भारत-श्रीलंका टेस्ट: बतौर कप्तान सर्वाधिक मैच खेलने वाले शीर्ष 5 खिलाड़ी — रणतुंगा से धोनी तक
सारांश
मुख्य बातें
भारत और श्रीलंका के बीच 15 अगस्त 2026 से दो मैचों की टेस्ट सीरीज शुरू होने जा रही है, जिसमें शुभमन गिल पहली बार टेस्ट कप्तान के रूप में मैदान में उतरेंगे। इस ऐतिहासिक अवसर से पहले, आइए नज़र डालते हैं उन 5 कप्तानों पर जिन्होंने भारत-श्रीलंका के बीच टेस्ट मुकाबलों में बतौर कप्तान सर्वाधिक मैच खेले हैं।
अर्जुन रणतुंगा — शीर्ष पर श्रीलंकाई कप्तान
भारत-श्रीलंका टेस्ट इतिहास में बतौर कप्तान सर्वाधिक मैच खेलने का रिकॉर्ड अर्जुन रणतुंगा के नाम दर्ज है। उन्होंने भारत के विरुद्ध 13 टेस्ट मैचों में श्रीलंकाई टीम की कमान संभाली। इन 13 मुकाबलों में श्रीलंका को एक भी जीत नहीं मिली — 5 मैचों में हार और 8 मुकाबले ड्रॉ रहे।
विराट कोहली — भारत की ओर से सर्वाधिक मैचों के कप्तान
श्रीलंका के खिलाफ भारतीय कप्तान के रूप में सर्वाधिक मैच खेलने का रिकॉर्ड विराट कोहली के नाम है। कोहली ने श्रीलंका के विरुद्ध 9 टेस्ट मैचों में टीम इंडिया की अगुवाई की। इस दौरान भारत को 6 मैचों में जीत मिली, जबकि केवल 1 मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा — यह रिकॉर्ड भारत के दबदबे को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
मोहम्मद अजहरुद्दीन — तीसरे स्थान पर
इस सूची में तीसरे नंबर पर मोहम्मद अजहरुद्दीन हैं, जिन्होंने श्रीलंका के खिलाफ 8 टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी की। अजहरुद्दीन के नेतृत्व में भारत ने 5 मैच जीते और 3 मुकाबले ड्रॉ रहे — एक भी हार नहीं।
एमएस धोनी — चौथे स्थान पर 'कैप्टन कूल'
महेंद्र सिंह धोनी ने श्रीलंका के खिलाफ 6 टेस्ट मैचों में भारत की कमान संभाली। धोनी की कप्तानी में भारत ने 3 मैच जीते, 1 में हार मिली और 2 मुकाबले ड्रॉ रहे। गौरतलब है कि धोनी की कप्तानी में भारत ने श्रीलंका के खिलाफ कभी कोई टेस्ट सीरीज नहीं गँवाई।
कपिल देव, दुलीप मेंडिस और कुमार संगाकारा — संयुक्त पाँचवें स्थान पर
कपिल देव — जिन्होंने भारत को 1983 का पहला विश्व कप दिलाया — ने श्रीलंका के खिलाफ 6 मैचों में कप्तानी की, जिनमें 2 जीत और 1 हार शामिल रही। श्रीलंका की ओर से दुलीप मेंडिस ने भी भारत के विरुद्ध 6 मैचों में कप्तानी की। कुमार संगाकारा ने भी 6 मैचों में श्रीलंका की अगुवाई की, लेकिन उनका रिकॉर्ड निराशाजनक रहा — केवल 1 जीत, 3 हार और शेष ड्रॉ। अब 15 अगस्त से शुभमन गिल के नेतृत्व में भारत इस गौरवशाली इतिहास को आगे बढ़ाने उतरेगा।