कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के 7 ऐतिहासिक पल: मिल्खा सिंह के पहले गोल्ड से सात्विक-चिराग तक
सारांश
मुख्य बातें
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आगाज 23 जुलाई से ग्लासगो, स्कॉटलैंड में होने जा रहा है, जहाँ भारत के 124 खिलाड़ी पदक की दौड़ में उतरेंगे। इस महाआयोजन से पहले, आइए उन सात स्वर्णिम पलों को याद करें जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत का नाम अमर कर दिया।
मिल्खा सिंह का पहला गोल्ड — 1958, कार्डिफ
भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना पहला पदक 1934 में जीता था, जब पहलवान राशिद अनवर ने कुश्ती में रजत पदक दिलाया था। लेकिन स्वर्ण के लिए देश को 24 साल का इंतजार करना पड़ा। 1958 में कार्डिफ में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में महान धावक मिल्खा सिंह ने 440 यार्ड स्पर्धा में शीर्ष स्थान हासिल कर भारत को उसका पहला गोल्ड मेडल दिलाया। यह जीत सिर्फ एक एथलीट की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की थी।
महिला हॉकी टीम का ऐतिहासिक गोल्ड — 2002, मैनचेस्टर
2002 में इंग्लैंड के मैनचेस्टर में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय महिला हॉकी टीम ने इतिहास रच दिया। विश्व रैंकिंग में 17वें स्थान पर काबिज भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड, कनाडा और दक्षिण अफ्रीका जैसी मज़बूत टीमों को पछाड़ते हुए फाइनल में जगह बनाई। निर्णायक मुकाबले में भारत ने विश्व रैंकिंग में पाँचवें स्थान की टीम इंग्लैंड को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया — इस खेलों में भारतीय महिला हॉकी की यह सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
मेजबानी में ऐतिहासिक शताधिक पदक — 2010, नई दिल्ली
भारत ने 2010 में नई दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की और यह आयोजन देश के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का साल बन गया। भारत ने 38 गोल्ड, 27 सिल्वर और 36 ब्रॉन्ज सहित कुल 101 पदक जीते — यह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है, जिसे आज तक दोहराया नहीं जा सका। इसी संस्करण में पहलवान गीता फोगाट ने 55 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में गोल्ड जीतकर कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान का खिताब हासिल किया। उनके इस प्रदर्शन ने देशभर में महिलाओं को कुश्ती अपनाने के लिए प्रेरित किया।
मनिका बत्रा का एकल गोल्ड — 2018, गोल्ड कोस्ट
2018 में ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा ने पूरे टूर्नामेंट में अपने अप्रतिम खेल से सबको चकित कर दिया। उन्होंने व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर टेबल टेनिस के एकल वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनने का गौरव प्राप्त किया। यह उपलब्धि भारतीय टेबल टेनिस के लिए एक नए युग की शुरुआत थी।
सात्विक-चिराग की जोड़ी का इतिहास — 2022, बर्मिंघम
2022 में बर्मिंघम में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में बैडमिंटन जोड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने पुरुष युगल में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा। फाइनल में उन्होंने इंग्लैंड की जोड़ी बेन लेन और सीन वेंडी को हराया। यह पहला अवसर था जब कॉमनवेल्थ गेम्स के पुरुष युगल बैडमिंटन में भारत को गोल्ड मेडल मिला।
मुक्केबाजी और बैडमिंटन के अग्रदूत
मुक्केबाज मोहम्मद अली कमर कॉमनवेल्थ गेम्स में देश को मुक्केबाजी में पदक दिलाने वाले पहले भारतीय थे। तीन राउंड में पिछड़ने के बाद उन्होंने शानदार वापसी करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। वहीं, सैयद मोदी ने 1982 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में बैडमिंटन की एकल स्पर्धा में भारत को गोल्ड मेडल दिलाया था।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ग्लासगो की धरती पर भारत के 124 एथलीट इन्हीं महान खिलाड़ियों की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए मैदान में उतरेंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत 2010 के शताधिक पदकों के रिकॉर्ड के करीब पहुँच सकता है।