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क्या शुभम मैयर मल्लखंब को दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव में लोकप्रिय बनाने में सफल होंगे?

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क्या शुभम मैयर मल्लखंब को दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव में लोकप्रिय बनाने में सफल होंगे?

मुख्य बातें

मल्लखंब का विकास आदिवासी बच्चों के लिए आत्मविश्वास और सामाजिक बदलाव का माध्यम है।
कोच शुभम मैयर ने इस खेल को नए आयाम दिए हैं।
खेलो इंडिया खेलों में भागीदारी से बच्चों को नई संभावनाएं मिल रही हैं।
आदिवासी समुदायों में खेलों का विकास एक मुख्य प्राथमिकता है।
स्थायी मल्लखंब प्रशिक्षण केंद्रों का निर्माण किया जा रहा है।

दीव, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव के आदिवासी क्षेत्रों में मल्लखंब एक अनदेखी बदलाव की कहानी बुन रहा है। यह पारंपरिक भारतीय खेल, जो कभी खुले मैदानों और खेतों में खेला जाता था, अब यहां के कुछ सबसे कम संसाधनों वाले समुदायों के बच्चों के लिए आत्मविश्वास, उम्मीद और सामाजिक बदलाव का जरिया बन गया है। मल्लखंब को यह पहचान दिलाने में कोच शुभम मैयर का योगदान महत्वपूर्ण है।

2019-20 में शुभम मैयर, जिनका घर महाराष्ट्र के नासिक जिले में है, को खानवेल ग्राम पंचायत द्वारा कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर नियुक्त किया गया था। शुभम अब खानवेल डिवीजन के शेल्टी गांव में स्थित मल्लखंब अकादमी में मुख्य कोच के रूप में कार्यरत हैं।

शुभम ने जब कोचिंग की शुरुआत की थी, तब उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। अधिकांश बच्चों ने पहले कभी मल्लखंब का नाम नहीं सुना था। प्रशिक्षण के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं थीं। बच्चों ने धान के खेतों और खुली ज़मीन पर प्रशिक्षण लिया, कभी-कभी तो पेड़ों पर भी चढ़ गए। खिलाड़ियों के पास कोई पोल, चटाई, तेल या पाउडर नहीं था। आदिवासी परिवारों से आए बच्चों ने खेल को करियर के रूप में कभी नहीं देखा।

2019-20 में, एक महत्वपूर्ण परिवर्तन आया जब शुभम खेलो इंडिया यूथ गेम्स की तैयारी के लिए पंचकूला (हरियाणा) गए। इसके बाद, उनका उद्देश्य उभरते युवाओं को नेशनल लेवल पर प्रतियोगिता का अवसर देना बन गया। शुभम पिछले पांच वर्षों से इस दिशा में प्रयासरत हैं।

दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव के खेल और युवा मामलों के संयुक्त सचिव अरुण गुप्ता ने कहा, "दादरा और नगर हवेली में आदिवासी खेलों का विकास हमारी प्राथमिकता है।"

गुप्ता ने बताया कि खानवेल में एक स्थायी मल्लखंब प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की गई है, जबकि सिलवासा में एक खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तीरंदाजी, एथलेटिक्स और टेबल टेनिस का समर्थन करता है। यह केंद्र लगभग 75 एथलीटों को रहने की सुविधा प्रदान करता है, जिनमें से अधिकांश आदिवासी पृष्ठभूमि से हैं।

उन्होंने कहा, "दीव, दमन और दादरा एवं नगर हवेली में विश्वस्तरीय सुविधाओं वाले स्टेडियम का निर्माण किया जा रहा है।"

शुभम और उनके एथलीटों के लिए, इस समर्थन का असर पहले से ही दिखाई दे रहा है। नासिक से आए वरिष्ठ कोच की मार्गदर्शन से प्रशिक्षण के तरीकों को औपचारिक रूप देने में मदद मिली है, जबकि नियमित प्रतियोगिताओं ने कौशल में सुधार किया है।

खेलो इंडिया बीच गेम्स 2026 में, शुभम छह लड़कों और छह लड़कियों का एक समूह लेकर आए हैं। कई लोग पहले बार इतने बड़े मल्टी-स्पोर्ट इवेंट का अनुभव कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, "जब बच्चे यहां प्रतियोगिता करते हैं, तो उन्हें समझ आता है कि वे अन्य राज्यों के एथलीटों से अलग नहीं हैं। यह विश्वास सब कुछ बदल देता है।"

12 साल की काव्या ने कहा, "सातवें कक्षा से ही मुझे इसमें रुचि है। सर ने बताया कि कड़ी मेहनत से हम कुछ हासिल कर सकते हैं।"

11 साल की त्रुशा ने कहा कि उसके पिता होटल में रसोइये का काम करते हैं, जबकि उसकी मां घरेलू कामकाज संभालती हैं। "मेरे भाई-बहन मल्लखंब का अभ्यास नहीं करते, लेकिन मैं करना चाहती हूं।"

शुभम ने बताया, "एक उम्र के बाद, पुरुष कोच लड़कियों को प्रशिक्षण नहीं दे पाते। सामाजिक कारक और महिला कोच की कमी के कारण कई लड़कियां पीछे रह जाती हैं। इसके बावजूद, हमारा इरादा दृढ़ है। कोच और प्रशासक समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत हैं।"

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि शुभम मैयर की कोशिशें दादरा और नगर हवेली में खेलों के विकास को नई दिशा दे रही हैं। यह न केवल खेलों की पहचान बढ़ा रहा है, बल्कि आदिवासी बच्चों को एक नया अवसर भी प्रदान कर रहा है। देश के सभी क्षेत्रों में खेलों का विकास एक महत्वपूर्ण कदम है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोच शुभम मैयर का योगदान क्या है?
कोच शुभम मैयर ने दादरा और नगर हवेली में मल्लखंब को लोकप्रिय बनाने और बच्चों को आत्मविश्वास दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
क्या मल्लखंब केवल आदिवासी बच्चों के लिए है?
नहीं, मल्लखंब सभी बच्चों के लिए है, लेकिन आदिवासी समुदायों के बच्चों को इसके माध्यम से विशेष अवसर मिल रहे हैं।
खेलो इंडिया खेलों का मल्लखंब पर क्या प्रभाव है?
खेलो इंडिया खेलों ने मल्लखंब को एक प्लेटफॉर्म प्रदान किया है, जिससे युवा एथलीटों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिलता है।
शुभम मैयर का भविष्य में क्या लक्ष्य है?
शुभम का लक्ष्य मल्लखंब को और अधिक बच्चों के बीच लोकप्रिय बनाना और उन्हें प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना है।
राष्ट्र प्रेस
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