जियानी इन्फेंटिनो ने फीफा काउंसिल से माँगी माफी, रबात संकटकालीन बैठक में मिला सीनियर अधिकारियों का समर्थन
सारांश
मुख्य बातें
फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने 6 अगस्त को रबात, मोरक्को में आयोजित संकटकालीन बैठक में स्वीकार किया कि वर्ल्ड कप के कमर्शियल अधिकारों को निजी निवेशकों को सौंपने की कोशिश में गंभीर गलतियाँ हुईं, और उन्होंने फीफा काउंसिल तथा सभी सदस्य संघों से औपचारिक माफी माँगी। बैठक के बाद जारी बयान में फीफा महासचिव और प्रबंधन बोर्ड के सदस्यों ने इन्फेंटिनो के पद पर बने रहने का पूर्ण समर्थन व्यक्त किया।
क्या था विवाद का केंद्र
इन्फेंटिनो ने 'फीफा फॉरवर्ड एंटरप्राइज' (एफएफई) नामक एक नई कंपनी बनाने की योजना प्रस्तुत की थी, जिसका उद्देश्य फीफा के टूर्नामेंट्स के कमर्शियल और ऑपरेशनल पहलुओं को निजी हाथों में सौंपना था। इस प्रस्ताव का यूईएफए, कॉनकाकैफ, एशियन फुटबॉल कन्फेडरेशन (एएफसी) और दर्जनों राष्ट्रीय फुटबॉल संघों ने कड़ा विरोध किया। फीफा के भीतर से भी इस योजना पर तीखी आपत्तियाँ उठीं, जिसके बाद इन्फेंटिनो को यह प्रस्ताव वापस लेने पर मजबूर होना पड़ा।
बैठक में क्या हुआ
बैठक में मौजूद फीफा महासचिव मैटियास ग्राफस्ट्रॉम ने संगठन के स्टाफ को भेजे एक आंतरिक ज्ञापन में इस पूरे प्रकरण को 'घटनाओं की एक दुखद और निंदनीय सीरीज' बताया। बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि फीफा काउंसिल और सदस्य संघों को प्रक्रिया से बाहर रखे जाने का एहसास नहीं होना चाहिए था और इस प्रस्ताव को अलग तरीके से संभाला जाना चाहिए था।
फीफा के आधिकारिक बयान के अनुसार, इन्फेंटिनो ने कहा कि वे अपने विज़न को पूरा करने के लिए महासचिव और प्रशासन की टीम के साथ मिलकर काम करेंगे। उन्होंने टीम के 'मेहनती और शानदार काम' की सराहना की और पूरा सहयोग देने की प्रतिबद्धता दोहराई। यह भी माना गया कि प्रस्ताव के मीडिया में लीक होने के बाद भी गलत तरीके से स्थिति को संभाला गया।
फीफा की जवाबदेही और आगे की राह
फीफा ने स्पष्ट किया कि एफएफई प्रस्ताव को वापस लेने के साथ-साथ एक व्यापक समीक्षा (रिव्यू) की जाएगी और फीफा काउंसिल की अगली निर्धारित बैठक में एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाएगी। संगठन ने यह भी जोड़ा कि जो कुछ भी किया गया वह फीफा नियामक ढाँचे के पूर्ण अनुपालन में था, भले ही प्रक्रियागत गलतियाँ हुईं।
गौरतलब है कि इन्फेंटिनो 211 फीफा सदस्य संघों द्वारा निर्वाचित एकमात्र अधिकारी हैं, जो उनकी पद पर पकड़ को संस्थागत रूप से मजबूत बनाता है।
शासन पर सवाल
फीफा के बयान में यह भी रेखांकित किया गया कि संगठन अपनी 'ईमानदारी, सुशासन और उचित प्रक्रिया' पर किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा और अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा। आलोचकों का कहना है कि यह प्रकरण फीफा की आंतरिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यह ऐसे समय में आया है जब फुटबॉल की वैश्विक प्रशासन संस्था पहले से ही कई मोर्चों पर जाँच के दायरे में है।
आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि फीफा काउंसिल की अगली बैठक में पेश की जाने वाली समीक्षा रिपोर्ट में क्या सामने आता है और क्या इन्फेंटिनो के नेतृत्व में संगठन सुधार की विश्वसनीय राह दिखा पाता है।