महिला एशिया कप 2025: 12 साल की मेहनत के बाद इंडोनेशिया का ऐतिहासिक डेब्यू, कप्तान नंदा की प्रेरक कहानी
सारांश
मुख्य बातें
इंडोनेशिया की सीनियर महिला क्रिकेट टीम सोमवार, 1 सितंबर को दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में अपने इतिहास का पहला महिला एशिया कप मैच खेलने उतरेगी — यह उपलब्धि करीब 12 वर्षों की अथक मेहनत, सीमित संसाधनों और असाधारण जुनून का परिणाम है। टीम का पहला मुकाबला बांग्लादेश से होगा, इसके बाद मौजूदा चैंपियन श्रीलंका और मेजबान संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भी टक्कर होनी है।
शून्य से शुरुआत: इंडोनेशिया की क्रिकेट यात्रा
लगभग एक दशक पहले तक इंडोनेशिया के पास महिला टी20 इंटरनेशनल का दर्जा तक नहीं था। देश में एक भी टर्फ विकेट वाला मैदान नहीं था और क्रिकेट का ढाँचा नाममात्र का था — खेल मुख्यतः प्रवासी समुदाय के क्लबों तक सीमित था। 17,000 से अधिक द्वीपों वाले दुनिया के चौथे सबसे अधिक आबादी वाले देश के लिए यह यात्रा उतनी ही असंभव लगती थी, जितनी अब प्रेरणादायक है।
2014 में राष्ट्रीय महिला चैंपियनशिप की शुरुआत हुई, 2015 में जयपुर में पहला डेवलपमेंट टूर हुआ और 2016 में इंडोनेशिया के नेशनल स्पोर्ट्स गेम्स में क्रिकेट को शामिल किया गया। 'परसुआन क्रिकेट इंडोनेशिया' के चेयरमैन अभिराम सिंह यादव के अनुसार, फेडरेशन ने 21 अलग-अलग द्वीपों पर क्रिकेट फैलाया और स्कूलों में पारंपरिक बैट-एंड-बॉल खेल 'कास्टी' के ज़रिये बच्चों को खेल से जोड़ा। यादव ने बताया, "हमने क्रिकेट की शुरुआत जीरो से की, स्कूलों में इसे शुरू किया और अब हम 21 अलग-अलग द्वीपों पर क्रिकेट खेल रहे हैं।"
कप्तान नंदा: बैडमिंटन से क्रिकेट तक का सफर
टीम की कप्तानी नी पुतु आयु नंदा साकारिनी कर रही हैं — एक विकेटकीपर-बल्लेबाज, जिनका परिचय 2013 में हाई स्कूल के दिनों में क्रिकेट से हुआ था। नंदा बैडमिंटन खेलते हुए बड़ी हुईं — वही खेल जिसमें इंडोनेशिया ने ओलंपिक में 8 स्वर्ण, 6 रजत और 8 कांस्य पदक जीते हैं। उन्होंने बताया, "बैडमिंटन में बहुत सारे खिलाड़ी हैं और नेशनल टीम में जगह बनाना मुश्किल था। इसी वजह से मुझे लगा कि क्रिकेट मेरे लिए अच्छा रहेगा, और अब यह मेरा करियर है।"
2019 में टी20 इंटरनेशनल डेब्यू के बाद नंदा ने क्रिकेट पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करने के लिए फिजिकल एजुकेशन पढ़ाने की नौकरी तक छोड़ दी। एशिया कप की दहलीज पर खड़ी नंदा ने कहा, "इतने बड़े मंच पर इंडोनेशिया की कप्तानी करना वाकई रोमांचक और अद्भुत एहसास है। मैं थोड़ी नर्वस भी महसूस कर रही हूँ, क्योंकि हम पहली बार एशिया कप में खेल रहे हैं।"
क्वालिफिकेशन का रास्ता और कोच सालेकर की भूमिका
हेड कोच नितिश सालेकर — जो भारत में 16 साल तक क्रिकेट खेले और महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व किया — पहले थाईलैंड की महिला टीम के साथ काम कर चुके हैं। उनके मार्गदर्शन में नवंबर 2025 में हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में कैंप और वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के साथ साझेदारी के बाद, इंडोनेशिया ने जून 2026 में मलेशिया में हुए एसीसी विमेंस प्रीमियर कप में सिंगापुर, कुवैत, मलेशिया, ओमान और हांगकांग के खिलाफ लगातार पाँच जीत दर्ज कीं। ओमान पर 113 रन की निर्णायक जीत ने महिला एशिया कप में उनकी पहली बार जगह सुनिश्चित की।
सालेकर ने कहा, "मुझे टीम के क्वालिफाई करने का पूरा भरोसा था क्योंकि मुझे पता था कि हम कैसा क्रिकेट खेल रहे हैं। मैंने खिलाड़ियों से बस एक ही बात कही है — इस मंच का मजा लें और इसका पूरा फायदा उठाएं।"
गौरतलब है कि इंडोनेशिया 2024 में बाली में हुई एजीएम के ज़रिये एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) में शामिल हुआ था। तत्कालीन ACC चेयरमैन और वर्तमान ICC प्रमुख जय शाह ने उनकी सदस्यता को मंजूरी दी थी।
विविधता में एकता: ड्रेसिंग रूम की अनोखी तस्वीर
इस टीम में पापुआ, ईस्ट नुसा तेंगारा और जकार्ता जैसे दूर-दराज इलाकों से खिलाड़ी शामिल हैं, हालाँकि अधिकतर खिलाड़ी बाली को अपना घर मानती हैं। टीम में हिजाब पहनने वाली और न पहनने वाली खिलाड़ी हैं, साथ ही ईसाई, कैथोलिक, बौद्ध और हिंदू खिलाड़ी भी। नंदा ने कहा, "हमारे धर्म अलग-अलग होने से कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि हमारा लक्ष्य एक ही है — इंडोनेशिया का प्रतिनिधित्व करना।" यादव ने बताया कि हर मैच से पहले सभी खिलाड़ी बारी-बारी से खड़े होकर एक साथ प्रार्थना करती हैं, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो।
यह भी उल्लेखनीय है कि महिला टीम 100 प्रतिशत स्थानीय खिलाड़ियों से बनी है — पुरुष टीम के विपरीत, जिसमें विदेशी खिलाड़ी भी शामिल हैं।
आगे की राह: टर्फ मैदान और बड़े सपने
अभी तक इंडोनेशिया के सभी 21 प्रांत एस्ट्रोटर्फ पर खेलते हैं। फेडरेशन ने हाल ही में इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के दो टर्फ मैदान बनाने का अनुबंध पूरा किया है, जो नवंबर-दिसंबर 2026 तक तैयार होने की उम्मीद है। सालेकर के अनुसार, "जब आप एस्ट्रो से टर्फ पर शिफ्ट होते हैं तो पूरा क्रिकेट ही बहुत बदल जाता है।" वर्तमान में इंडोनेशिया महिला टीम विश्व रैंकिंग में 21वें स्थान पर है। यादव का लक्ष्य है कि अगले पाँच वर्षों में टीम शीर्ष 12 में पहुँचे। कोच सालेकर का अनुमान है कि सीनियर वर्ल्ड कप में प्रतिस्पर्धा करने लायक बनने में तीन से पाँच साल और लगेंगे। नंदा की नज़र इससे भी आगे है — वे चाहती हैं कि दुबई में टीम को खेलते देख इंडोनेशिया की अगली पीढ़ी क्रिकेट अपनाए, और एक दिन ओलंपिक में भी देश का परचम लहराए।