गोल्फ से भारत में पर्यटन, निवेश और पारिवारिक भागीदारी को मिलेगा बढ़ावा: PGTI सीईओ अमनदीप जोहल
सारांश
मुख्य बातें
प्रोफेशनल गोल्फ टूर ऑफ इंडिया (PGTI) के सीईओ अमनदीप सिंह जोहल ने 20 जून को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि गोल्फ में भारत में पर्यटन, निवेश और आर्थिक गतिविधियों को नई ऊँचाई देने की असाधारण क्षमता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यह खेल परिवारों को एक सूत्र में पिरोने का एक अनूठा माध्यम बन सकता है।
मुख्य वक्तव्य: खेल से परे है गोल्फ की भूमिका
'भारत में उभरते खेलों को समझना' विषयक सत्र में जोहल ने कहा, "गोल्फ पर्यटन, रियल एस्टेट, निवेश और आर्थिक गतिविधियों को सपोर्ट कर सकता है। भारत को और गोल्फ कोर्स, ज़्यादा पहुँच और ज़्यादा जागरूकता की ज़रूरत है — इसमें बेहद बड़ी संभावनाएँ हैं।" उन्होंने बताया कि सात साल की आयु से उनका गोल्फ से नाता रहा है और यह खेल उनके लिए नेटवर्किंग और व्यक्तिगत विकास दोनों का मंच रहा है।
माता-पिता के लिए संदेश: दबाव नहीं, भागीदारी ज़रूरी
जोहल ने युवा खिलाड़ियों के अभिभावकों को सलाह देते हुए कहा, "किसी को सिर्फ चैंपियन बनाने के लिए गोल्फ न सिखाएँ। उन्हें खेल से परिचित कराएँ और उन्हें वहाँ पहुँचने दें जहाँ वे स्वाभाविक रूप से पहुँच सकते हैं।" उन्होंने माता-पिता से आग्रह किया कि वे गोल्फ को केवल एक प्रतिस्पर्धी खेल की दृष्टि से न देखें, बल्कि तत्काल सफलता के दबाव से मुक्त रखते हुए बच्चों को इसमें अधिक भागीदारी के लिए प्रेरित करें।
पारिवारिक खेल के रूप में गोल्फ की पहचान
जोहल ने गोल्फ को सर्वश्रेष्ठ पारिवारिक खेलों में से एक बताया। उनके अनुसार, "दादा-दादी, माता-पिता और बच्चे — तीनों पीढ़ियाँ एक साथ गोल्फ कोर्स पर अच्छा समय बिता सकती हैं।" यह पहलू गोल्फ को अन्य प्रतिस्पर्धी खेलों से अलग करता है।
ईमानदारी और जीवन-मूल्य: गोल्फ का सबसे बड़ा सबक
जोहल ने ईमानदारी को गोल्फ का सबसे महत्वपूर्ण मूल्य बताया। उन्होंने कहा कि यह खेल जीवन के सबसे करीब है — "आपको अच्छे और बुरे ब्रेक मिलते हैं, लेकिन आपको गेंद को वैसे ही खेलना होता है जैसी वह है।" यह दर्शन खेल के मैदान से बाहर भी उतना ही प्रासंगिक है।
विशेषज्ञों का पैनल: उभरते खेलों पर व्यापक चर्चा
इस सत्र में गोल्फ, शतरंज, मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स और स्क्वैश के विशेषज्ञ एक साथ आए। पैनल में इंटरनेशनल मास्टर और फीडे सीनियर प्रशिक्षक विशाल सरीन तथा स्क्वैश कोच ध्रुव धवन भी शामिल थे। विशेषज्ञों ने माता-पिता के सहयोग, कोचिंग स्तर, वित्तीय चुनौतियों, एथलीट कल्याण, प्रतिस्पर्धी ढाँचे और दीर्घकालिक विकास के तरीकों पर गहन विचार-विमर्श किया। यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब भारत में खेल-पर्यटन और गैर-पारंपरिक खेलों में निवेश को लेकर नीतिगत रुचि तेज़ी से बढ़ रही है।