया जाएगा।
आगे की राह
प्रग्गनानंदा की यह ऐतिहासिक जीत और राज्य सरकार का यह सम्मान तमिलनाडु में शतरंज की बढ़ती ताकत को रेखांकित करता है। 'होम ऑफ चेस' अकादमी जैसे संस्थागत प्रयासों के साथ, यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले वर्षों में राज्य से और भी विश्वस्तरीय शतरंज प्रतिभाएँ उभरेंगी।