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प्रज्ञानंद ने नॉर्वे चेस में कार्लसन को दूसरी बार हराया, आनंद महिंद्रा बोले- 'अभेद्य' लेबल लगने लगा

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प्रज्ञानंद ने नॉर्वे चेस में कार्लसन को दूसरी बार हराया, आनंद महिंद्रा बोले- 'अभेद्य' लेबल लगने लगा

सारांश

नॉर्वे चेस में आर. प्रज्ञानंद ने मैग्नस कार्लसन को एक ही टूर्नामेंट में दूसरी बार हराकर इतिहास रच दिया — विश्वनाथन आनंद के बाद यह कारनामा करने वाले वे पहले भारतीय हैं। आनंद महिंद्रा ने एक्स पर लिखा कि अब उन पर ‘अभेद्य’ का लेबल लगने लगा है। 12 अंकों के साथ प्रज्ञानंद खिताबी दौड़ में मज़बूती से कायम हैं।

मुख्य बातें

प्रज्ञानंद ने नॉर्वे चेस के राउंड 8 में काले मोहरों से मैग्नस कार्लसन को हराया।
एक ही टूर्नामेंट में कार्लसन को दो बार हराने वाले विश्वनाथन आनंद के बाद दूसरे भारतीय बने।
यह कार्लसन के विरुद्ध प्रज्ञानंद की तीसरी क्लासिकल-फॉर्मेट जीत है।
आनंद महिंद्रा ने एक्स पर ‘अभेद्य’ लेबल वाली पोस्ट कर तारीफ की।
स्टैंडिंग्स: वेस्ली सो 14 अंक, फ़िरौज़ा 13, प्रज्ञानंद 12 अंक।

इंडियन ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानंद ने नॉर्वे चेस टूर्नामेंट के राउंड 8 में दुनिया के नंबर 1 खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को काले मोहरों से मात देकर इसी टूर्नामेंट में दूसरी बार उन्हें हराने का कारनामा कर दिखाया। इस ऐतिहासिक जीत के बाद उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने एक्स पर युवा भारतीय खिलाड़ी की खुलकर तारीफ की और कहा कि अब उन पर ‘अभेद्य’ का लेबल लगने लगा है।

महिंद्रा की प्रतिक्रिया

एक्स पर लिखी पोस्ट में आनंद महिंद्रा ने कहा, “‘अभेद्य’ का लेबल अब लगने लगा है और मैग्नस ने कोई फ्रस्ट्रेशन नहीं दिखाई। मुझे उम्मीद है कि इसका मतलब है कि वह प्रज्ञानंद के साथ ऐसे नतीजों की ज्यादा उम्मीद करने लगे हैं।” महिंद्रा की यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गई और चेस प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बनी।

दोहरी जीत का महत्व

प्रज्ञानंद ने इस टूर्नामेंट में पहले सफेद मोहरों से कार्लसन को हराया था, और अब काले मोहरों से जीतकर एक ही टूर्नामेंट में दो बार पाँच बार के वर्ल्ड चैंपियन को परास्त किया। इस उपलब्धि के साथ वे महान विश्वनाथन आनंद के बाद ऐसा करने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। यह कार्लसन के विरुद्ध उनके करियर की तीसरी क्लासिकल-फॉर्मेट जीत भी रही।

निर्णायक पल और तकनीकी संतुलन

रिपोर्टों के अनुसार, खेल अंतिम चरण तक संतुलित बना हुआ था, लेकिन कार्लसन समय के दबाव में फँस गए। प्रज्ञानंद ने इस मौके को भुनाते हुए शांत संयम और रणनीतिक विविधता का परिचय दिया। यह जीत दोनों खिलाड़ियों के बीच लगातार पनप रही प्रतिद्वंद्विता में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।

स्टैंडिंग्स पर असर

इस जीत ने प्रज्ञानंद को 12 अंक दिलाए, जिससे वे टूर्नामेंट के अंतिम चरण में खिताबी दौड़ में मज़बूती से बने हुए हैं। राउंड 8 के बाद वेस्ली सो 14 अंकों के साथ शीर्ष पर हैं, जबकि अलीरेज़ा फ़िरौज़ा 13 अंकों के साथ दूसरे और प्रज्ञानंद तीसरे स्थान पर हैं।

अन्य भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन

वर्ल्ड चैंपियन गुकेश डोमराजू को अलीरेज़ा फ़िरौज़ा के हाथों, जबकि दिव्या देशमुख को बिबिसारा असौबायेवा के हाथों हार का सामना करना पड़ा। इन नतीजों ने भारतीय शिविर में अंतिम राउंड को लेकर रणनीतिक चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। आने वाले दौर में प्रज्ञानंद का प्रदर्शन यह तय करेगा कि वे खिताब के और कितने करीब पहुँचते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि गहरी प्रतिभा-पंक्ति पर खड़ा है। आनंद महिंद्रा जैसी गैर-खेल हस्तियों का इस स्तर पर प्रतिक्रिया देना यह भी संकेत है कि शतरंज भारत में मुख्यधारा की मीडिया-अर्थव्यवस्था में पैर जमा रहा है। असली परीक्षा अब अंतिम राउंड में होगी — क्या प्रज्ञानंद टूर्नामेंट जीत भी पाते हैं, या सिर्फ़ ‘कार्लसन-किलर’ की पहचान तक सीमित रहते हैं।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रज्ञानंद ने नॉर्वे चेस में कार्लसन को कब और कैसे हराया?
आर. प्रज्ञानंद ने नॉर्वे चेस के राउंड 8 में काले मोहरों से मैग्नस कार्लसन को हराया। खेल अंतिम चरण तक संतुलित था, लेकिन समय के दबाव में कार्लसन से चूक हुई और प्रज्ञानंद ने मौके का फायदा उठाकर जीत दर्ज की।
आनंद महिंद्रा ने प्रज्ञानंद के बारे में क्या कहा?
उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने एक्स पर लिखा कि प्रज्ञानंद पर अब ‘अभेद्य’ का लेबल लगने लगा है और कार्लसन ने इस हार पर कोई फ्रस्ट्रेशन नहीं दिखाई। उन्होंने उम्मीद जताई कि कार्लसन अब प्रज्ञानंद के साथ ऐसे नतीजों की अधिक अपेक्षा करने लगे हैं।
क्या यह उपलब्धि ऐतिहासिक है?
हाँ, इस जीत के साथ प्रज्ञानंद विश्वनाथन आनंद के बाद ऐसे दूसरे भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं जिन्होंने एक ही टूर्नामेंट में मैग्नस कार्लसन को दो बार हराया है। यह कार्लसन के खिलाफ उनके करियर की तीसरी क्लासिकल-फॉर्मेट जीत भी है।
नॉर्वे चेस की मौजूदा स्टैंडिंग्स क्या हैं?
राउंड 8 के बाद वेस्ली सो 14 अंकों के साथ शीर्ष पर हैं, अलीरेज़ा फ़िरौज़ा 13 अंकों के साथ दूसरे और आर. प्रज्ञानंद 12 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर हैं। प्रज्ञानंद अब भी खिताबी दौड़ में मज़बूती से बने हुए हैं।
अन्य भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन कैसा रहा?
वर्ल्ड चैंपियन गुकेश डोमराजू को अलीरेज़ा फ़िरौज़ा से, जबकि दिव्या देशमुख को बिबिसारा असौबायेवा से राउंड 8 में हार का सामना करना पड़ा।
राष्ट्र प्रेस
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