क्या पूर्व वर्ल्ड बिलियर्ड्स चैंपियन मनोज कोठारी का 67 वर्ष की आयु में निधन हो गया?
सारांश
Key Takeaways
- पूर्व वर्ल्ड बिलियर्ड्स चैंपियन मनोज कोठारी का निधन
- भारतीय क्यू स्पोर्ट्स में महत्वपूर्ण योगदान
- सौरभ कोठारी का पिता के नक्शेकदम पर चलना
- मेजर ध्यानचंद पुरस्कार से सम्मानित
- संक्रमण के कारण निधन
नई दिल्ली, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पूर्व वर्ल्ड बिलियर्ड्स चैंपियन मनोज कोठारी का सोमवार को तिरुनेलवेली के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। उनकी उम्र 67 वर्ष थी।
मनोज कोठारी, जो मूलतः कोलकाता के निवासी थे, इलाज के लिए तिरुनेलवेली आए थे, जहां उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई।
लगभग 10 दिन पहले उनका लिवर प्रत्यारोपण किया गया था। शुरू में सर्जरी सफल रही थी और तीसरे दिन वह स्वस्थ दिख रहे थे, लेकिन फिर उन्हें फेफड़ों में संक्रमण हो गया। सोमवार सुबह उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उनका निधन हो गया।
अस्पताल में उनके बेटे सौरभ कोठारी ने पिता के पार्थिव शरीर को राष्ट्रीय ध्वज से लपेटकर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उनका अंतिम संस्कार तिरुनेलवेली के वीएम चत्रम श्मशान घाट में किया गया।
साल 1990 में वर्ल्ड बिलियर्ड्स चैंपियनशिप जीतने वाले मनोज कोठारी को 2005 में प्रतिष्ठित मेजर ध्यानचंद पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वह भारतीय राष्ट्रीय टीम के हेड कोच भी रहे।
मनोज कोठारी का भारतीय क्यू स्पोर्ट्स के विकास में योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम उजागर किया। कोठारी अपनी सटीक तकनीक, धैर्य और रणनीतिक खेल के लिए प्रसिद्ध थे। वह लंबे समय तक भारतीय बिलियर्ड्स में शीर्ष स्तर पर बने रहे, जो उनकी मेहनत और निरंतरता को दर्शाता है। उन्होंने न केवल खिताब जीते, बल्कि युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा भी बने।
सौरभ कोठारी ने भी अपने पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए इस खेल को अपनाया और वर्ल्ड बिलियर्ड्स चैंपियनशिप जीती। सौरव को उनके पिता ने ही प्रशिक्षित किया था।
सौरव कोठारी ने अप्रैल 2025 में पंकज आडवाणी को हराकर आईबीएसएफ वर्ल्ड बिलियर्ड्स 2025 का खिताब जीता। 40 वर्षीय सौरव ने 725 अंक प्राप्त किए, जबकि आडवाणी ने 480 अंक ही हासिल किए।