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प्रज्ञानानंद का नॉर्वे चेस खिताब: 'हार से भी उतना ही सीखा, जीत पर ज़्यादा ध्यान जाता है'

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प्रज्ञानानंद का नॉर्वे चेस खिताब: 'हार से भी उतना ही सीखा, जीत पर ज़्यादा ध्यान जाता है'

सारांश

छठे राउंड के बाद अंतिम स्थान पर रहे प्रज्ञानानंद ने लगातार चार जीत से नॉर्वे चेस का खिताब अपने नाम किया — पहले भारतीय ग्रैंडमास्टर के रूप में। कार्लसन और गुकेश दोनों को हराने के बाद उनका कहना है कि हार से भी उतना ही सीखा, जितना जीत से।

मुख्य बातें

रमेशबाबू प्रज्ञानानंद नॉर्वे चेस खिताब जीतने वाले पहले भारतीय ग्रैंडमास्टर बने।
छठे राउंड के बाद अंतिम स्थान पर रहने के बावजूद लगातार चार जीत दर्ज कर खिताब जीता।
अंतिम स्कोर 18 अंक ; अमेरिकी ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो को पीछे छोड़ा।
अभियान में वर्ल्ड नंबर 1 मैग्नस कार्लसन के खिलाफ दो और वर्ल्ड चैंपियन गुकेश डोम्माराजू के खिलाफ एक जीत शामिल।
प्रज्ञानानंद ने कहा — 'सिर्फ जीत पर ही अधिक ध्यान दिया जाता है'; कार्लसन के साथ हर मुकाबले से सीखने की बात स्वीकारी।

रमेशबाबू प्रज्ञानानंद प्रतिष्ठित नॉर्वे चेस खिताब जीतने वाले पहले भारतीय ग्रैंडमास्टर बन गए हैं। चेन्नई के इस 20 वर्षीय खिलाड़ी ने छह राउंड के बाद अंतिम स्थान पर रहने के बावजूद लगातार चार जीत दर्ज कर ऐतिहासिक वापसी की। खिताबी जीत के बाद उन्होंने अपने सफर, दबाव से निपटने और मैग्नस कार्लसन से मिली सीख पर बेबाक राय रखी।

मुख्य घटनाक्रम

प्रज्ञानानंद ने टूर्नामेंट के आखिरी राउंड में जर्मनी के विंसेंट कीमर को हराकर 18 अंक के साथ खिताब अपने नाम किया और अमेरिकी ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो को पीछे छोड़ा। उनके अभियान में वर्ल्ड नंबर 1 मैग्नस कार्लसन के खिलाफ दो जीत और मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन गुकेश डोम्माराजू के खिलाफ एक निर्णायक जीत शामिल रही।

वापसी का वह पल

छठे राउंड के बाद सबसे निचले पायदान पर खड़े प्रज्ञानानंद ने बताया कि उन्हें पहले गेम में ज़्यादा नियंत्रण महसूस हुआ, तभी विश्वास जागा। उन्होंने कहा, 'जब मैंने मैग्नस को हराया, मुझे बहुत आत्मविश्वास मिला। मुझे लगा कि मैं सच में ऐसा कर सकता हूं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि अच्छे खेल के साथ सही समय पर किस्मत भी साथ आती है।

कार्लसन से सीख: जीत से ज़्यादा हार ने सिखाया

मैग्नस कार्लसन के खिलाफ हार और जीत दोनों पर प्रज्ञानानंद ने कहा, 'मैं इतनी बार हारा हूं कि मुझे लगता है कि सिर्फ जीत पर ही अधिक ध्यान दिया जाता है।' उन्होंने स्वीकार किया कि कार्लसन ऐसे खिलाड़ी हैं जिनका खेल देखते हुए वे बड़े हुए हैं। उनके अनुसार, कार्लसन का पिछले 15 वर्षों से शतरंज पर दबदबा उन्हें अब भी संभवतः दुनिया का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनाता है।

गलतियों से निपटने का मंत्र

बोर्ड पर गलती होने पर मानसिक स्थिति के बारे में प्रज्ञानानंद ने कहा कि चेस में गलती पर पछतावा करना सबसे बुरी बात है। उनके अनुसार एक गलती के बाद दूसरी गलती इसीलिए होती है क्योंकि खिलाड़ी पिछली चाल में उलझा रहता है। उन्होंने कहा, 'आपको बस पिछली चाल को भूलने और गेम की स्थिति के हिसाब से खेलते रहने की कोशिश करनी चाहिए।'

इस जीत का संदेश

गुकेश और कार्लसन जैसे दिग्गजों पर जीत के बारे में प्रज्ञानानंद ने कहा कि इस टूर्नामेंट ने उन्हें दिखाया कि वे अंतिम पायदान से वापसी कर सकते हैं और अहम मौकों पर अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। यह जीत भारतीय शतरंज की बढ़ती ताकत का एक और प्रमाण है, और प्रज्ञानानंद के करियर में एक नया अध्याय जोड़ती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय शतरंज की उस पीढ़ी का प्रतीक है जो अब विश्व मंच पर बराबरी से नहीं, बल्कि वर्चस्व से खेल रही है। गौरतलब है कि गुकेश पहले से वर्ल्ड चैंपियन हैं और अब प्रज्ञानानंद ने नॉर्वे चेस जीता — दोनों एक ही पीढ़ी के, दोनों चेन्नई से। लेकिन जो बात मुख्यधारा की कवरेज अक्सर चूक जाती है, वह यह है कि प्रज्ञानानंद की सबसे बड़ी ताकत उनकी मानसिक परिपक्वता है — अंतिम पायदान से वापसी और गलती के बाद भी शांत रहना। सवाल यह है कि क्या भारतीय शतरंज का ढाँचा इन प्रतिभाओं को उतनी ही तेज़ी से संस्थागत समर्थन दे रहा है, जितनी तेज़ी से ये खिलाड़ी खुद आगे बढ़ रहे हैं।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रज्ञानानंद ने नॉर्वे चेस 2025 कैसे जीता?
प्रज्ञानानंद ने छठे राउंड के बाद अंतिम स्थान पर रहने के बावजूद लगातार चार जीत दर्ज कर 18 अंकों के साथ खिताब जीता। उन्होंने अंतिम राउंड में जर्मनी के विंसेंट कीमर को हराकर खिताब पक्का किया।
क्या प्रज्ञानानंद नॉर्वे चेस जीतने वाले पहले भारतीय हैं?
हाँ, रमेशबाबू प्रज्ञानानंद नॉर्वे चेस खिताब जीतने वाले पहले भारतीय ग्रैंडमास्टर बने हैं। यह भारतीय शतरंज के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
प्रज्ञानानंद ने मैग्नस कार्लसन के बारे में क्या कहा?
प्रज्ञानानंद ने कहा कि कार्लसन के साथ हर मुकाबले से उन्होंने कुछ न कुछ सीखा है, चाहे जीत हो या हार। उनके अनुसार, 'सिर्फ जीत पर ही अधिक ध्यान दिया जाता है' और कार्लसन अब भी संभवतः दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हैं।
नॉर्वे चेस में प्रज्ञानानंद की वापसी कैसे हुई?
छठे राउंड के बाद सबसे निचले पायदान पर रहे प्रज्ञानानंद को एक गेम में ज़्यादा नियंत्रण महसूस हुआ, जिसके बाद उन्होंने कार्लसन को हराया और आत्मविश्वास के साथ लगातार जीत का सिलसिला जारी रखा।
प्रज्ञानानंद गलतियों से कैसे उबरते हैं?
प्रज्ञानानंद के अनुसार चेस में गलती पर पछतावा करना सबसे बुरी बात है क्योंकि इससे एक के बाद एक गलतियाँ होती हैं। उनका मंत्र है — पिछली चाल को भूलकर मौजूदा स्थिति के अनुसार खेलते रहना।
राष्ट्र प्रेस
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