30 जून 2026
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फीफा विश्व कप 2026 से जर्मनी बाहर: नागेल्समैन बोले — 'बिल्ड-अप प्ले बहुत धीमा रहा'

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फीफा विश्व कप 2026 से जर्मनी बाहर: नागेल्समैन बोले — 'बिल्ड-अप प्ले बहुत धीमा रहा'

सारांश

चार बार की विश्व चैंपियन जर्मनी फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ 32 में ही बाहर हो गई — और वो भी इतिहास में पहली बार पेनल्टी शूटआउट में हारकर। कोच नागेल्समैन का 'धीमे बिल्ड-अप' का इकबाल और हावर्ट्ज़ की माफी जर्मन फुटबॉल के संकट की गहराई बताती है।

मुख्य बातें

जर्मनी फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ 32 में 30 जून 2026 को बाहर हुई।
पराग्वे ने पेनल्टी शूटआउट में 4-3 से जीत दर्ज की; नियमित समय में मुकाबला 1-1 रहा।
यह फीफा विश्व कप इतिहास में पहली बार है जब जर्मनी पेनल्टी शूटआउट में हारी।
कोच जूलियन नागेल्समैन ने 'धीमे बिल्ड-अप प्ले' और सेट पीस का पूरा फायदा न उठा पाने को हार का कारण बताया।
काई हावर्ट्ज़ ने पहला पेनल्टी शॉट चूका और सार्वजनिक रूप से माफी माँगी।
2018 और 2022 के बाद यह जर्मनी की लगातार तीसरी बड़े टूर्नामेंट में निराशाजनक विदाई है।

फुटबॉल इतिहास में एक दुर्लभ झटके में, चार बार की विश्व चैंपियन जर्मनी 30 जून 2026 को फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ 32 में ही बाहर हो गई, जब फॉक्सबोरो के बोस्टन स्टेडियम में पराग्वे ने पेनल्टी शूटआउट में उसे 4-3 से हराया। नियमित समय में मुकाबला 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ था। यह पहला मौका है जब जर्मनी फीफा विश्व कप इतिहास में पेनल्टी शूटआउट में हारी है।

मैच का घटनाक्रम

नियमित 90 मिनट तक दोनों टीमें 1-1 से बराबर रहीं। जर्मन गोलकीपर मैनुअल नोयर की अहम भूमिका ने टीम को मुकाबले में बनाए रखा और बराबरी दिलाई, लेकिन पेनल्टी शूटआउट में जर्मनी की किस्मत ने साथ नहीं दिया। पराग्वे ने अपनी तीसरी सफल स्पॉट-किक के साथ राउंड ऑफ 16 में जगह पक्की कर ली।

गौरतलब है कि फीफा विश्व कप के अपने पूरे इतिहास में जर्मनी इससे पहले कभी पेनल्टी शूटआउट में नहीं हारी थी — यह तथ्य इस हार को और भी चौंकाने वाला बनाता है।

नागेल्समैन की प्रतिक्रिया

जर्मनी के मुख्य कोच जूलियन नागेल्समैन ने हार के बाद स्वीकार किया कि टीम की रणनीति में गंभीर कमियाँ रहीं। उन्होंने कहा, 'ड्रेसिंग रूम में गहरी निराशा का माहौल है। दुर्भाग्य से फुटबॉल कभी-कभी ऐसा ही होता है। कुछ टीमें बेहद साधारण तरीकों से भी जीत हासिल कर लेती हैं और आपको उन तरीकों का लगातार बचाव करना पड़ता है। हमने अपने प्रतिद्वंद्वी को दौड़ाने और उस पर दबाव बनाने में बहुत ज़्यादा समय लगा दिया। हम गेंद को बॉक्स में कहीं अधिक बार डाल सकते थे। हमें मैच का फैसला पेनल्टी शूटआउट तक जाने से पहले ही कर देना चाहिए था।'

नागेल्समैन ने आगे कहा, 'हमारा बिल्ड-अप प्ले बहुत धीमा था और फिर एक समय ऐसा आया जब हमने अधिक सीधा और ताकत के दम पर खेलने का तरीका अपना लिया। हमें कई सेट पीस मिले और हमें मैच को अलग तरीके से खेलना चाहिए था, लेकिन हम ऐसा करने में सफल नहीं हो सके।'

हावर्ट्ज़ का दर्द

पेनल्टी शूटआउट में जर्मनी की ओर से पहला शॉट चूकने वाले मिडफील्डर काई हावर्ट्ज़ ने गहरी पीड़ा जताई। उन्होंने कहा, 'मेरे पास शब्द नहीं हैं। यह मेरा दूसरा विश्व कप है और दोनों बार कुछ हासिल नहीं हो सका। मैं सिर्फ माफी माँग सकता हूँ। मुझे लगता है कि पिछले कुछ टूर्नामेंटों में हमने खराब फुटबॉल नहीं खेला, लेकिन हर बार कुछ न कुछ कमी रह गई। आज भी वही हुआ। हमें खुद का गंभीरता से आकलन करना होगा, खासकर खिलाड़ियों को।'

हावर्ट्ज़ ने स्पष्ट किया कि वे इस आत्म-मूल्यांकन में कोच को शामिल नहीं कर रहे — एक संकेत जो जर्मन फुटबॉल के भीतर जवाबदेही की बहस को और गहरा कर सकता है।

व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब जर्मन फुटबॉल 2018 और 2022 के विश्व कप में ग्रुप स्तर पर बाहर होने के बाद पुनर्निर्माण के दौर से गुज़र रहा था। यूईएफए यूरो 2024 में मेज़बान के रूप में क्वार्टरफाइनल तक पहुँचने के बाद उम्मीदें थीं कि जर्मनी विश्व कप में बेहतर प्रदर्शन करेगी। यह तीसरे बड़े टूर्नामेंट में निराशाजनक विदाई है, जो जर्मन फुटबॉल संघ (DFB) के लिए गहरी संरचनात्मक समीक्षा की माँग करती है।

आगे क्या

नागेल्समैन के भविष्य को लेकर अटकलें तेज़ होंगी, हालाँकि उन्होंने अभी तक अपने पद पर बने रहने या न रहने के बारे में कोई संकेत नहीं दिया है। DFB से अपेक्षा है कि वह टूर्नामेंट के बाद प्रदर्शन की विस्तृत समीक्षा करेगा। पराग्वे अब राउंड ऑफ 16 में अपनी यात्रा जारी रखेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

2022 में फिर वही हश्र, और अब 2026 में राउंड ऑफ 32 में पेनल्टी शूटआउट की शर्मिंदगी — तीन बड़े टूर्नामेंटों में यह पैटर्न बताता है कि समस्या रणनीति से गहरी है। नागेल्समैन का 'धीमे बिल्ड-अप' स्वीकारना ईमानदार है, लेकिन असली सवाल यह है कि DFB युवा प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय दबाव में ढालने में क्यों चूक रहा है। हावर्ट्ज़ का यह कहना कि 'कोच की गलती नहीं' — खिलाड़ियों की जवाबदेही की दिशा में एक असामान्य कदम है, जो आंतरिक बहस को सतह पर ला सकता है।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फीफा विश्व कप 2026 में जर्मनी कैसे बाहर हुई?
30 जून 2026 को फॉक्सबोरो के बोस्टन स्टेडियम में राउंड ऑफ 32 मुकाबले में पराग्वे ने पेनल्टी शूटआउट में जर्मनी को 4-3 से हराया। नियमित 90 मिनट में मुकाबला 1-1 की बराबरी पर रहा था।
क्या जर्मनी पहले कभी विश्व कप पेनल्टी शूटआउट में हारी है?
नहीं, फीफा विश्व कप के इतिहास में यह पहली बार है जब जर्मनी पेनल्टी शूटआउट में हारी। इससे पहले जर्मनी पेनल्टी शूटआउट में अपराजित रही थी।
कोच नागेल्समैन ने हार का क्या कारण बताया?
नागेल्समैन ने 'धीमे बिल्ड-अप प्ले' को मुख्य कारण बताया। उन्होंने कहा कि टीम प्रतिद्वंद्वी पर दबाव बनाने में ज़रूरत से ज़्यादा समय लगाती रही और गेंद को बॉक्स में अधिक बार डालने का मौका गँवाया।
काई हावर्ट्ज़ की भूमिका क्या रही?
काई हावर्ट्ज़ ने पेनल्टी शूटआउट में जर्मनी की ओर से पहला शॉट लिया और चूक गए। उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी माँगी और कहा कि यह उनका दूसरा विश्व कप है और दोनों बार टीम कुछ हासिल नहीं कर सकी।
जर्मनी के विश्व कप से बाहर होने का व्यापक संदर्भ क्या है?
2018 और 2022 में ग्रुप स्तर पर बाहर होने के बाद यह जर्मनी की तीसरी बड़ी टूर्नामेंट निराशा है। यूईएफए यूरो 2024 में मेज़बान के रूप में क्वार्टरफाइनल तक पहुँचने के बाद उम्मीदें थीं, लेकिन यह हार जर्मन फुटबॉल की संरचनात्मक समस्याओं पर फिर सवाल खड़े करती है।
राष्ट्र प्रेस
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