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कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के 7 ऐतिहासिक पल: मिल्खा सिंह के पहले गोल्ड से सात्विक-चिराग तक

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कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के 7 ऐतिहासिक पल: मिल्खा सिंह के पहले गोल्ड से सात्विक-चिराग तक

सारांश

23 जुलाई से ग्लासगो में शुरू हो रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से पहले, भारत के उन सात स्वर्णिम पलों की दास्तान — मिल्खा सिंह के 1958 के पहले गोल्ड से लेकर 2022 में सात्विक-चिराग की ऐतिहासिक जीत तक — जो हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गए।

मुख्य बातें

भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में पहला पदक 1934 में पहलवान राशिद अनवर के रजत से जीता था।
महान धावक मिल्खा सिंह ने 1958 के कार्डिफ कॉमनवेल्थ गेम्स में 440 यार्ड स्पर्धा जीतकर भारत को पहला गोल्ड दिलाया।
2002 के मैनचेस्टर खेलों में 17वीं रैंक की भारतीय महिला हॉकी टीम ने 5वीं रैंक की इंग्लैंड को हराकर ऐतिहासिक गोल्ड जीता।
भारत ने 2010 के दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में 101 पदक (38 गोल्ड, 27 सिल्वर, 36 ब्रॉन्ज) जीते — अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन।
मनिका बत्रा ने 2018 गोल्ड कोस्ट में टेबल टेनिस एकल में गोल्ड जीतकर यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।
सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने 2022 बर्मिंघम में पुरुष युगल बैडमिंटन में भारत का पहला गोल्ड जीता।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आगाज 23 जुलाई से ग्लासगो, स्कॉटलैंड में होने जा रहा है, जहाँ भारत के 124 खिलाड़ी पदक की दौड़ में उतरेंगे। इस महाआयोजन से पहले, आइए उन सात स्वर्णिम पलों को याद करें जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत का नाम अमर कर दिया।

मिल्खा सिंह का पहला गोल्ड — 1958, कार्डिफ

भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना पहला पदक 1934 में जीता था, जब पहलवान राशिद अनवर ने कुश्ती में रजत पदक दिलाया था। लेकिन स्वर्ण के लिए देश को 24 साल का इंतजार करना पड़ा। 1958 में कार्डिफ में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में महान धावक मिल्खा सिंह ने 440 यार्ड स्पर्धा में शीर्ष स्थान हासिल कर भारत को उसका पहला गोल्ड मेडल दिलाया। यह जीत सिर्फ एक एथलीट की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की थी।

महिला हॉकी टीम का ऐतिहासिक गोल्ड — 2002, मैनचेस्टर

2002 में इंग्लैंड के मैनचेस्टर में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय महिला हॉकी टीम ने इतिहास रच दिया। विश्व रैंकिंग में 17वें स्थान पर काबिज भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड, कनाडा और दक्षिण अफ्रीका जैसी मज़बूत टीमों को पछाड़ते हुए फाइनल में जगह बनाई। निर्णायक मुकाबले में भारत ने विश्व रैंकिंग में पाँचवें स्थान की टीम इंग्लैंड को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया — इस खेलों में भारतीय महिला हॉकी की यह सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

मेजबानी में ऐतिहासिक शताधिक पदक — 2010, नई दिल्ली

भारत ने 2010 में नई दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की और यह आयोजन देश के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का साल बन गया। भारत ने 38 गोल्ड, 27 सिल्वर और 36 ब्रॉन्ज सहित कुल 101 पदक जीते — यह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है, जिसे आज तक दोहराया नहीं जा सका। इसी संस्करण में पहलवान गीता फोगाट ने 55 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में गोल्ड जीतकर कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान का खिताब हासिल किया। उनके इस प्रदर्शन ने देशभर में महिलाओं को कुश्ती अपनाने के लिए प्रेरित किया।

मनिका बत्रा का एकल गोल्ड — 2018, गोल्ड कोस्ट

2018 में ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा ने पूरे टूर्नामेंट में अपने अप्रतिम खेल से सबको चकित कर दिया। उन्होंने व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर टेबल टेनिस के एकल वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनने का गौरव प्राप्त किया। यह उपलब्धि भारतीय टेबल टेनिस के लिए एक नए युग की शुरुआत थी।

सात्विक-चिराग की जोड़ी का इतिहास — 2022, बर्मिंघम

2022 में बर्मिंघम में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में बैडमिंटन जोड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने पुरुष युगल में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा। फाइनल में उन्होंने इंग्लैंड की जोड़ी बेन लेन और सीन वेंडी को हराया। यह पहला अवसर था जब कॉमनवेल्थ गेम्स के पुरुष युगल बैडमिंटन में भारत को गोल्ड मेडल मिला।

मुक्केबाजी और बैडमिंटन के अग्रदूत

मुक्केबाज मोहम्मद अली कमर कॉमनवेल्थ गेम्स में देश को मुक्केबाजी में पदक दिलाने वाले पहले भारतीय थे। तीन राउंड में पिछड़ने के बाद उन्होंने शानदार वापसी करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। वहीं, सैयद मोदी ने 1982 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में बैडमिंटन की एकल स्पर्धा में भारत को गोल्ड मेडल दिलाया था।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ग्लासगो की धरती पर भारत के 124 एथलीट इन्हीं महान खिलाड़ियों की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए मैदान में उतरेंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत 2010 के शताधिक पदकों के रिकॉर्ड के करीब पहुँच सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और उसके बाद से उस स्तर को छूना संभव नहीं हुआ। ग्लासगो 2026 में 124 एथलीटों का दल भेजना उत्साहजनक है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या भारत की खेल नीति छिटपुट व्यक्तिगत प्रतिभाओं पर निर्भरता से आगे बढ़कर व्यवस्थागत विकास की ओर बढ़ रही है। मिल्खा सिंह से मनिका बत्रा तक, अधिकांश ऐतिहासिक जीतें संस्थागत ढाँचे की नहीं, असाधारण व्यक्तिगत संकल्प की देन रही हैं — और यही वह खाई है जिसे भरे बिना भारत वैश्विक खेल महाशक्ति नहीं बन सकता।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का पहला गोल्ड मेडल किसने जीता था?
महान धावक मिल्खा सिंह ने 1958 के कार्डिफ कॉमनवेल्थ गेम्स में 440 यार्ड स्पर्धा में जीत दर्ज कर भारत को उसका पहला गोल्ड मेडल दिलाया था। इससे पहले 1934 में पहलवान राशिद अनवर ने रजत पदक के रूप में भारत का पहला कॉमनवेल्थ पदक जीता था।
भारतीय महिला हॉकी टीम ने कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड कब जीता?
भारतीय महिला हॉकी टीम ने 2002 के मैनचेस्टर कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था। विश्व रैंकिंग में 17वें स्थान पर रहते हुए टीम ने फाइनल में पाँचवीं रैंक की इंग्लैंड को हराया था, जो इस खेल में भारत की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जाती है।
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कब रहा?
2010 में नई दिल्ली में मेज़बान के रूप में भारत ने 38 गोल्ड, 27 सिल्वर और 36 ब्रॉन्ज सहित कुल 101 पदक जीते, जो कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। यह रिकॉर्ड आज तक नहीं टूटा है।
सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने कॉमनवेल्थ गेम्स में क्या उपलब्धि हासिल की?
सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुष युगल बैडमिंटन में गोल्ड मेडल जीता। फाइनल में उन्होंने इंग्लैंड की जोड़ी बेन लेन और सीन वेंडी को हराया — यह कॉमनवेल्थ गेम्स के पुरुष युगल बैडमिंटन में भारत का पहला गोल्ड था।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 कहाँ और कब होंगे?
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आयोजन 23 जुलाई से स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में होगा। इस बार भारत की ओर से 124 खिलाड़ी पदक की दौड़ में हिस्सा लेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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