प्रज्ञानंद ने नॉर्वे चेस 2025 जीता, जयशंकर बोले — 'आपकी सफलता ने भारत को गर्व महसूस कराया'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय शतरंज खिलाड़ी रमेशबाबू प्रज्ञानंद ने 6 जून 2025 को नॉर्वे चेस टूर्नामेंट के 10वें और अंतिम राउंड में जर्मनी के विंसेंट कीमर को परास्त कर खिताब अपने नाम किया। इस ऐतिहासिक जीत के बाद देशभर से बधाइयों का तांता लग गया, और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी एक्स पर पोस्ट कर प्रज्ञानंद की तारीफ की।
जयशंकर और मोदी की बधाई
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'नॉर्वे चेस चैंपियनशिप जीतना प्रज्ञानंद की एक शानदार कामयाबी है। आपकी सफलताओं ने भारत को गर्व महसूस कराया है।' इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बधाई देते हुए लिखा, 'प्रज्ञानंद को इस शानदार कामयाबी के लिए बधाई! यह सच में एक जबरदस्त माइलस्टोन है, जो उनके लगातार बेहतरीन काम को दिखाता है। उनके आगे के लिए मेरी शुभकामनाएं।'
प्रज्ञानंद ने प्रधानमंत्री के संदेश का जवाब देते हुए लिखा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सर, आपकी शुभकामनाओं से बहुत सम्मानित महसूस कर रहा हूं। भारत का प्रतिनिधित्व करना और नॉर्वे चेस टाइटल घर लाना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है। आपका लगातार हौसला मुझे और भी ज्यादा मेहनत करने और हमारे देश को गर्व महसूस कराते रहने के लिए उत्साहित करता है।'
फाइनल राउंड का रोमांच
अंतिम राउंड में विंसेंट कीमर द्वारा की गई गलतियों का भरपूर फायदा उठाते हुए प्रज्ञानंद ने सफेद मोहरों से खेलते हुए 45वीं चाल में जीत दर्ज की। उन्होंने टूर्नामेंट में 5 जीत, 2 हार और 2 ड्रॉ के साथ कुल 18 अंक बटोरे। दोनों ड्रॉ मुकाबलों का फैसला आर्मागेडन गेम में हुआ, जिसमें वे विजयी रहे।
ऐतिहासिक वापसी
गौरतलब है कि छठे दौर के बाद प्रज्ञानंद अंक तालिका में सबसे निचले स्थान पर थे। वहाँ से उन्होंने लगातार चार क्लासिकल मुकाबले जीतकर इतिहास रच दिया। इस दौरान उन्होंने विश्व नंबर एक मैग्नस कार्लसन को टूर्नामेंट में दूसरी बार हराया और डी. गुकेश के खिलाफ भी महत्वपूर्ण जीत दर्ज की।
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय शतरंज का कद वैश्विक स्तर पर तेज़ी से बढ़ रहा है। प्रज्ञानंद 2021 के बाद नॉर्वे चेस में लगातार चार क्लासिकल मुकाबले जीतने वाले केवल दूसरे खिलाड़ी बने हैं — उनसे पहले यह उपलब्धि स्वयं मैग्नस कार्लसन के नाम थी।
भारतीय शतरंज के लिए क्या मायने रखता है
प्रज्ञानंद की यह जीत भारतीय शतरंज की उस पीढ़ी का प्रतीक है जो विश्व के शीर्ष खिलाड़ियों को उन्हीं के मंच पर चुनौती दे रही है। टूर्नामेंट में कार्लसन और गुकेश जैसे दिग्गजों को पराजित करना यह दर्शाता है कि प्रज्ञानंद अब केवल उभरते हुए सितारे नहीं, बल्कि विश्व शतरंज के स्थापित ताकत हैं।