भारतीय वॉलीबॉल टीम का ऐतिहासिक ब्रॉन्ज, FIVB रैंकिंग में 18 पायदान की छलांग; मांडविया ने किया सम्मान
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने सोमवार, 30 जून 2026 को गांधीनगर में भारतीय पुरुष वॉलीबॉल टीम को सम्मानित किया, जिसने मेंस वॉलीबॉल कप में देश के इतिहास का पहला ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद भारत FIVB वर्ल्ड रैंकिंग में 18 स्थान की छलांग लगाकर 60वें से 42वें पायदान पर पहुँच गया है।
ऐतिहासिक प्रदर्शन का सफर
कप्तान जेरोम विनिथ चार्ल्स की अगुवाई और सर्बियाई कोच ड्रैगन मिहाइलोविच के मार्गदर्शन में भारतीय टीम ने इस टूर्नामेंट में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। टीम पूल स्टेज में अजेय रही और ब्रॉन्ज मेडल प्लेऑफ में बहरीन को 3-1 से हराकर टूर्नामेंट के इतिहास में पहली बार पोडियम पर जगह बनाई। गौरतलब है कि यह पहला अवसर था जब भारत ने मेंस वॉलीबॉल कप की मेजबानी की, और घरेलू दर्शकों के सामने यह उपलब्धि और भी अर्थपूर्ण बन गई।
मांडविया का संबोधन और सरकार का संकल्प
खिलाड़ियों, कोचिंग स्टाफ और सपोर्ट स्टाफ को बधाई देते हुए मांडविया ने कहा, 'यह मेडल ऐतिहासिक है, लेकिन यह सिर्फ शुरुआत होनी चाहिए। हर उपलब्धि बड़ी जिम्मेदारी और ज्यादा उम्मीदें लेकर आती है। सरकार की हर नीति, हर निवेश और हर कोशिश का मकसद हमारे एथलीट्स को उनकी पूरी क्षमता का एहसास कराने और अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करना है।' उन्होंने यह भी कहा कि घरेलू मैदान पर पोडियम फिनिश भारतीय वॉलीबॉल की निरंतर प्रगति और बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी करने की देश की बढ़ती क्षमता को रेखांकित करती है।
खेल विकास की दीर्घकालिक रणनीति
मांडविया ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि सरकार की दीर्घकालिक खेल दूरदर्शिता अकादमी विकास, टैलेंट की पहचान, स्पोर्ट्स साइंस, एथलीट कल्याण और अधिक अंतरराष्ट्रीय अनुभव पर केंद्रित है। उनका लक्ष्य भारत को दुनिया के प्रमुख खेल देशों की श्रेणी में लाना है। उन्होंने यह भरोसा भी जताया कि इस ब्रॉन्ज मेडल की सफलता देशभर में वॉलीबॉल खिलाड़ियों की नई पीढ़ी को प्रेरित करेगी।
कप्तान की प्रतिक्रिया
कप्तान जेरोम विनिथ चार्ल्स ने टीम को तैयारियों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद के लिए सरकार की समर्थन प्रणाली को श्रेय देते हुए कहा, 'हम सरकार से मिले अटूट समर्थन के लिए बहुत आभारी हैं। विश्व स्तरीय सुविधाओं, ट्रेनिंग के माहौल, रिकवरी की व्यवस्था और कुल मिलाकर मिले समर्थन की वजह से हम पूरी तरह से अपने खेल पर ध्यान केंद्रित कर पाए। यह ऐतिहासिक मेडल सिर्फ हमारा नहीं, बल्कि हर उस भारतीय का है जो स्टेडियम में मौजूद था और पूरे टूर्नामेंट के दौरान हमारा हौसला बढ़ाता रहा।'
आगे क्या
यह जीत ऐसे समय में आई है जब भारत खेल के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बनाने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है। FIVB रैंकिंग में 42वें स्थान पर पहुँचना भविष्य के बड़े टूर्नामेंट — जिनमें एशियाई खेल और विश्व चैंपियनशिप क्वालीफायर शामिल हैं — के लिए भारत की स्थिति को मज़बूत करता है। मांडविया के अनुसार, यदि यह रफ्तार बनी रही, तो भारत हर बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन में नियमित रूप से पोडियम पर जगह बनाएगा।