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क्या हिमा दास ने फुटबॉल छोड़कर दौड़ में करियर बनाया और रिकॉर्ड बनाने वाली पहली भारतीय महिला बनीं?

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क्या हिमा दास ने फुटबॉल छोड़कर दौड़ में करियर बनाया और रिकॉर्ड बनाने वाली पहली भारतीय महिला बनीं?

सारांश

हिमा दास की प्रेरणादायक यात्रा, फुटबॉल से दौड़ने तक का सफर। जानें कैसे उन्होंने अपने संघर्षों को पार करते हुए अपने सपनों को साकार किया और भारतीय खेलों में नया इतिहास बनाया।

मुख्य बातें

हिमा दास ने संघर्ष और मेहनत से सफलता प्राप्त की।
उन्होंने फुटबॉल से दौड़ने की ओर कदम बढ़ाया।
हिमा ने एशियन गेम्स में 2 गोल्ड और एक रजत पदक जीते।
उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
हिमा की कहानी प्रेरणा का स्रोत है।

नई दिल्ली, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। ये पंक्तियां धावक हिमा दास पर पूरी तरह से सटीक बैठती हैं। कभी जूते न होने के कारण दौड़ने में कठिनाई झेलने वाली हिमा आज देश के सबसे प्रमुख धावकों में शुमार हैं।

हिमा दास का जन्म 9 जनवरी 2000 को नगांव में हुआ। उनका धावक के रूप में सफर स्कूल के दिनों से प्रारंभ हुआ। वह स्कूल में नॉर्थ-ईस्ट के लोगों की तरह फुटबॉल की दीवानी थीं। एक किसान की बेटी होने के नाते, उनके पास ज़िंदगी में सुविधाओं की कमी थी। हिमा ने इंटरस्कूल प्रतियोगिताओं में भाग लिया और अपने फुटबॉल क्लब का प्रतिनिधित्व करते हुए मैच खेले, ताकि कुछ पैसे इकट्ठा किए जा सकें। उस समय हर मैच के लिए लगभग 400-500 रुपये मिलते थे। खेल के प्रति अपने जुनून के चलते उन्होंने फुटबॉल में करियर बनाने का दृढ़ निश्चय किया, लेकिन किस्मत ने कुछ और ही सोचा।

वह जवाहर नवोदय विद्यालय, ढिंग की छात्रा थीं। उनके शिक्षक निप्पॉन दास ने उन्हें दौड़ने पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। हिमा ने गुरु की सलाह मान ली और पूरी मेहनत से जुट गईं। उनके पिता ने भी इस दिशा में गहरी रुचि दिखाई। इंटरस्कूल और जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में उनका प्रदर्शन बेहद उत्कृष्ट रहा। हिमा दास ने दौड़ अपने पुराने जूतों में शुरू की, जो रनिंग शूज नहीं थे।

13 साल की उम्र में हिमा दास ने 100 मीटर स्प्रिंट में अपना पहला स्वर्ण पदक जीता। वह आईएएएफ विश्व अंडर-20 चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं। एशियन गेम्स 2018 में उन्होंने 2 गोल्ड और एक रजत पदक भी जीते। वह 2018 एशियाई खेलों में 50.79 सेकंड के समय के साथ 400 मीटर में भारतीय राष्ट्रीय रिकॉर्ड रखती हैं।

25 सितंबर, 2018 को उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वह असम पुलिस में पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के पद पर नियुक्त हैं।

सितंबर 2023 में, हिमा दास को नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (नाडा) ने 12 महीनों में तीन टेस्ट मिस करने के कारण कुछ समय के लिए निलंबित किया था। अब वह किसी प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए योग्य हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

अगर हिम्मत और समर्पण हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। यह संदेश न केवल खेलों में, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में लागू होता है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिमा दास ने किस खेल में रिकॉर्ड बनाया?
हिमा दास ने आईएएएफ विश्व अंडर-20 चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा।
हिमा दास की पहली प्रतियोगिता कब थी?
हिमा दास ने 13 साल की उम्र में 100 मीटर स्प्रिंट में अपना पहला गोल्ड मेडल जीता।
हिमा दास को किस पुरस्कार से सम्मानित किया गया?
उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
क्या हिमा दास ने फुटबॉल छोड़ दिया था?
हां, उन्होंने अपने शिक्षक की सलाह पर दौड़ने को चुना और फुटबॉल छोड़ दिया।
हिमा दास का जन्म कब हुआ था?
हिमा दास का जन्म 9 जनवरी 2000 को हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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